1857 के विद्रोह को ‘आजादी की पहली जंग के रूप’ में जाना जाता है. स्कूलों में पढ़ाए जाने वाले इतिहास की किताबों में जमकर इसका गुणगान किया जाता है, और ये संदेश दिया जाता है कि फिरंगियों को देश से निकाल बाहर करने के लिए सब कुछ मुमकिन था.
विद्रोह को अक्सर हिन्दू-मुस्लिम एकता का प्रतीक बताया गया, जिन्होंने आजादी के लिए ब्रिटिश हुकूमत से कंधे से कंधा मिलाकर लड़ाई की. ये सब ना सिर्फ अतीत की कोरी कल्पना है, बल्कि ‘पहली लड़ाई’ या ‘आजादी की लड़ाई’ कहकर उस घटना का कुछ ज्यादा ही महिमामंडन किया गया है.
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