सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है जिसमें दो लोगों को एक ऑफिस के अंदर लड़ते हुए देखा जा सकता है. इस वीडियो में दो लोग एक-दूसरे को मारते हुए दिख रहे हैं जबकि नीले स्कार्फ पहने और नीले झंडे लिए कई लोग पास ही खड़े हैं.
इस पोस्ट को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि, "यह लोग आजाद समाज पार्टी प्रमुख चंद्रशेखर रावण के कार्यक्रम के लिए अनुमति लेने गए थे तभी इन लोगों ने वहां मौजूद एक ऊंची जाति के अधिकारी की जमकर पिटाई कर दी."
क्या यह दावा सही है ? नहीं, यह दावा सही नहीं है.
वायरल वीडियो का चंद्रशेखर रावण के कार्यक्रम के लिए अनुमति लेने से कोई संबंध नहीं है.
वायरल वीडियो कर्नाटक का है और इसमें एक किसान और सरकारी क्लर्क के बीच हुआ झगड़ा दिखाया गया है.
हमने सच का पता कैसे लगाया ? हमने वायरल वीडियो पर गूगल लेंस की मदद से इमेज सर्च ऑप्शन का इस्तेमाल किया. हमारी सर्च में हमें NDTV की 13 जून 2026 की यह न्यूज रिपोर्ट मिली जिसमें वायरल वीडियो से मेल खाते हुए दृश्य दिखाए गए थे.
इस रिपोर्ट में इस घटना के बारे में लिखा था कि, "कर्नाटक के बागलकोट जिले में एक किसान ने मुआवजा देने में देरी और कथित भेदभाव को लेकर टाउन डेवलपमेंट अथॉरिटी के एक कर्मचारी के साथ चप्पल से मारपीट की."
इसके सिवा हमारी सर्च में हमें 'Times of India' का यह वीडियो मिला, जिसे 14 जून, 2026 को इंस्टाग्राम पर पोस्ट किया गया था.
इस वीडियो का टाइटल था, "पेआउट के लिए लड़ाई उलझी, बागलकोट में किसान ने क्लर्क को चप्पल मारी."
'Times of India' की 14 जून 2026 में छपी इस रिपोर्ट के मुताबिक यह घटना कर्नाटक के बागलकोट के नवनगर में बागलकोट टाउन डेवलपमेंट अथॉरिटी (BTDA) के दफ्तर में हुए एक विरोध प्रदर्शन के दौरान हुई थी.
इस रिपोर्ट में इन दो लोगों की पहचान किसान बसप्पा डोड्डामनी और फस्ट डिवीजन क्लर्क नीलकंठ अंकड के तौर पर की गई थी. TOI में छपी इस रिपोर्ट के मुताबिक "डोड्डामनी ने अपनी चार एकड़ खेती की जमीन के मुआवज़ को लेकर अंकड से यह झगड़ा किया था. यह जमीन कथित तौर पर लगभग 10 साल पहले कृष्णा नदी में डूब गई थी."
हमारी सर्च में हमें ऐसी कोई विश्वसनीय रिपोर्ट नहीं मिली जिसमें इस घटना को चंद्रशेखर आजाद के समर्थकों या आजाद समाज पार्टी के किसी कार्यक्रम से जोड़कर बताया गया हो. इसके साथ ही हमें ऐसा कोई सबूत भी नहीं मिला कि वीडियो में दिख रहे सरकारी कर्मचारी पर इसलिए हमला किया गया क्योंकि वह ऊंची जाति से थे.
निष्कर्ष: कर्नाटक में मुआवजे को लेकर किसान और सरकारी क्लर्क के आपसी विवाद को जातिवादी एंगल से जोड़कर भ्रामक दावों के साथ शेयर किया जा रहा है.
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