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"जाति-सूचक गाली दी, बाल खींचे," UGC नियमों पर इलाहाबाद यूनिवर्सिटी में बवाल

आरोप है कि UGC गाइडलाइंस पर चर्चा के दौरान ABVP के सदस्यों ने छात्रों पर हिंसक हमला किया और जातिसूचक गालियां दी.

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उच्च शिक्षण संस्थानों में भेदभाव से जुड़े मुद्दों को लेकर विश्वविद्यालय अनुदान आयोग (UGC) द्वारा जारी नई गाइडलाइंस पर सुप्रीम कोर्ट की रोक के बाद भी विवाद जारी है. इलाहाबाद विश्वविद्यालय में गाइडलाइंस के समर्थन में आयोजित एक चर्चा के दौरान मारपीट की घटना सामने आई है, जिसमें दिशा छात्र संगठन के कई छात्र घायल हो गए.

दिशा से जुड़े छात्रों का आरोप है कि राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के छात्र संगठन अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) से जुड़े छात्रों ने दिशा छात्र संगठन के छात्रों पर हिंसक हमला किया.

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29 जनवरी को सुप्रीम कोर्ट द्वारा UGC रेगुलेशन पर रोक लगा दिया गया था, हालांकि देशभर के कई विश्वविद्यालयों में इन गाइडलाइंस के समर्थन में कार्यक्रम और प्रदर्शन जारी हैं.

'शांतिपूर्ण चर्चा के दौरान मारपीट'

प्रयागराज स्थित इलाहाबाद सेंट्रल यूनिवर्सिटी में 3 फरवरी को दिशा छात्र संगठन से जुड़े छात्र बरगद लॉन में UGC नियमावली को लेकर एक स्टडी सर्कल चला रहे थे. इसी दौरान मारपीट की घटना हुई. संगठन से जुड़े छात्रों का आरोप है कि इस चर्चा के दौरान एबीवीपी और अन्य बजरंग दल से जुड़े सदस्यों ने उनके साथ बदसलूकी की, मारपीट की और जातिसूचक गालियां दीं.

दिशा छात्र संगठन से जुड़े चंद्र प्रकाश ने द क्विंट को बताया कि परिसर में यूजीसी के नए नियमों को समझाने के लिए एक शांतिपूर्ण स्टडी सर्कल चलाया जा रहा था. इसी दौरान बजरंग दल की एक फोर-व्हीलर उस स्थान पर पहुंची. गाड़ी से उतरे लोगों ने बिना किसी उकसावे के शोर मचाना शुरू किया और झूठा आरोप लगाया कि ब्राह्मणों के खिलाफ नारे लगाए जा रहे हैं. जब छात्रों ने इन आरोपों को गलत बताया, तो उन पर अचानक हमला कर दिया गया.

चंद्र प्रकाश के मुताबिक, बजरंग दल और एबीवीपी से जुड़े करीब 30–40 लोगों ने छात्रों के साथ मारपीट की.

महिला छात्रा के साथ मारपीट और छेड़छाड़ के आरोप

घटना में घायल हुईं छात्रा निधि यादव ने द क्विंट को बताया कि जब एक छात्र को घेरकर उसके साथ बदसलूकी की जा रही थी, तब वह बीच-बचाव करने पहुंचीं. इस पर हमलावरों ने उनके साथ जाति-सूचक गाली-गलौज की, उनके बाल खींचे, लात-घूंसे मारे और प्राइवेट पार्ट पर भी हमला किया. निधि के मुताबिक, इस हमले में उनके चश्मे टूट गए, नाक पर कट लगा है, जबकि पेट और कान के पीछे भी गंभीर चोटें आई हैं.

"हमलावर लगातार मां-बहन की भद्दी गालियां दे रहे थे. उन्होंने पेट में मारा, बाल खींचे और इस तरह पीटा कि कई लोगों के शरीर से खून निकलने लगा. मारपीट के दौरान हमलावर ऐसी-ऐसी जगहों पर छू रहे थे, जो साफ तौर पर छेड़खानी की श्रेणी में आता है."
निधि यादव, हिंसा में घायल छात्रा

आरोप लगाते हुए एक छात्र ने कहा- "मारपीट के दौरान एबीवीपी से जुड़े छात्रों ने कथित तौर पर एक अन्य छात्र संजय सिंह के नाक पर जोर से वार किया, जिससे उसकी नाक से खून बहने लगा."

संजय ने आरोप लगाया है कि एबीवीपी से जुड़े हिंदी विभाग के छात्र भावेश दुबे छात्रों पर लोहे के साइन बोर्ड से हमला करने के इरादे से आगे बढ़ रहे थे.

'यूनिवर्सिटी प्रशासन ने ABVP से जुड़े छात्रों को भागने दिया'

छात्रों का आरोप है कि एबीवीपी और बजरंग दल के लोग फोर-व्हीलर में सवार होकर परिसर में दाखिल हुए थे, जबकि आम छात्रों को साइकिल तक ले जाने की अनुमति नहीं होती. उनका दावा है कि विश्वविद्यालय प्रशासन की मिलीभगत के बिना इस तरह की एंट्री संभव नहीं थी.

निधि यादव ने विश्वविद्यालय प्रशासन पर आरोप लगाते हुए कहा,

"कुछ गार्डों ने इस मामले में हमलावरों का सहयोग किया और उनकी गतिविधियों को रोकने में कोई मदद नहीं की. जब मैंने और अन्य छात्रों ने विरोध किया, तब भी प्रशासन ने उन्हें रोकने के लिए कोई ठोस कार्रवाई नहीं की और हमलावरों को परिसर से बाहर भागने की अनुमति दे दी."

"यूनिवर्सिटी प्रशासन ने हमला करने आए छात्रों को रोकने के बजाय हमलोगों को ही पकड़कर ऑफिस में ले जाने और पूछताछ करने की कोशिश की", चंद्र प्रकाश ने आरोप लगाया.

दिशा छात्र संगठन के छात्रों ने प्रॉक्टर कार्यालय को दिए गए शिकायत पत्र में आरोप लगाया है कि सम्राट राय, आयुष दुबे, भावेश दुबे, धीरज पांडेय, अनुराग मिश्रा, वैभव पांडेय, अभिनव द्विवेदी और विपुल तिवारी के नेतृत्व में 30–40 अज्ञात लोगों ने उन पर डंडों व बांस से हमला किया. इसके साथ ही गाली-गलौज करते हुए जान से मारने और आगे "सबक सिखाने" की धमकी भी दी गई.

एबीवीपी ने आरोपों से किया इनकार

एबीवीपी से जुड़े और इलाहाबाद विश्वविद्यालय के छात्र भावेश दुबे ने अपने ऊपर लगे आरोपों से इनकार किया है. उनका कहना है कि दिशा छात्र संगठन ने अपने कार्यक्रम में बाहरी लोगों को बुलाया था और वहां सवर्णों तथा देश के खिलाफ नारे लगाए जा रहे थे.

मारपीट के आरोपों पर भावेश दुबे ने कहा कि पहले दिशा छात्र संगठन के छात्रों ने उनके साथी सम्राट पर हमला किया था, जिसके बाद उन्होंने आत्मरक्षा में लोहे का साइन बोर्ड उठाया.

वहीं, एबीवीपी की इकाई अध्यक्ष हिमांशु पांडेय ने द क्विंट को बताया कि दिशा छात्र संगठन के लोग देश विरोधी नारे लगा रहे थे. उन्होंने कहा कि कुछ सामान्य छात्रों और संगठन से जुड़े छात्रों ने इसका विरोध किया, जिसके बाद दिशा छात्र संगठन की ओर से पहले हमला किया गया.

हिमांशु ने बताया कि संगठन के छात्रों ने प्रॉक्टर कार्यालय में लिखित शिकायत देकर दिशा छात्र संगठन से जुड़े आरोपी छात्रों पर कार्रवाई की मांग की है.

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 प्रशासन पर आरोप और दो छात्रों का निलंबन

छात्रों का कहना है कि इस मामले अब तक FIR दर्ज नहीं की गई क्योंकि विश्वविद्यालय ने हिंसा की रिपोर्ट थाने को नहीं भेजी. उन्हें मेडिकल सुविधा और FIR के लिए विश्वविद्यालय और थाने के बीच चक्कर लगाने पड़ रहे हैं. मेडिकल के लिए भी विश्वविद्यालय के तरफ से फॉरवर्ड नहीं किया जा रहा है.

कर्नलगंज थाने में दी गई शिकायत में कहा गया है कि हमलावरों ने छात्रों को पीटा, छात्राओं के बाल खींचे और प्राइवेट पार्ट्स पर हमला किया, साथ ही लाठी और डंडों से हमला किया और 'चमार, पासी, नीच' जैसे जातिसूचक शब्दों का प्रयोग कर जान से मारने की धमकी दी.

कर्नलगंज थाना प्रभारी ने द क्विंट को बताया कि उन्हें शिकायत पत्र मिल गया है, लेकिन विश्वविद्यालय की पूरी रिपोर्ट मिलने के बाद ही FIR दर्ज की जाएगी, जो अभी तक नहीं आई है.

इलाहाबाद विश्वविद्यालय की PRO जया कपूर ने द क्विंट को बताया कि इस मामले में बीए तृतीय वर्ष के दो छात्रों, भावेश दुबे और निधि यादव को निलंबित कर कारण बताओ नोटिस जारी किया गया है. उन्होंने कहा कि दिशा छात्र संगठन द्वारा बिना अनुमति कार्यक्रम और नारेबाजी की जा रही थी. इसके विरोध में अन्य छात्रों ने प्रतिक्रिया दी, जिसके बाद दोनों गुटों में झड़प हुई.

PRO जया कपूर ने आगे बताया कि प्रशासन ने स्पष्ट किया है कि परिसर में हिंसा, जातिसूचक भाषा, अभद्रता या महिलाओं के प्रति दुर्व्यवहार किसी भी स्थिति में स्वीकार्य नहीं है. शिकायतों के आधार पर जांच शुरू कर दी गई है और एफआईआर दर्ज करने की प्रक्रिया भी जारी है.

हालांकि दिशा छात्र संगठन का कहना है कि विश्वविद्यालय में स्टडी सर्कल आम बात है और इसके लिए किसी अनुमति की जरूरत नहीं पड़ती. निधि यादव का कहना है कि अगर विश्वविद्यालय परिसर में 10-20 छात्र बैठकर चर्चा नहीं कर सकते, तो वे कहां करेंगे और अब इसके लिए भी अनुमति लेनी पड़ेगी.

चंद्र प्रकाश का आरोप है कि प्रशासन ने कोई कार्रवाई नहीं की, यहां तक कि घायल छात्रों को मेडिकल सुविधा भी नहीं मिली, जबकि उनके साथी निधि को निलंबित कर दिया गया है.

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