पश्चिम बंगाल में हुए विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के बाद इलेक्शन कमीशन ने विचाराधीन (अंडर एडजुडिकेशन रिपोर्ट) 60 लाख से अधिक मतदाताओं का डेटा जारी किया है. इन आंकड़ों के मुताबिक, राज्य भर के 23 जिलों में कुल 60,06,675 मामलों पर कार्रवाई की जानी थी, जिसमें 32,68,119 मतदाताओं को मतदान के लिए योग्य (Found Eligible) पाया गया है. वहीं, करीब 27,16,393 (45%) लोगों को अयोग्य (Found Not Eligible) करार दिया गया है.
मुर्शिदाबाद और मालदा में सबसे अधिक मामले
द क्विंट ने रिपोर्ट के जिलावार विश्लेषण किया तो पता चला कि मुर्शिदाबाद जिले में अंडर एडजुडिकेशन के सबसे ज्यादा केस मिले. यहां कुल 11,01,145 मामलों पर कार्रवाई होनी थी, जिनमें से 6,33,671 को योग्य और 4,55,137 को अयोग्य पाया गया. प्रशासन द्वारा इस जिले में 10,88,808 मामलों में कार्रवाई की जा चुकी है.
मुर्शिदाबाद के बाद मालदा का नंबर आता है, जहां कुल 8,28,127 मामलों की जांच हुई. इसमें 5,88,657 योग्य और 2,39,375 अयोग्य पाए गए. वहीं, उत्तर 24 परगना में 5,91,252 मतदाताओं की जांच हुई, जिसमें 325666 अयोग्य पाए गए. दक्षिण 24 परगना में 5,22,042 में से 222929 अयोग्य पाए गए. उत्तर दिनाजपुर में 4,80,341 में 176972 और पूर्व बर्धमान में 3,65,539 में से 209805 मतदाता अयोग्य पाए गए.
पश्चिम बंगाल: टॉप 10 जिले, जहां सबसे ज्यादा अयोग्य मतदाता पाए गए
मुर्शिदाबाद (Murshidabad): 4,55,137 अयोग्य मतदाता
उत्तर 24 परगना (North 24 Parganas): 3,25,666 अयोग्य मतदाता
मालदा (Malda): 2,39,375 अयोग्य मतदाता
दक्षिण 24 परगना (South 24 Parganas): 2,22,929 अयोग्य मतदाता
पूर्व बर्धमान (Purba Bardhaman): 2,09,805 अयोग्य मतदाता
नादिया (Nadia): 2,08,626 अयोग्य मतदाता
उत्तर दिनाजपुर (Uttar Dinajpur): 1,76,972 अयोग्य मतदाता
हावड़ा (Howrah): 1,32,151 अयोग्य मतदाता
हुगली (Hooghly): 1,20,813 अयोग्य मतदाता
कूचबिहार (Coochbehar): 1,20,725 अयोग्य मतदाता
भारत निर्वाचन आयोग (ECI) के जिला-वार आंकड़ों के अनुसार, प्रतिशत के लिहाज से सबसे अधिक मतदाता हटाए जाने का मामला मतुआ बहुल नदिया जिले में सामने आया है, जहां करीब 77.86% नाम सूची से बाहर हुए हैं.
इसके बाद हुगली (70.33%) है. अन्य प्रमुख जिलों में पूर्व बर्धमान (57.4%), उत्तर 24 परगना (55.08%) और पश्चिम बर्धमान (53.72%) हैं, जहां भी बड़ी संख्या में मतदाता सूची से नाम हटाए गए हैं.
नादिया और हुगली: जहां अयोग्य लोगों की संख्या योग्य से कई गुना अधिक
आंकड़ों का एक और चौंकाने वाला पहलू सामने आया है. कुछ जिलों में अयोग्य पाए गए लोगों की भारी संख्या है.
नादिया जिले में कुल 2,67,940 मामलों की जांच की गई, जिनमें से मात्र 59,314 लोगों को योग्य पाया गया, जबकि इसके मुकाबले कहीं अधिक—2,08,626 लोगों को अयोग्य घोषित किया गया.
इसी तरह हुगली जिले में भी 1,71,778 कुल मामलों में से 1,20,813 लोगों को अयोग्य और केवल 50,965 लोगों को योग्य माना गया. इसके अलावा कुछ अन्य जिले भी हैं जहां अयोग्य व्यक्तियों की संख्या योग्य पाए गए लोगों की तुलना में अधिक रही.
दार्जिलिंग: 35,776 योग्य, जबकि 44,230 अयोग्य
दक्षिण दिनाजपुर: 55,490 योग्य, जबकि 76,768 अयोग्य
पश्चिम बर्धमान: 63,734 योग्य, जबकि 74,100 अयोग्य
कोलकाता की बात करें तो कोलकाता साउथ में कुल 78,657 मामलों में कार्रवाई की जानी थी, जिनमें 50,049 को योग्य और 28,468 को अयोग्य पाया गया.
इसके विपरीत, कोलकाता नॉर्थ के 61,236 मामलों में अयोग्य लोगों की संख्या (39,164) योग्य लोगों (22,071) से अधिक रही.
हावड़ा जिले में कुल 2,89,714 मामलों की जांच की गई, जिनमें 1,57,558 लोग मतदाता के रूप में योग्य और 1,32,151 अयोग्य पाए गए.
आदिवासी बहुल और पहाड़ी इलाकों जैसे झारग्राम और कलिम्पोंग में सबसे कम मामले एडजुडिकेशन के दायरे में आए. झारग्राम में 6,682 मामलों पर कार्रवाई होनी थी, जिनमें से 5,442 योग्य और 1,240 अयोग्य मिले.
कलिम्पोंग में कुल 6,790 मामले थे, जिनमें 4,383 योग्य और 2,407 अयोग्य करार दिए गए.
पुरुलिया (कुल 33,577 मामले, 27,635 योग्य) और बांकुड़ा (कुल 39,117 मामले, 32,584 योग्य) भी उन जिलों में शामिल हैं जहां निर्णयाधीन मामलों की संख्या काफी कम थी और अयोग्यता का प्रतिशत भी अन्य जिलों की तुलना में कम रहा.
