जिसे तेजस्वी यादव ने कट्टरपंथी कहकर अपने गठबंधन में लेने से इनकार कर दिया, जिसे ज्यादातर विपक्षी पार्टियां वोट कटवा और बीजेपी की बी टीम कहती रही, जिसे विश्लेषक बाहरी बताते रहे उस असदुद्दीन ओवैसी की पार्टी ऑल इंडिया मजलिस-ए-इत्तेहादुल मुस्लिमीन (AIMIM) ने बिहार चुनाव में अपना बदला ले लिया. हां बदला.
फिल्म गैंग्स ऑफ वसेपुर का डायलॉग है न- सबका बदला लेगा रे तेरा फैजल.. वैसे ही असुद्दीन ओवैसी ने महागठबंधन से अपना बदला ले लिया. और एक बार फिर बिहार की उन सभी 5 सीटों पर कब्जा कर लिया जिसे 2020 के विधानसभा चुनाव में जीता था, लेकिन 2022 में 5 से 4 विधायक आरजेडी के पाले में चले गए थे. तीन साल बाद ओवैसी ने फिर से खुद को सीमांचल का सुल्तान साबित कर दिया है.

