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उत्तर प्रदेश में विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) चल रहा है. वोटर ड्राफ्ट लिस्ट से 2.89 करोड़ नाम बाहर कर दिए गए हैं. द क्विंट ने आंकड़ों का विश्लेषण किया तो पता चला कि नाम कटने वालों में सबसे ज्यादा 61 वर्ष से ऊपर के मतदाता हैं, जिनमें से मृत्यु की वजह से सबसे ज्यादा नाम कटे हैं. दूसरे नंबर पर 31 से 35 साल के मतदाता हैं. इस उम्र के लोगों के सबसे ज्यादा नाम स्थायी रूप से विस्थापित होने की वजह से कटे हैं. आगे उत्तर प्रदेश में हुए डिलीशन का उम्र के हिसाब से पूरा विश्लेषण बताते हैं.
बुजुर्गों के बाद 31-40 साल के युवाओं के सबसे ज्यादा नाम कटे
मतदाता सूची से हटाए गए नामों को अगर उम्र के हिसाब से देखें तो स्थिति बेहद स्पष्ट हो जाती है. कुल 2.88 करोड़ डिलीशन में हर आयु वर्ग प्रभावित हुआ है, लेकिन 60 वर्ष से ऊपर और 30 से 40 वर्ष के बीच के आंकड़े विशेष ध्यान देने योग्य हैं.
सर्वाधिक विलोपन (61+ साल): आंकड़ों के मुताबिक, सबसे ज्यादा नाम 61 साल से अधिक आयु वर्ग में काटे गए हैं. इस कैटेगरी में कुल 55,13,025 मतदाताओं के नाम हटाए गए हैं. यह कुल डिलीशन का एक बड़ा हिस्सा है, जो स्वाभाविक माना जा सकता है क्योंकि मृत्यु दर का प्रभाव इस वर्ग पर सर्वाधिक दिखा.
कामकाजी वर्ग (31-40 साल) का संकट: बुजुर्ग मतदाताओं के बाद नाम कटने वालों में सबसे ज्यादा 31 से 40 साल के बीच के मतदाता हैं.
31-35 आयु वर्ग में 41,36,431 नाम कटे हैं
36-40 आयु वर्ग में 37,20,010 नाम कटे हैं.
31-35 साल के युवाओं में सबसे ज्यादा विस्थापन
SIR में 31-35 उम्र के लोगों के नाम कटने की वजहों का विश्लेषण करने पर पता चला कि सबसे ज्यादा डिलीशन विस्थापन की वजह से हुआ.
उत्तर प्रदेश में SIR प्रक्रिया के दौरान विस्थापन की वजह से कुल 1,29,76119 नाम काटे गए. इन नामों में सबसे ज्यादा 31 से 35 साल के मतदाता हैं, जिनकी संख्या 21,64389 है.
31-40 आयु वर्ग के लगभग 78 लाख और 21-30 आयु वर्ग के 51 लाख मतदाताओं का नाम कटना आगामी चुनावों में वोटिंग पैटर्न को प्रभावित कर सकता है. यह वह वर्ग है जो राजनीतिक विमर्श में सबसे मुखर रहता है. वहीं 'स्थायी रूप से स्थानांतरित' (Shifted) श्रेणी का 1.29 करोड़ का आंकड़ा पलायन की गंभीरता को भी दिखाता है.
