सोशल मीडिया पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी का एक वीडियो शेयर किया जा रहा है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि वे 'ऊंची जातियों' के खिलाफ बोल रहे हैं और दलितों को 'उकसा' रहे हैं.
इस वीडियो को शेयर करने वाली एक पोस्ट में लिखा है, "सवर्णों के लिए गड्ढे खोदने वाले एवं तथाकथित दलितों को उकसाने वाले, चंद्रशेखर रावण की पार्टी के राष्ट्रीय प्रमुख नरेंद्र मोदी जी ही है, देश में भीमवाद का सबसे बड़ा समर्थक देश का प्रधानमंत्री है, अब आप ही लोग देखिए कि किस प्रकार से सवर्ण समाज के लिए इस व्यक्ति के मन में कितना विरोध भरा हुआ है ?? "
वीडियो में पीएम मोदी ये कहते हैं,
"मुझे बताइए, अगर मौका मिले, तो क्या यह आदमी सब कुछ ठीक नहीं कर देगा? तुमने मुझे पानी नहीं भरने दिया, तुमने मुझे मंदिर नहीं जाने दिया, तुमने मेरे बच्चों को स्कूल में दाखिला नहीं दिया."
(इसी तरह के दावे का अन्य आर्काइव यहां देखा जा सकता है.)
क्या यह सच है?: नहीं, दर्शकों को गुमराह करने के लिए वीडियो को क्रॉप किया गया है.
असली वीडियो में, पीएम मोदी इस बारे में बात कर रहे हैं कि डॉ. बी.आर. अंबेडकर के मन में कभी भी बदले की भावना या गुस्सा नहीं था.
हमने सच का पता कैसे लगाया ?: हमने Google Lens का इस्तेमाल करके वीडियो पर रिवर्स इमेज सर्च किया जिसमें हमें ऐसी रिपोर्टें मिलीं जिनमें PM मोदी को वैसे ही कपड़े पहने और वैसी ही फ्रेमिंग में दिखाया गया था.
दी गई जानकारी के मुताबिक यह वीडियो विज्ञान भवन में आयोजित की गई चौथी B R अंबेडकर नेशनल मेमोरियल फाउंडेशन की घटना का था.
इसके बाद, हमने इससे सम्बंधित कीवर्ड सर्च किया जिसमें हमें Times Now के आधिकारिक YouTube अकाउंट पर अपलोड किया गया इसका ओरिजिनल वीडियो मिला.
21 मार्च 2016 को अपलोड किए गए इस वीडियो का टाइटल था "PM Narendra Modi On Reservation Policy and Dalits | Full Speech"।
इस वीडियो के लगभग 33:35 मिनट पर वायरल दावे में कही गई बातें सुनी जा सकती हैं.
हालांकि पूरा वीडियो में वायरल बयान का संदर्भ मिलता है.
लगभग 32:52 पर, पीएम मोदी कहते हैं, "असल में मैं यह कह रहा हूं कि हमें समाज में एकता को मजबूत करना चाहिए, और इस मामले में हमें बाबासाहेब से सीखना चाहिए. क्या आप ऐसे व्यक्ति के बारे में सोच भी सकते हैं जिसने इतना कुछ सहा हो, जिसका बचपन अन्याय, उपेक्षा और उत्पीड़न से भरा रहा हो, जिसने अपनी मां को परेशान होते देखा हो? मुझे बताइए, अगर मौका मिले, तो क्या यह व्यक्ति सब कुछ ठीक नहीं कर देगा? आपने मुझे पानी नहीं भरने दिया, आपने मुझे मंदिर नहीं जाने दिया, आपने मेरे बच्चों को स्कूल में दाखिला नहीं दिया. "
इसके बाद अपनी बात जारी रखते हुए पीएम मोदी कहते हैं कि,
यह रिएक्शन इंसान के लिए नैचुरल होता है. लेकिन बाबासाहेब हमसे एक लेवल ऊपर थे. पावर मिलने के बाद भी, हाथ में पेन होने के बाद भी, और आप सब उनकी पार्लियामेंट्री डिबेट्स से देख सकते हैं, उनकी बातों में कभी बदले या गुस्से का जरा भी एहसास नहीं होता था. उनका नजरिया था, और मैं अपने तरीके से समझाऊंगा, कि कभी-कभी खाते समय हम अपनी जीभ को दांतों से दबाते है और काट लेते हैं. लेकिन इसका मतलब यह नहीं है कि हम अपने दांत तोड़ दें. क्यों? क्योंकि हम जानते हैं कि दांत और जीभ दोनों हमारे अपने हैं. और ठीक वैसे ही, बाबासाहेब के लिए सवर्ण से लेकर दलित तक हर कोई उनका अपना और उनके बराबर था.पीएम मोदी
इससे पता चलता है कि पीएम मोदी इस बारे में बोल रहे थे कि कैसे डॉ. बीआर अंबेडकर के मन में कभी भी बदले की भावना नहीं थी और कैसे सवर्ण और दलित उनके लिए सामान्य हैं.
यह इस दावे को खारिज करता है कि मोदी 'ऊंची जातियों' के खिलाफ बोल रहे थे और दलितों को 'भड़काने' वाले बयान दे रहे थे.
निष्कर्ष: पीएम मोदी का वीडियो एडिटेड है और असल वीडियो में पीएम मोदी को डॉ. बीआर अंबेडकर की तारीफ करते हुए दिखाया गया है.
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