"हाथ जोड़कर निवेदन कर रहा हूं सर, मेरे स्कूल का भवन मत तोड़िए. अगर पेपरवर्क में कोई गलती है तो मैं जुर्माना भरने को तैयार हूं. अगर स्कूल खोलने में दिक्कत है तो मैं स्कूल नहीं खोलूंगा, लेकिन कृपया भवन मत तोड़िए."
हाथ जोड़कर बैतूल कलेक्टर के सामने गुहार लगाने वाले व्यक्ति का नाम अब्दुल नईम है. नईम अपने निर्माणाधीन निजी स्कूल को बुलडोजर कार्रवाई से बचाने के लिए कलेक्टर से निवेदन कर रहे थे.
मध्य प्रदेश (Madhya Pradesh) के बैतूल जिले के भैंसदेही ब्लॉक के धाबा गांव में निर्माणाधीन एक निजी स्कूल प्रशासनिक कार्रवाई के बाद विवाद में आ गया है. ग्राम पंचायत की ओर से अनुमति न होने का हवाला देते हुए स्कूल भवन के एक हिस्से पर बुलडोजर कार्रवाई की गई. स्कूल बना रहे अब्दुल नईम का कहना है कि कार्रवाई से पहले इलाके में इसे लेकर "अवैध मदरसा" होने की अफवाह फैलाई गई थी. वहीं, प्रशासन का कहना है कि यह कार्रवाई बिना किसी भेदभाव के पूरी तरह नियमों के तहत की गई है.
यह स्कूल अब्दुल नईम अपनी निजी जमीन पर नर्सरी से कक्षा 8 तक के बच्चों के लिए बना रहे थे. उनके मुताबिक, निर्माण पर करीब 20 लाख रुपये खर्च किए गए थे. प्रशासनिक आदेश के बाद भवन का एक हिस्सा गिरा दिया गया.
अब्दुल नईम के मुताबिक स्कूल का निर्माण धीरे-धीरे आगे बढ़ रहा था. इसी दौरान कार्रवाई से करीब तीन दिन पहले इलाके में अफवाहें फैलने लगीं कि यहां एक मदरसा बनाया जा रहा है. नईम का कहना है कि यह एक सामान्य निजी स्कूल था, जिसका उद्देश्य गांव और आसपास के आदिवासी इलाकों के बच्चों को शिक्षा उपलब्ध कराना था.
नईम दावा करते हैं, "गांव में सिर्फ तीन मुस्लिम परिवार होने के बावजूद मदरसे की बात को आधार बनाकर माहौल बनाया गया."
11 जनवरी को ग्राम पंचायत ने एक नोटिस जारी कर नईम को बिना अनुमति निर्माण का हवाला देते हुए खुद ही स्ट्रक्चर गिराने का आदेश दिया. नईम का दावा है कि नोटिस के बाद जब वे आवेदन देने पंचायत कार्यालय पहुंचे, तो अधिकारियों ने कथित तौर पर उनका आवेदन लेने से इनकार कर दिया और बाद में आने को कहा.
13 जनवरी को, जब नईम और गांववालों का एक समूह कलेक्टर से मिलने के लिए जिला कलेक्ट्रेट गया, उसी दौरान प्रशासन ने दखल दिया. भारी पुलिस बल के साथ एक जेसीबी मशीन निर्माण स्थल पर पहुंची और कार्रवाई के दौरान स्कूल भवन का एक हिस्सा तथा सामने का शेड गिरा दिया गया.
कार्रवाई को लेकर एसडीएम अजीत मरावी ने द क्विंट को बताया कि अब्दुल नईम ने पंचायत से भवन निर्माण की औपचारिक अनुमति नहीं ली थी. इसी आधार पर ग्राम पंचायत प्रशासन ने निर्माण को अवैध बताते हुए बुलडोजर कार्रवाई शुरू की.
एसडीएम के अनुसार, निजी जमीन होने के बावजूद भवन निर्माण के लिए पंचायत से अनुमति लेना अनिवार्य है और इसी नियम के उल्लंघन के कारण यह कार्रवाई की गई.
एनओसी होने के बावजूद बुलडोजर कार्रवाई?
नईम का कहना है कि उन्होंने कमर्शियल लैंड डायवर्जन हासिल किया था और 30 दिसंबर को स्कूल एजुकेशन डिपार्टमेंट में अपनी औपचारिक आवेदन प्रक्रिया पूरी करते हुए जमीन से जुड़े सभी जरूरी दस्तावेज जमा किए थे. उनके मुताबिक, ग्राम पंचायत के स्तर पर एनओसी लेने की परंपरा नहीं थी, इसलिए उन्हें इसकी जानकारी पहले नहीं थी. जब इसकी जानकारी मिली, तो उन्होंने ग्राम पंचायत को पत्र भी लिखा.
पंचायत सचिव पवन तिवारी ने द क्विंट को बताया कि जब टीम ने मौके का निरीक्षण किया था, तब भवन पर स्कूल या मदरसा होने से जुड़ा कोई बोर्ड या संकेत नहीं लगा था. उनके अनुसार, निर्माण को अवैध मानते हुए इसके लिए कई बार नोटिस जारी किए गए और पर्याप्त समय भी दिया गया. इसी कारण समझाने के उद्देश्य से भवन का एक हिस्सा तोड़ा गया.
उन्होंने यह भी कहा कि विशेष रूप से व्यावसायिक उद्देश्य से किए जा रहे भवन निर्माण के लिए ग्राम पंचायत से एनओसी लेना अनिवार्य होता है.
वहीं, अब्दुल नईम ने द क्विंट से बातचीत में दावा किया कि उन्हें कार्रवाई से एक दिन पहले ही सरपंच से अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) मिल गया था. इसके बावजूद अगले ही दिन उनके स्कूल भवन पर बुलडोजर की कार्रवाई की गई.
एनओसी के सवाल पर एसडीएम अजीत मरावी ने बताया कि भवन निर्माण से पहले एनओसी लेना अनिवार्य होता है, न कि बाद में, और इसी कारण अब्दुल नईम के खिलाफ कार्रवाई की गई.
एसडीएम ने बताया कि कार्रवाई के दौरान प्रशासनिक व्यवस्था बनाए रखने के लिए उनके साथ कई अधिकारी मौके पर मौजूद थे, ताकि किसी तरह की बाधा न आए.
प्रशासनिक कार्रवाई को लेकर नईम ने कहा कि अगर कागजी प्रक्रिया में कोई कमी है, तो प्रशासन जुर्माना लगाए, लेकिन सीधे भवन गिराने की कार्रवाई न की जाए.
खुद भवन गिराने का निर्देश
13 जनवरी को कलेक्ट्रेट में गांव वालों के साथ काफी गुहार के बाद कलेक्टर ने फिलहाल बुलडोजर कार्रवाई रोकते हुए अब्दुल नईम को स्वयं भवन गिराने के निर्देश दिए हैं. साथ ही यह चेतावनी भी दी गई है कि यदि तय समय सीमा के भीतर भवन नहीं गिराया गया, तो प्रशासन दोबारा कार्रवाई करेगा.
बैतूल कलेक्टर नरेंद्र सूर्यवंशी ने कहा कि ग्राम पंचायत ने अधिनियम की धारा 55 के तहत कार्रवाई की और नोटिस देने के बाद अवैध ढांचे को ध्वस्त किया. इसमें किसी प्रकार का भेदभाव नहीं किया गया.
