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आरोपियों को पीटती पुलिस का वीडियो गलत सांप्रदायिक दावों के साथ वायरल

इस घटना को दो पक्षों की निजी दुश्मनी से शुरू हुआ विवाद बताया गया था और दोनों पक्ष हिन्दू थे.

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सोशल मीडिया पर एक वीडियो शेयर किया जा रहा है जिसमें पुलिसकर्मी कुछ युवकों को पीटते हुए दिख रहे हैं.

दावा: वीडियो को शेयर कर दावा किया जा रहा है कि जिन लड़कों की पिटाई हो रही है वह मुस्लिम हैं और उन्होंने लड़कियों के साथ छेड़छाड़ की थी.

( ऐसे ही दावा करने वाले अन्य पोस्ट के अर्काइव आप यहां और यहां देख सकते हैं. )

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क्या यह दावा सही है ? नहीं, यह सांप्रदायिक दावा भ्रामक है. यह झगड़ा दो लोगों के बीच हुए आपसी विवाद की वजह से भड़का था, और इस घटना में शामिल सभी आरोपी एक ही समुदाय से थे.

हमने सच का पता कैसे लगाया ? हमने वायरल वीडियो पर गूगल लेंस की मदद से इमेज सर्च ऑप्शन का इस्तेमाल किया. हमें 15 मार्च 2025 की Mint की यह न्यूज रिपोर्ट मिली जिसमें वायरल वीडियो से मेल खाते हुए दृश्य दिखाई दे रहे थे.

Mint में छपी इस रिपोर्ट के मुताबिक 13 मार्च 2025 को होली से एक दिन पहले करीब 20 लोगों की भीड़ ने एक SUV मालिक पर हमला किया और तलवारों तथा लाठियों का इस्तेमाल करके आस-पास के वाहनों में तोड़फोड़ की थी. इस घटना के बाद अब तक कम से कम 14 लोगों को गिरफ्तार किया जा चुका है.

  • यहां से अंदाजा लेकर हमने इससे सम्बंधित कीवर्ड्स सर्च किए, हमारी सर्च में हमें Ahemdabad Mirror और Gujarat Samachar की यह न्यूज रिपोर्ट मिली जिसमें इस घटना के बारे में लिखा था कि, "निजी दुश्मनी सार्वजनिक हो गई; होली की रात रामोल-वस्त्राल में तलवारें लहराते लोगों ने राहगीरों पर हमला किया, 3 लोगों को चाकू मारा और कई अन्य लोगों के साथ मारपीट की; पुलिस ने एक नाबालिग सहित 14 लोगों को गिरफ्तार किया; उनमें से 5 लोगों को सरेआम पीटा और उनके अवैध रूप से बने घरों को तोड़ दिया गया."

यह थी पूरी घटना: Gujarat Samachar की 15 मार्च की रिपोर्ट के मुताबिक वस्त्राल में अराजकता हुई जिसमें निर्दोष नागरिकों को निशाना बनाया गया और हथियारों के साथ वाहनों में तोड़फोड़ की गई थी.

  • यह घटना पंकज भावसार और संग्राम के बीच चल रहे विवाद से शुरू हुई थी.

  • इसके जवाब में पुलिस ने इस हिंसा में शामिल होने के आरोप में एक नाबालिग सहित 14 लोगों को गिरफ्तार किया था.

  • आरोपियों में अलदीप मौर्य, श्याम कमली, विकास उर्फ ​​बिट्टू परिहार, अशील मकवाना, रोहित उर्फ ​​दुर्लभ सोनवणे, निखिल चौहान, मयूर मराठी, प्रदीप उर्फ ​​मोनू तिवारी, राजवीर सिंह बिहोला, अलकेश यादव, आयुष राजपूत, दिनेश राजपूत और दीपक कुशवाह शामिल हैं.

इनमें से किसी भी मीडिया रिपोर्ट में इस घटना में किसी भी तरह के सांप्रदायिक एंगल के शमिल होने या किसी भी पक्ष के आरोपी के मुस्लिम होने की पुष्टि नहीं थी, रिपोर्ट्स में इस घटना को दो पक्षों की निजी दुश्मनी से शुरू हुआ विवाद बताया गया था और दोनों पक्ष हिन्दू थे.

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हमें Ahemdabad Police के आधिकारिक X (पूर्व में ट्विटर) अकाउंट पर यह पोस्ट मिली जिसमें इस घटना के बारे में जानकारी देते हुए बताया गया था, "अहमदाबाद शहर पुलिस: वस्त्रापुर में हुई यह घटना आपसी रंजिश के कारण हुई थी. घटना की सूचना मिलते ही, रामोल के पुलिस इंस्पेक्टर सहित पुलिस की टीमें तुरंत मौके पर पहुंच गईं. पीड़ित के खिलाफ एक FIR दर्ज की गई है. अब तक कुल 13 आरोपियों को गिरफ्तार किया जा चुका है." (गुजराती से हिंदी में अनुवाद)

निष्कर्ष: अहमदाबाद के वस्त्राल में दो गुटों के बीच हुई झड़प के बाद आरोपियों को सरेआम पीटते हुए पुलिस के वीडियो को गलत सांप्रदायिक दावों के साथ शेयर किया जा रहा है.

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(अगर आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी आती है, जिसके सच होने पर आपको शक है, तो पड़ताल के लिए हमारे वॉट्सऐप नंबर  9540511818 या फिर मेल आइडी webqoof@thequint.com पर भेजें. सच हम आपको बताएंगे. हमारी बाकी फैक्ट चेक स्टोरीज आप यहां पढ़ सकते हैं.)

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