एक लोकतंत्र में अगर सरकारी काम के दबाव में किसी एक कर्मचारी की भी मौत हो जाए, तो यह गहरी चिंता का विषय होना चाहिए. लेकिन लगता है कि भारत का चुनाव आयोग (ईसीआई) और नरेंद्र मोदी सरकार, दोनों ने इस गंभीर मुद्दे पर चुप्पी साध ली है. देश के 12 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में चल रही मतदाता सूची की विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision - SIR) प्रक्रिया के दौरान अब तक कई ब्लॉक लेवल ऑफिसर (BLO) की रहस्यमयी मौतें हो चुकी हैं.
इन मौतों का कोई आधिकारिक और केंद्रीय आंकड़ा अब तक सामने नहीं आया है. हालांकि एक बड़े टीवी चैनल ने अलग-अलग जगहों से जानकारी जुटाकर एक सूची बनाई है, जिसके मुताबिक नवंबर से अब तक कम से कम 33 BLO की मौत हो चुकी है.
इनमें से कुछ अधिकारियों ने आत्महत्या से पहले चिट्ठी लिखी, जिसमें उन्होंने SIR से जुड़े काम के भारी दबाव को अपनी मौत की वजह बताया. वहीं कई अधिकारी अचानक दिल का दौरा पड़ने या अत्यधिक तनाव के कारण गिर पड़े और उनकी जान चली गई. अव्यावहारिक समय-सीमा और लगातार दबाव भरे माहौल ने इन कर्मचारियों की सेहत पर गंभीर असर डाला.

