साल 1991 में लागू पूजा स्थल कानून (Places of Worship Act , 1991) में यह प्रावधान किया गया था कि आजादी के वक्त जो धार्मिक स्थल जिस स्वरूप में था, उसे वैसे ही बरकरार रखा जाएगा. यह ऐसा कानून है जो 15 अगस्त 1947 को मौजूद किसी भी उपासना स्थल के धार्मिक चरित्र को बदलने पर पाबंदी लगाता है. लेकिन यह कानून पिछले दशक से विवाद का केंद्रीय विषय रहा है. जिला अदालतों ने इस दावे के आधार पर धार्मिक स्थानों (मस्जिदों) के सर्वे की अनुमति देते कई आदेश पारित किए हैं कि वहां पहले एक और धार्मिक संरचना (मंदिर) मौजूद थी.
18 नवंबर को, उत्तर प्रदेश के संभल जिले की सिविल अदालत ने शाही जामा मस्जिद के सर्वे का आदेश दिया. यह आदेश उस याचिका पर पारित किया गया था जिसमें दावा किया गया था कि मस्जिद एक मंदिर की जगह पर बनाई गई थी.

