क्या आपको चुनाव लड़ने के लिए टिकट चाहिए? क्या आप भी खबरों में बने रहने वाले नेता बनना चाहते हैं? आपके लिए मार्केट में एक कोर्स है. Capsule कोर्स से भी छोटा- Caps (communal, abusive, patriarchal, sexist ) कोर्स. ऐसे ही किसी कोर्स की मदद से टिकट पाने वाले successful कैंडिडेट से मिलिए.
नाम है रमेश बिधूड़ी. इनके बयान पढ़िए-
"मैं आपको आश्वासन देता हूं कि जैसे हमने ओखला और संगम विहार में सड़कें बनाईं, वैसे ही हम कालकाजी की सभी सड़कों को प्रियंका गांधी के गालों जैसी बना देंगे.”
"दिल्ली की खड़ाऊं मुख्यमंत्री आतिशी ने तो अपना बाप ही बदल लिया. वह मार्लिना से सिंह हो गई."
महिलाओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी, sexist remarks, hateful और कम्यूनल स्टेटमेंट. यही नेताओं की जमा पूंजी है.
इस आर्टिकल में हम आपको एक पैटर्न दिखाएंगे कि कैसे पब्लिक के लिए बेहतर करने वाली पॉलिटिक्स पतन की ओर है और किस तरह पॉलिटिक्स में प्रमोशन मिलता है.
नेताओं के ध्वनि प्रदूषण
दिल्ली में विधानसभा चुनाव है, लेकिन उसके साथ ही पॉल्यूशन बढ़ गया. जैसे कोरोना का वैरिएंट था वैसे ही प्रदूषण का नया वैरिएंट आया है. और इससे बचने के लिए आपको मुंह की जगह अपने कान पर मास्क लगाना होगा, और खासकर अपने बच्चों को ऐसे वैरिएंट से बचाना होगा.
आप कहेंगे कि अभी तो वीडियो की शुरुआत में चुनाव में टिकट कैसे मिलेगा ये बता रहा था और अब बोरिंग सा प्रदूषण का टॉपिक क्यों? परेशान मत हों, मैं उस वायु प्रदूषण की बात नहीं कर रहा जिससे आपको फर्क नहीं पड़ता है, मैं बात कर रहा हूं नेताओं के सेक्सिस्ट रिमार्क और कॉन्ट्रोवर्शियल स्टेटमेंट वाले प्रदूषण की. ऐसे फर्क तो आपको इससे भी नहीं पड़ता है.. अगर पड़ता तो वोट के लिए हाथ जोड़ने वाले नेता, अपने होठों को भी जोड़े रखते और objectionable कमेंट नहीं करते.
अब बात करते हैं abusive variant (अभद्र वैरिएंट) की.
साल 2014 और 2019 में दक्षिणी दिल्ली से सांसद रहे रमेश बिधूड़ी को बीजेपी ने कालकाजी सीट से अपना उम्मीदवार बनाया है. इसी सीट से दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी सिंह विधायक हैं और वो फिर से इसी सीट से चुनावी मैदान में हैं. कांग्रेस ने भी एक महिला कैंडिडेट अल्का लांबा को यहां से टिकट दिया है.
और इन सबके बीच बीजेपी के पुरुष नेता रमेश बिधूड़ी के दो वीडियो सामने आए जिसमें वो कभी प्रियंका गांधी के लिए अभद्र भाषा का इस्तेमाल करते तो कभी दिल्ली की मुख्यमंत्री आतिशी सिंह को लेकर भद्दे कमेंट करते.
रमेश बिधूड़ी के विवादित बयानों का इतिहास
आप को थोड़ा फ्लैशबैक में ले जाता हूं. बात है साल 2015 की. जब पहली बार रमेश बिधूड़ी सांसद बने थे. तब पांच महिला सांसदों ने लोकसभा अध्यक्ष के पास शिकायत दर्ज कराई थी कि बिधूड़ी ने उनके खिलाफ "अपमानजनक और लैंगिक" टिप्पणियां कीं.
ये पांचों सांसद थीं- रंजीत रंजन (कांग्रेस), सुष्मिता देव (तब कांग्रेस में), सुप्रिया सुले (NCP), अर्पिता घोष (तृणमूल कांग्रेस) और पीके श्रीमती टीचर (CPI-M).
साल 2017 में उत्तर प्रदेश राज्य चुनावों से पहले, बिधूड़ी ने मथुरा में एक रैली में कांग्रेस नेता सोनिया गांधी के खिलाफ लैंगिक टिप्पणी की थी. कांग्रेस द्वारा बीजेपी के कार्यों की रिपोर्ट मांगे जाने पर सांसद ने कहा था "इटली में ऐसे संस्कार होते होंगे, कि शादी के 5-7 महीने बाद ही पोता या पोती भी आ जाए, भारतीय संस्कृति में ऐसे संस्कार नहीं है." अपने स्पीच में बिधूड़ी ने बीएसपी नेता मायावती के बारे में कहा कि “ऐसे संस्कार कांग्रेस में या मायावती जी के घर में होंगे… भारतीय संस्कृति में ऐसे संस्कार नहीं हैं.”
बॉडी शेमिंग और कम्यूनल बयान
महिला नेताओं के खिलाफ ही नहीं रमेश बिधूड़ी बॉडी शेमिंग और कम्यूनल रिमार्क के लिए भी जाने जाते हैं.
मई 2019 में, लोकसभा चुनाव से पहले, एक रैली के दौरान बिधूड़ी का दिल्ली के सीएम अरविंद केजरीवाल को 'दलाल' कहा, फिर दिल्ली के सीएम पर अपमानजनक टिप्पणी करते हुए उन्हें बौना कहा. लेकिन फिर भी उन्हें पार्टी ने 2019 में टिकट दिया और वो चुनाव जीते.
अब आपको एक और कहानी बताते हैं. 21 सितंबर 2023 को संसद में स्पेशल सेशन के दौरान बिधूड़ी ने तबके BSP सांसद दानिश अली पर अभद्र टिप्पणी की थी. लेकिन पार्टी ने एक्शन की जगह बिधूड़ी को अभद्र भाषा बोलने के 10 दिन के अंदर ही 27 सितंबर 2023 को राजस्थान के टोंक विधानसभा क्षेत्र का प्रभारी बना दिया.
हालांकि इसके बाद जब 2024 का चुनाव हुआ तो बीजेपी ने रमेश बिधूड़ी का टिकट काट दिया. लोगों ने कहा बीजेपी ने बिधूड़ी को सज़ा दे दी. लेकिन शायद अब सज़ा माफ हो गई. और फिर टिकट दे दिया गया. या टिकट इसी बिना पर मिला कि आप कितना बढ़िया आपत्तिजनक कमेंट करते हैं?
टिकट मिलने का क्राइटेरिया क्या है?
बीजेपी ने पटपड़गंज सीट से रविंद्र नेगी को टिकट दिया है. नेगी के CV में अचीवमेंट्स के कॉलम में मुसलमान दुकानदारों को परेशान करना, दुकानों पर जबरन नाम लिखवाना बोल्ड लेटर में लिखा होगा शायद.
दिल्ली ही नहीं देशभर में ये पैटर्न दिखता है. नफरती बयान, महिलाओं के खिलाफ टिप्पणी, इन सब पर डिमोशन नहीं प्रोमोशन मिलता है. जैसे मानों जॉब डिस्क्रिप्शन में डिमांड ही इसी बात की हो.
आप CAPS कोर्स के जरिए टिकट पाने वाले एक और successful कैंडिडेट से मिलिए.
महाराष्ट्र विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने भड़काऊ भाषण देने वाले नितेश राणे को टिकट दिया था. नितेश राणे ने 1 सितंबर को अहमदनगर में कहा था कि "मस्जिद में घुस कर चुन चुनकर मारेंगे". अब नितेश राणे को मंत्री भी बनाया गया है.
एक और नाम है ठाकुर राजा सिंह लोध यानी कि टी राजा. अगस्त 2022 में टी राजा ने मुसलमानाों और पैगंबर मोहम्मद साहब के खिलाफ आपत्तिजनक बयान दिया था. जेल भी गए. बीजेपी ने तब टी राजा को सस्पेंड कर दिया था. लेकिन तेलंगाना विधानसभा चुनाव आते ही बीजेपी ने टी राजा की सस्पेंशन को पहले रद्द किया और तुरंत बाद चुनाव में टिकट दे डाला.
अपत्तिजनक बयानों के बावजूद टी राजा पर मेहरबान बीजेपी
CAPS कोर्स के जरिए राजनीति में आगे बढ़ने वाले एक और नेता से मिलिए. नाम है साधना सिंह. यूपी के मुगलसराय से विधायक थीं. साल 2019 में एक बार साधना सिंह ने बीएसपी अध्यक्ष मायावती को लेकर अभद्र टिप्पणी की. साधना सिंह ने कहा का मायावती 'महिला हैं या पुरुष'? साल 2024 में बीजेपी ने साधना सिंह को राज्यसभा सांसद बना दिया.
ऐसा नहीं है कि सिर्फ बीजेपी में ही ऐसा है. करीब-करीब हर पार्टियों के नेताओं ने महिलाओं के खिलाफ अभद्र टिप्पणी की है और करते आ रहे हैं. लेकिन अब इस प्रदूषण को रोकना होगा.
बीजेपी, मध्य प्रदेश में मुख्यमंत्री लाड़ली बहना योजना, महाराष्ट्र में लाड़की बहन योजना, हरियाणा में लाडो लक्ष्मी योजना के सहारे सत्ता में है, उसे समझना होगा कि अगर महिलाएं सिर्फ 2100 और 1500 रुपए के स्कीम के नाम पर वोट नहीं करती हैं बल्कि वो सम्मान भी चाहती हैं. बेहतर समाज चाहती हैं. नहीं तो वो भी पूछेंगी जनाब ऐसे कैसे?