नागपुर हिंसा के बाद से ही सोशल मीडिया पर सांप्रदायिक दावों की भरमार है. इसी बीच RSS के सदस्य इंद्रेश कुमार भी फेक न्यूज के शिकार हुए. पुलिस को धमकाते एक शख्स के वीडियो को भी सांप्रदायिक रंग दिया गया. तीन तलाक को लेकर भी भ्रामक दावे किए गए. हमारे इस वीकली राउंडअप में जानिए इन सभी भ्रामक दावों का सच. वक्फ बोर्ड को लेकर किए जा रहे झूठे दावों का सिलसिला भी जारी है.
नागपुर हिंसा के दौरान चल रही इफ्तार पार्टी का है ये वीडियो ?
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल है, जिसमें राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के सदस्य इंद्रेश कुमार एक इफ्तार में शामिल दिख रहे हैं.
17 मार्च को नागपुर (Nagpur Violence) में बजरगंदल और विश्व हिंदू परिषद ने मुगल शासक औरंगजेब की मजार को हटाने की मांग के साथ प्रदर्शन किया था. प्रदर्शनकारियों ने इस दौरान छत्रपति शिवाजी महाराज चौक पर औरंगजेब के पुतले को आग भी लगाई. दावा किया जा रहा है कि इसी दौरान RSS नेता इफ्तार पार्टी में देखे गए
ये दावा गलत है. ये वीडियो दिल्ली के निजामुद्दीन इलाके में 15 मार्च को हुए इफ्तार का है. यानी नागपुर में हुई हिंसा से 2 दिन पहले का.
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तीन तलाक के चलते मौलवी को पीटती महिला का है ये वीडियो ?
पोस्ट को इस कैप्शन के साथ शेयर किया जा रहा है, "महिला के शौहर ने 3 तलाक देकर छोड़ दिया तो मौलवी ने पंचायत मे उस महिला का हलाला उसके सगे बेटे से करवाने का फतवा जारी कर दिया. अपने सगे बेटे से निकाह-हलाला की बात सुन बहादुर महिला ने मौलवी को चप्पलों से पीट डाला." (Sic.)
यै दावा सही नहीं है.
यह वीडियो हालिया नहीं है बल्कि पुराना है.
वीडियो में पिटाई की वजह 'तीन तलाक' या 'हलाला' जैसी कोई प्रथा नहीं है.
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक यह वीडियो उत्तर प्रदेश के मुरादाबाद का है जहां झाड़फूंक कराने गई एक युवती के साथ मौलाना ने छेड़खानी कर दी थी.
लड़की की मां को जब इसकी जानकारी हुई तो सबके सामने ही चप्पलों से पीटना शुरू कर दिया था.
पति को धोखा देती दिख रही महिला का ये वीडियो असली घटना का है?
यह दावा सही नहीं है.
यह वीडियो असली नहीं है बल्कि स्क्रिप्टेड है.
वीडियो हालिया नहीं बल्कि 25 अगस्त 2024 से इंटरनेट पर मौजूद है.
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पुलिस को धमकाते मुस्लिम शख्स का है ये वीडियो ?
सोशल मीडिया पर एक वीडियो वायरल हो रहा है जिसमें देखा जा सकता है कि मुसलमानों द्वारा इस्तेमाल की जाने टोपी लगाए हुए एक शख्स कतिथ तौर पर एक पुलिसकर्मी को सस्पेंड कराने की धमकी दे रहा है. इस वीडियो को असली घटना बताकर शेयर किया जा रहा है और आरोपी का नाम सलीम बताया जा रहा है.
यह वीडियो असली नहीं है बल्कि स्क्रिप्टेड है. वीडियो में नजर आ रहे शख्स का नाम सलीम नहीं है बल्कि दीपक शर्मा है. दीपक शर्मा के सोशल मीडिया एकाउंट्स पर इसी तरह के स्क्रिप्टेड वीडियो अपलोड किए जाते हैं.
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CAA के दौरान हुए प्रदर्शन का पुराना वीडियो वक्फ बिल से जोड़कर वायरल
सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है जिसमें पुलिसकर्मी लोगों को लाठियों से पीट रहे हैं. दावा किया जा रहा है कि ये वीडियो उत्तर प्रदेश में वक्फ बोर्ड संशोधन बिल (Waqf Amendment Bill) के खिलाफ इकठ्ठा हुए समुदाय विशेष का है जिन पर पुलिस कार्रवाई कर रही है.
यह वीडियो 2019 का है, जब उत्तर प्रदेश के गोरखपुर में पुलिस और नागरिकता संशोधन अधिनियम (CAA) का विरोध कर रहे लोगों के बीच झड़प हुई थी.
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