बिहार विधानसभा चुनाव में प्रशांत किशोर की पार्टी जन सुराज खाता न खोल पाई हो, लेकिन कई सीटों पर तीसरे नंबर पर रहकर एनडीए और महागठबंधन की हार-जीत को प्रभावित किया है. इसे समझेंगे और बताएंगे कि सियासी पिच पर चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर का पॉलिटिकल डेब्यू कितना सफल रहा?
बता दें कि प्रदेश में दो साल की पदयात्रा के बाद प्रशांत किशोर ने साल 2024 में गाधी जयंती के अवसर पर आधिकारिक तौर पर जन सुराज पार्टी के गठन की घोषणा की थी. करीब एक साल बाद हुए चुनाव में जन सुराज ने 243 में से 238 सीटों पर उम्मीदवार उतारे थे.

