श्रीलंका अब 21 वीं सदी में भ्रष्टाचार और तानाशाही के खिलाफ हुए कलरफुल जनविद्रोह वाले देशों जैसे ट्यूनीशिया की क्रांति, अरब आंदोलन, जॉर्जिया रोज क्रांति, यूक्रेन ऑरेंज रेवॉल्यूशन और किर्गिस्तान ट्यूलिप क्रांति जैसे देशों की सूची में शामिल हो गया है. श्रीलंका के आंदोलन और इसके झंडे के रंग ‘नील महानेल’ को देखते हुए इसे ‘पर्पल यां बैंगनी क्रांति’ कहा जा सकता है.
आंदोलन की अगुवाई करते हुए श्रीलंका के युवाओं ने एक सांसद की पीट पीट कर हत्या कर दी और कई सत्ताधारी दल के सांसदों के घरों को घेर लिया. इसके अलावा प्रधानमंत्री के आधिकारिक और निजी निवास, दोनों में आग लगा दी. संसद भवन पर लगभग कब्जा ही कर लिया था. इतना ही नहीं राष्ट्रपति और उनके कुनबे को देश से धकेलकर बाहर कर दिया. ये लोग देश के प्रतिनिधि थे और मुश्किल से 2 साल पहले ही चुने गए थे. विदेशी कर्ज चुकाने में असमर्थ, इंपोर्ट का बिल चुकाने के लिए पैसा नहीं होना और खाने पीने की चीजों की भयानक किल्लत और बेकाबू महंगाई, भाई भतीजावाद, और खुल्लमखुल्ला भ्रष्टाचार और इकनॉमी का कुप्रबंधन पूरी तरह से सबके सामने आ गया था.
