राजस्थान के अलवर जिले में मतदाताओं के नाम हटाने के लिए हजारों 'फॉर्म-7' जमा किए जाने के करीब एक महीने बाद भी प्रशासन ने यह पता लगाने के लिए कोई ठोस जांच शुरू नहीं की है कि ये फॉर्म कहां से आए, किसने जमा किए और क्या इनमें फर्जी साइन किए गए थे.
भारत में वोटर लिस्ट से किसी का नाम कटवाने के लिए 'फॉर्म-7' का इस्तेमाल किया जाता है.
द क्विंट के पास मौजूद इन फॉर्म्स की कॉपियों से पता चलता है कि इनमें से ज्यादातर फॉर्म बीजेपी (BJP) के बूथ लेवल एजेंटों (BLAs) के नाम पर भरे गए थे. इन फॉर्म्स के जरिए मुख्य रूप से अलवर ग्रामीण इलाके के मुस्लिम वोटरों को निशाना बनाया गया था.
इस पूरी साजिश को समझने के लिए रिपोर्टर ने उन एजेंटों (BLAs) से बात की जिनके नाम इन फॉर्म्स पर 'आपत्तिकर्ता' के तौर पर दर्ज थे. साथ ही, इलाके के बूथ लेवल अधिकारियों (BLOs) और प्रशासन के उन लोगों से भी जानकारी जुटाई गई जो इस मामले से वाकिफ हैं, ताकि यह पता चल सके कि यह खेल कैसे रचा गया और प्रशासन इसकी जांच करने से क्यों कतरा रहा है.

