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लोकसभा चुनाव 2024: हिंदी पट्टी में BJP का क्या हुआ? हिंदी-हिंदू की राजनीति कितना काम आई

हिंदी पट्टी यानी कि बिहार, यूपी, हरियाणा, मध्य प्रदेश जैसे उत्तर भारत के राज्य. जिसमें करीब 225 लोकसभा सीट हैं.

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हिंदी-हिंदू.. बीजेपी के लिए ये दो शब्द पिछले 2 लोकसभा चुनाव से लेकर कई विधानसभा चुनाव में सबसे ज्यादा काम आए थे. लेकिन लोकसभा चुनाव 2024 में हिंदी पट्टी ने बीजेपी के खेल को पलट दिया. हिंदी पट्टी वाले अयोध्या में बने राम मंदिर के नाम पर 400 पार का सपना सजोए बीजेपी को यहीं से गहरा घाव मिला है. 400 पार तो दूर BJP 250 का आंकड़ा भी पार नहीं कर पाई.

हिंदी पट्टी यानी कि बिहार, यूपी, हरियाणा, मध्य प्रदेश जैसे उत्तर भारत के राज्य. जिनके पास करीब 225 लोकसभा सीट हैं. 2019 लोकसभा चुनाव में इसी हिंदी पट्टी से बीजेपी ने 178 सीटें जीती थीं. लेकिन इस बार हिंदी पट्टी वालों ने अंग्रेजी में कह दिया ओके टाटा बाय बाय..

आपको आगे बताएंगे कि बीजेपी को हिंदी पट्टी में इस बार कुल कितनी सीटें आई हैं और किन राज्यों में बड़ा नुकसान हुआ है.

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हिंदी पट्टी में कौन से राज्य आते हैं?

  • उत्तर प्रदेश - 80 सीट

  • बिहार - 40 सीट

  • मध्य प्रदेश - 29 सीट

  • राजस्थान - 25 सीट

  • झारखंड - 14 सीट

  • छत्तीसगढ़ - 11 सीट

  • हरियाणा - 10 सीट

  • दिल्ली - 7 सीट

  • उत्तराखंड - 5 सीट

  • हिमाचल प्रदेश - 4 सीट

किन राज्यों में बीजेपी को हुआ बड़ा नुकसान

उत्तर प्रदेश ने चौंका दिया

बीजेपी को सबसे बड़ा नुकसान वहां हुआ है जिसके नाम पर उसकी पूरी राजनीति शुरू हुई थी. जी हां, राम मंदिर यानी कि अयोध्या और उत्तर प्रदेश. साल 2019 में बीजेपी ने उत्तर प्रदेश में 80 में से 62 लोकसभा सीटों पर जीत हासिल की थी, लेकिन इस बार बीजेपी 33 सीटों पर सिमट गई है. यही नहीं राम मंदिर जिस लोकसभा क्षेत्र में पड़ता है वहां भी हार हुई है. अयोध्या यानी कि फैजाबाद में बीजेपी के लल्लू सिंह को समाजवादी पार्टी के अवधेश प्रसाद ने 50 हजार से ज्यादा वोटों से हराया है.

बिहार में नीतीश का सहारा

2019 लोकसभा चुनाव में बिहार में एनडीए को 39 सीट मिली थी. वहीं बीजेपी 17 पर लड़ी थी और 17 जीती. लेकिन इस बार हालात बदल गए, एनडीए के हाथ 30 सीट लगी, वहीं 17 पर चुनाव लड़ने वाली बीजेपी को 5 सीटों का नुकसान हुआ. मतलब 12 सीट मिल सकी.

राजस्थान ने कहा- न पधारो म्हारे देश

राजस्थान में 2023 में विधानसभा चुनाव हुए थे, बीजेपी ने कांग्रेस को सत्ता से बेदखल किया था. 200 विधानसभा सीटों में से 115 पर बीजेपी ने जीत हासिल की. लेकिन 6 महीने के अंदर ही राजस्थान ने अपना मन बदल लिया. 2019 में जहां एनडीए को 25 में से 25 और बीजेपी को 24 सीट मिली थी, वहीं इस बार बीजेपी को 10 सीटों का नुकसान हुआ. बीजेपी 14 पर रुक गई.

हरियाणा ने दौड़ाया

हरियाणा में मुख्यमंत्री बदलना भी बीजेपी के काम नहीं आया. 2019 में बीजेपी ने हरियाणा की 10 में से 10 सीटें जीती थीं, लेकिन कांग्रेस ने इस बार बीजेपी को हाफने पर मजबूर कर दिया और सीट हाफ कर दी. मतलब 5 सीटों का नुकसान.

कुल मिलाकर उत्तर प्रदेश में बीजेपी को करीब 29 सीटों का नुकसान हुआ है, राजस्थान में 10, हरियाणा में 5, बिहार में 5 और झारखंड में 2 सीट हाथ से गई. मतलब बीजेपी को 2019 के मुकाबले हिंदी पट्टी मे 51 सीटों का नुकसान हुआ है.
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हिंदी पट्टी में कहां चूक गई बीजेपी?

अब सवाल है कि साल 2019 में बीजेपी हिंदी पट्टी में टॉप पर थी वहां इस बार 10 नुकसान कैसे हो गया वो भी तब जब 10 साल से सत्ता में थे, राम मंदिर का मुद्दा था, मुसलमान निशाने पर थे.

उत्तर प्रदेश में डबल इंजन की बैट्री डाउन

उत्तर प्रदेश में अखिलेश और राहुल गांधी की जोड़ी ने उत्तर प्रदेश में नरेंद्र मोदी और योगी आदित्यनाथ की डबल इंजन की बैट्री चार्जिंग से हटा दी है. इससे पहले अखिलेश यादव ने 2022 विधानसभा चुनाव में योगी आदित्यानाथ को करीब 57 सीटों को नुकसान पहुंचाया था.

2017 में 312 सीट जीतने वाली बीजेपी 2022 में 255 सीट ही जीत पाई थी. वहीं अखिलेश यादव की समाजवादी पार्टी ने 2017 के 47 सीटों के बदले 2022 में 111 सीटें जीतकर बीजेपी को कमजोर साबित किया था. और अब 2024 में भी अखिलेश ने साबित किया है कि वो बीजेपी से दो दो हाथ करने का दम रखते हैं. मतलब अखिलेश-राहुल को हल्के में लेना बीजेपी को भारी पड़ गया.
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रोजगार

कहते हैं 'भूखे पेट भजन नहीं होय गोपाला', ये बात हिंदी पट्टी के वोटरों को भी थोड़ी बहुत समझ आ रही है. धर्म के साथ-साथ रोजगार भी जरूरी है. यही वजह है कि बीजेपी धर्म की बात कर रही थी तो विपक्षी पार्टियां रोजगार को मुद्दा बना रही थी. बिहार और उत्तर प्रदेश में लगातार रोजगार की मांग उठ रही थी. और यही वजह है कि बीजेपी को हिंदी पट्टी में नुकसान उठाना पड़ा है.

पेपर लीक

पेपर लीक उन चुनावी मुद्दों में से एक था, जिसे राहुल गांधी और अखिलेश यादव जैसे विपक्षी नेताओं ने चुनाव प्रचार के दौरान युवाओं के बीच खूब उठाया. यही नहीं कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में पेपर लीक से जुड़े मामले के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट से फैसला करने और पीड़ितों को मुआवजा देने का वादा किया.

बिहार, राजस्थान, यूपी में युवाओं के बीच पेपर लीक एक बड़ा मुद्दा था. पुलिस कांस्टेबल भर्ती परीक्षा, शिक्षक भर्ती घोटाले, RO/ARO पेपर लीक जैसे दर्जन भर परीक्षाएं पेपर लीक की खबरें आईं, और फिर पेपर कैंसिल होता गया. जिसे लेकर युवाओं में नाराजगी दिखी. और इस नाराजगी ने बीजेपी के वोट पर चोट किया.

अग्निवीर

उत्तर भारत में सेना में जाने का अलग क्रेज है और यही वजह है कि जब मोदी सरकार अग्निवीर योजना लेकर आई तो इन्हीं राज्यों में सबसे ज्यादा विरोध देखने को मिला. इसके साथ ही कांग्रेस ने अपने घोषणापत्र में सरकार बनने पर अग्निवीर योजना हटाने का ऐलान किया था. हरियाणा, बिहार, यूपी में अग्निवीर योजना की वजह से युवाओं में काफी गुस्सा था, यही वजह है कि बीजेपी को चुनाव में इसका खामियाजा भुगतना पड़ा.

महंगाई

भले ही उत्तर भारत की अपनी रैलियों में बीजेपी ने पाकिस्तान, कश्मीर, आर्टिकल 370 जैसे मुद्दे को हवा दी हो लेकिन लोगों के बीच महंगाई भी एक बड़ा मुद्दा थी. पेट्रोल के बढ़ते दाम, गैस सिलेंडर की बढ़ती कीमत, सब्जियों की कीमत पर मोदी सरकार से गरीब और मिडिल क्लास परिवार में नाराजगी थी.

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विधानसभा में अच्छा प्रदर्शन बीजेपी के आया काम

ऐसा नहीं है कि हर जगह बीजेपी ने खराब प्रदर्शन ही किया है. मध्य प्रदेश की 29 की 29 सीटों पर बीजेपी ने जीत हासिल की है. यहां बीजेपी ने कांग्रेस से इकलौती सीट भी छीन ली है. अभी हाल ही में हुए मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव में बीजेपी ने अपना ही रिकॉर्ड तोड़ते हुए 230 में से 162 सीटें जीत पर बड़ी जीत हासिल की थी.

इसके अलावा छत्तीसगढ़, उत्तराखंड, हिमाचल, दिल्ली में बीजेपी ने अपनी सभी सीटें बचा ली हैं.

कुल मिलाकर बात इतनी सी है कि जो बीजेपी 2019 में 303 सीटों के बल पर खुद को अजय समझ रही थी, उसे हिंदी पट्टी ने पट्टी पढ़ा दिया.

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