कर्नाटक चुनावों (Karnataka Assembly Elections) के दौरान बीजेपी और कांग्रेस के बीच तो राजनीतिक टक्कर देखी ही गई. इससे इतर सोशल मीडिया पर भी चुनावों से जुड़े भ्रामक दावों की बाढ़ आ गई. सोशल मीडिया पर पहले से ही मौजूद भ्रामक खबरों की समस्या को कर्नाटक चुनावों ने और बदतर बना दिया. पर इस समस्या को ट्विटर के मालिक एलन मस्क ने और भी बदतर बना दिया. ये कहकर कि सर्च के दौरान ट्विटर ब्लू अकाउंट्स को प्राथमिकता दी जाएगी.
पिछली प्रक्रिया से वेरिफाई किए गए अकाउंट्स का ब्लू टिक हटने और ट्विटर ब्लू पूरी तरह लागू होने के बाद ये आकलन किया जा रहा था कि इससे फेक न्यूज को बढ़ावा मिल सकता है. और चुनावों के दौरान दिखा कि ये अनुमान गलत नहीं था.
ट्विटर ब्लू सब्सक्राइब करने वाले कई यूजर्स ने कभी नेताओं को टारगेट करते हुए तो कभी भ्रामक सांप्रदायिक एंगल के साथ गलत सूचनाओं को जोर-शोर से फैलाया. जनवरी तक जिन ट्वीट्स को औसतन 40 से 50 हजार व्यू मिले थे, उनके व्यू अब 10 लाख के पार पहुंच चुके हैं.

