देहरादून रेलवे स्टेशन के बोर्ड के फोटो सोशल मीडिया पर खूब वायरल हो रहे हैं जिसमें दावा किया जा रहा है कि इन बोर्ड पर स्टेशन का नाम उर्दू में लिखा हुआ था जिस बदलकर संस्कृत में कर दिया गया.
फोटो को इसी दावे के साथ बीजेपी के प्रवक्ता संबित पात्रा ने भी शेयर किया है. हालांकि हमें पता चला है कि स्टेशन के साइनबोर्ड पर लिखे नाम को कुछ वक्त के लिए बदला गया था. लेकिन बाद में इसे फिर से बदलकर उर्दू में कर दिया गया.
दावा
बीजेपी प्रवक्ता संबित पात्रा ने 13 जुलाई की सुबह ट्विटर पर दो फोटो शेयर कीं और साथ में कैप्शन लिखा 'संस्कृत'. ट्वीट को देखने से ये पता चलता है कि पहले साइन बोर्ड में देहरादून नाम हिंदी, अंग्रेजी और उर्दू में लिखा है और दूसरे साइन बोर्ड में हिंदी, अंग्रेजी और संस्कृत में लिखा है. पात्रा अपने पोस्ट के जरिए ये दिखाने की कोशिश कर रहे थे कि उर्दू को हटाकर संस्कृत में नाम लिखा गया.
पात्रा का ट्वीट वायरल हो गया और ये स्टोरी के लिखे जाने तक इसको 16 हजार से ज्यादा लोगों ने रीट्वीट किया और एक लाख से ज्यादा लोगों ने लाइक किया.
पात्रा के पहले भी बीजेपी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष विनय सहस्त्रबुद्धे ने इस फोटो वाले ट्वीट को रीट्वीट किया था और रेलवे मंत्रालय की इस कारनामे को लेकर तारीफ भी कर दी.
इसके अलावा फेसबुक पर कुछ यूजर्स ने इसी फोटो के साथ ये लिखकर भी पोस्ट किया है कि 'भाजपा सरकार को उर्दू से नफरत' कुल मिलाकर पोस्ट में इस साइन बोर्ड से उर्दू में नाम हटवाने के लिए बीजेपी को जिम्मेदार बताया गया.
सच्चाई क्या है?
देहरादून स्टेशन के बोर्ड पर हुए इस बदलाव के बारे में जब हमने सर्च किया तो PTI और IANS की जनवरी 2020 की इस घटना से जुड़ी न्यूज रिपोर्ट्स देखीं. इन रिपोर्ट्स के मुताबिक रेलवे अधिकारियों ने फैसला किया था कि वो उत्तराखंड में स्टेशनों पर उर्दू में लिखे नाम की जगह संस्कृत में नाम लिखेंगे. रिपोर्ट्स के मुताबिक ये फैसला रेलवे मैनुअल के तहत लिया गया था.
हालांकि हमें नाम बदलने की घटना पर मुरादाबाद के DRM का ट्विटर पर शेयर किया हुआ सफाईनामा मिला. इसके मुताबिक उत्तरी रेलवे के चीफ पब्लिक रिलेशन अफसर दीपक शर्मा बताते हैं कि उर्दू नामों को किसी भी स्टेशन से नहीं हटाया गया है और ऐसा करने की कोई योजना भी नहीं है.
संस्कृत में अस्थायी रूप से लिखा गया
हमें हिंदुस्तान टाइम्स की 15 फरवरी की एक रिपोर्ट मिली, जो इसी नाम बदलने के विवाद पर लिखी गई थी. आर्टिकल में लिखा गया कि देहरादून रेलवे स्टेशन को तीन महीने बाद खोला गया. तो ये नाम बदलकर अंग्रेजी, हिंदी और उर्दू की जगह अंग्रेजी, हिंदी और संस्कृत में लिख गया.
हिंदुस्तान टाइम्स से बात करते हुए सीनियर डिविजनल कमर्शियल मैनेजर मुरादाबाद रेलवे स्टेशन ने बताया- 'संस्कृत नाम वाला बोर्ड कंस्ट्रक्शन एजेंसी ने लगा दिया जो कि स्टेशन की मरम्मत का काम कर रही थी'. उन्होंने ये भी बताया कि बाद में संस्कृत वाला हिस्सा हटा दिया गया और उर्दू वाला लगा दिया गया. "रेलवे हेडक्वार्टर से ऐसा कोई नोटिफिकेशन नहीं आया कि बोर्ड पर नाम संस्कृत में लिखे जाएं. उन्होंने सही संस्कृत शब्द ढूंढने के लिए काम शुरू कर दिया है."
इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक ये मामला तब उठा जब उत्तराखंड के एक बीजेपी विधायक ने ये कह दिया कि उत्तराखंड में सारे बोर्ड पर संस्कृत में नाम होना चाहिए क्यों कि ये राज्य की दूसरी ऑफिशियल भाषा है.
तो कुल मिलाकर संस्कृत वाला बोर्ड कुछ वक्त के लिए लगा लेकिन उसे फिर से उर्दू नाम के साथ लगा दिया गया.
हमें आज तक की 14 फरवरी की रिपोर्ट भी मिली जिसमें एक तस्वीर है- फोटो में शख्स संस्कृत पट्टी पर उर्दू की पट्टी चिपका रहा है.
इस रिपोर्ट में वीडियो भी है जिसमें रिपोर्टर बता रहे हैं कि संस्कृत वाले हिस्से पर फिर से उर्दू में देहरादून लिखकर चिपका दिया गया.
इसलिए साफ है कि संस्कृत में देहरादून बोर्ड कुछ ही समय के लिए लगा था जिसे फिर से बदलकर उर्दू कर दिया गया. इसके अलावा रेलवे की भी उर्दू नाम को बदलकर संस्कृत करने की कोई प्लानिंग नहीं है. भले ही संबित पात्रा ने अपने ट्वीट में इसका संदर्भ नहीं लिखा हो लेकिन साफ है उनका ट्वीट मिसलीडिंग है.
