ADVERTISEMENTREMOVE AD
Members Only
lock close icon

एक जंग, जो लड़ी ही नहीं गई: क्या 1857 को महिमामंडित करना चाहिए?

1857 को लेकर कार्ल मार्क्स से लेकर वीडी सावरकर तक का नज़रिया अलग था.

Updated: 
story-hero-img
i
Aa
Aa
Small
Aa
Medium
Aa
Large

1857 के विद्रोह को ‘आजादी की पहली जंग के रूप’ में जाना जाता है. स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले इतिहास की किताबों में जमकर इसका गुणगान किया जाता है, और ये संदेश दिया जाता है कि फिरंगियों को देश से निकाल बाहर करने के लिए सब कुछ मुमकिन था.

विद्रोह को अक्सर हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बताया गया, जिन्होंने आजादी के लिए ब्रिटिश हुकूमत से कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई की. ये सब ना सिर्फ अतीत की कोरी कल्पना है, बल्कि ‘पहली लड़ाई’ या ‘आजादी की लड़ाई’ कहकर उस घटना का कुछ ज्यादा ही महिमामंडन किया गया है.
Published: 
Become a Member to unlock
  • Access to all paywalled content on site
  • Ad-free experience across The Quint
  • Listen to paywalled content
  • Early previews of our Special Projects
×
×