"तीसरी बार हमारा घर बिना नोटिस के तोड़ दिया गया. हम फिर से उजड़ गए. कुछ दिन बाद बेटी की शादी होने वाली थी, अब जाएं तो जाएं कहां?"
यह कहते हुए जमुनी देवी रो पड़ती हैं.
यह बिहार के नालंदा की वही दलित बस्ती है, जहां 26 नवंबर को बुलडोजर कार्रवाई (Bulldozer Action) हुई थी. ज्यादातर पासवान और मुसहर समुदाय के लोग यहां रहते हैं. रहुई प्रखंड के शिवनंदन नगर में हुई इस कार्रवाई ने पूरे मोहल्ले में डर फैला दिया है. हाई कोर्ट के आदेश के बाद शुरू हुए इस अभियान में प्रशासन ने कई झोपड़ियां और खपरैल मकान सहित 8 घरों को ढहा दिए, जबकि 100 परिवारों को अगली तारीख तक घर खाली करने का नोटिस पकड़ा दिया गया. हैरानी की बात यह है कि नोटिस पाने वाले लगभग 85 मकान पहले से प्रधानमंत्री आवास योजना के तहत बने हुए हैं.
