कॉमेडी, अश्लीलता और असभ्यता अभिव्यक्ति की जमीन पर खड़े तीन स्तंभ हैं, जो आजादी और फ्री स्पीच में निहित हैं. आज के समय में कभी भी, कहीं भी, किसी के द्वारा भावनाएं आहत हो सकती हैं. और भारत जैसे देश में इसका जवाब अक्सर FIR के रूप में देखने को मिलता है.
कुछ हास्य कलाकारों (कॉमेडियन) द्वारा पब्लिक प्लेटफॉर्म पर एक प्राइवेट शो करने से मीडिया घरानों में सनसनी फैल गई. आयोजकों के खिलाफ एक FIR दर्ज की गई है. वहीं यूट्यूबर रणवीर इलाहाबादिया के खिलाफ कई FIR दर्ज हुए हैं.
शो में इलाहाबादिया द्वारा की गई टिप्पणी का कंटेस्टेंट पर कोई असर नहीं पड़ा- लेकिन उस जोक से जनता भड़क गई, जिसमें कुछ सरकारी अधिकारी भी शामिल थे. ये वो अधिकारी हैं, जिन्होंने कभी इलाहाबादिया के साथ मंच साझा किया था और अब वे उनके खिलाफ आपराधिक मुकदमा चलाने की मांग कर रहे हैं.
महाराष्ट्र पुलिस अब उन लोगों की भी जांच कर रही है जिन्होंने शो में भाग लिया था और रिपोर्ट के अनुसार 40 से अधिक लोगों को तलब किया है. अब सवाल उठता है: अब जब लोग कॉमेडी और इसकी सीमाओं पर हमला कर रहे हैं, ऐसे में कहां लाइन खींची जानी चाहिए?

