"फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास बनी डिस्पेंसरी में दवाइयां और इलाज बहुत कम रेट पर मिल जाया करता था," नई दिल्ली के तुर्कमान गेट के रहने वाले मोहम्मद अनस उस डिस्पेंसरी को याद करते हुए ये कहते हैं जिसे अब ढहा दिया गया है.
6 और 7 जनवरी की दरम्यानी रात, जब दिल्ली में कड़ाके की ठंड पड़ रही थी, तब एमसीडी ने रामलीला मैदान के पास तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के आसपास कथित अवैध निर्माण और अतिक्रमण को हटाने की कार्रवाई की.
रात करीब 1 से 2 बजे के बीच, दिल्ली पुलिस की भारी तैनाती और कड़े सुरक्षा इंतजामों के बीच मस्जिद के आसपास के निर्माण गिरा दिए गए. इसमें सड़क, फुटपाथ, कार पार्किंग, डिस्पेंसरी और एक बारात घर (कम्युनिटी हॉल) शामिल था.
इस कार्रवाई के दौरान वहां रहने वाले लोगों और पुलिस के बीच टकराव की स्थिति बन गई. कुछ लोगों ने पथराव कर दिया, जिसमें करीब पांच पुलिसकर्मी घायल हो गए.
इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई और अब तक एक नाबालिग समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है. पुलिस के मुताबिक, गिरफ्तार किए गए सभी 11 लोग तुर्कमान गेट इलाके के ही रहने वाले हैं.
घटनाक्रम: बुलडोजर एक्शन तक मामला कैसे पहुंचा?
तुर्कमान गेट स्थित फैज-ए-इलाही मस्जिद के पास यह तोड़फोड़ दिल्ली हाई कोर्ट के आदेश के बाद की गई. कोर्ट ने सार्वजनिक जमीन पर हुए 'अवैध अतिक्रमण' को हटाने का निर्देश दिया था. स्थानीय लोगों के कड़े विरोध-प्रदर्शन के बावजूद, मस्जिद से सटे निर्माणों को गिराने के लिए कई बुलडोजर तैनात किए गए थे.
यह पूरी कार्रवाई दिल्ली हाई कोर्ट के 12 नवंबर 2025 के उस आदेश के बाद हुई, जिसमें कोर्ट ने MCD और PWD को निर्देश दिया था कि तुर्कमान गेट इलाके में रामलीला मैदान के पास करीब 38,940 वर्ग फुट के अतिक्रमण को 'तीन महीने के अंदर' हटाया जाए. प्रशासन का साफ कहना है कि विवादित जमीन PWD और MCD की है.
इस मामले की शुरुआत दिल्ली के एक एक्टिविस्ट "भाई प्रीत सिंह" (जिन्हें प्रीत सिरोही के नाम से भी जाना जाता है) की याचिका से हुई थी. 'सेव इंडिया फाउंडेशन' के संस्थापक प्रीत सिंह ने 2025 की शुरुआत में दिल्ली हाई कोर्ट में इसे लेकर एक याचिका दाखिल की थी.
एक्टिविस्ट के मुताबिक, मस्जिद परिसर में मौजूद ‘अनधिकृत निर्माण’ हटाने की मांग की थी. इस याचिका के बाद कोर्ट ने स्थल का संयुक्त सर्वे कराने के आदेश दिए, और इन्हीं सर्वेक्षणों के बाद 7 जनवरी को ध्वस्तीकरण की कार्रवाई की गई.
न्यूज एजेंसी ANI के मुताबिक, सिरोही का कहना है कि 'दरगाह इलाही परिसर' पर रिसर्च के दौरान उन्हें वहां "सार्वजनिक जमीन पर अवैध निर्माण" मिले. उन्होंने दावा किया कि यह जमीन किसी प्राइवेट पार्टी या निजी संस्था की नहीं है.
दूसरी तरफ, मस्जिद की मैनेजमेंट कमेटी (इंतजामिया कमेटी) का कहना है कि यह जमीन वक्फ की संपत्ति है. कमेटी का तर्क है कि यह मामला वक्फ ट्रिब्यूनल के अधिकार क्षेत्र में आता है, इसलिए इसे नगर निगम की सामान्य अतिक्रमण हटाने वाली कार्रवाई की तरह नहीं देखा जाना चाहिए.
इस मामले में प्रशासन का कहना है कि मस्जिद को बिल्कुल भी नहीं छुआ गया है, बल्कि मस्जिद से सटे कम्युनिटी हॉल (बारात घर), डिस्पेंसरी, फुटपाथ के कुछ हिस्सों और पार्किंग एरिया को ढहाया गया है. अधिकारियों के मुताबिक, ये सब सरकारी जमीन पर बने हुए थे.
वहीं, इस मामले में याचिका दायर करने वाले प्रीत सिरोही कई सार्वजनिक अभियानों (public campaigns) से जुड़े रहे हैं, हालांकि उनका विवादों से भी नाता है.
अप्रैल 2025 में 'दैनिक भास्कर' ने प्रीत सिरोही के हवाले से एक बयान छापा था, जिसमें उन्होंने कहा था, "देश कराची-लाहौर बन गया है. जब तक मैं यहां हूं, ऐसा नहीं होने दूंगा."
प्रीत सिरोही "हिंदू महापंचायत" कहे जाने वाले कार्यक्रमों के आयोजन में भी शामिल रहे हैं, जहां विवादित और सांप्रदायिक भाषणों की खबरें सामने आई थीं. साल 2021 में दिल्ली पुलिस ने उन्हें जंतर-मंतर पर कथित तौर पर 'मुस्लिम विरोधी' नारेबाजी के मामले में गिरफ्तार भी किया था.
जैसे ही स्थानीय लोग मौके पर जुटने शुरू हुए, तनाव काफी बढ़ गया. अधिकारियों के मुताबिक, कुछ लोगों ने पुलिस और निगम कर्मचारियों पर पथराव कर दिया, जिसके बाद भीड़ को तितर-बितर करने के लिए पुलिस को आंसू गैस के गोले दागने पड़े और बल प्रयोग करना पड़ा.
न तो दिल्ली हाईकोर्ट के आदेश में और न ही एमसीडी के आदेश में यह कहा गया था कि मस्जिद को ध्वस्त किया जाना है.
आधी रात को कार्रवाई, पथराव और आंसू गैस: उस रात क्या हुआ?
तोड़फोड़ की यह कार्रवाई 7 जनवरी की रात करीब 1 से 2 बजे के बीच शुरू हुई. जब लगभग 30 बुलडोजर इलाके में दाखिल हुए, तो मस्जिद के आसपास भारी संख्या में लोग जमा हो गए. 'हिंदुस्तान टाइम्स' की रिपोर्ट के मुताबिक, यह ऑपरेशन सुबह 8 बजे शुरू होना था, लेकिन इसकी जगह रात 1:30 बजे ही शुरू कर दिया गया.
इतना ही नहीं, वहां रहने वालों का कहना है कि उन्हें ध्वस्तीकरण की सही टाइमिंग के बारे में कोई अंदाजा नहीं था. तुर्कमान गेट की मेन मार्केट के एक दुकानदार ने द क्विंट को बताया कि उन्होंने कोर्ट के आदेश के बारे में 'सुना' तो था, लेकिन उन्हें यह नहीं पता था कि यह कार्रवाई किस दिन और किस समय होगी.
इलाके की अमन कमेटी के सदस्य मोहम्मद शहजाद ने बताया कि मस्जिद मैनेजमेंट कमेटी ने 25 दिसंबर 2025 के बाद कम्युनिटी हॉल (बारात घर) के बाहर पोस्टर लगा दिए थे. इन पोस्टरों में साफ लिखा गया था कि अब से यहां कोई भी कार्यक्रम नहीं होगा. इसके जरिए लोगों को आने वाली इस कार्रवाई के बारे में पहले ही सूचित कर दिया गया था.
7 जनवरी को हिंदुस्तान लाइव फरहान याहिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस लाउडस्पीकर पर लोगों से घरों के अंदर रहने की अपील करती दिखी और यह भरोसा दिलाती रही कि मस्जिद को नहीं गिराया जा रहा है.
एक सीनियर पुलिस अधिकारी ने हिंदुस्तान टाइम्स को बताया कि रात करीब 1 बजे पुलिस ने तोड़फोड़ की कार्रवाई शुरू करने का फैसला किया. पुलिस ने लाउडस्पीकर पर मुनादी करते हुए लोगों से वह जगह खाली करने को कहा. उन्होंने आगे बताया कि वहां करीब 150 लोग इकट्ठा हो गए थे और नारेबाजी कर रहे थे, जिनमें से 25-30 लोगों ने पुलिस पर पथराव शुरू कर दिया.
जब विरोध प्रदर्शन और पथराव शुरू हुआ, तो स्थिति को काबू में करने के लिए पुलिस ने आंसू गैस का इस्तेमाल किया. स्थानीय लोगों ने द क्विंट को बताया कि प्रदर्शनकारियों पर करीब 30-40 आंसू गैस के गोले छोड़े गए. तुर्कमान गेट के रहने वाले 40 साल के आदिल ने बताया:
"जब यह सब हुआ तब मैं सो रहा था. बुलडोजरों के तेज शोर से मेरी आंख खुली. उसके कुछ ही देर बाद आंसू गैस का धुआं मेरे घर के अंदर घुस गया, जिससे आंखों में तेज जलन होने लगी."आदिल, स्थानीय निवासी, तुर्कमान गेट
इसी तरह, मस्जिद के ठीक सामने बने दिल्ली अर्बन शेल्टर इम्प्रूवमेंट बोर्ड (DUSIB) के रैन बसेरे में रहने वाले एक दिहाड़ी मजदूर ने बताया, "मुझे समझ नहीं आ रहा था कि क्या हो रहा है, लेकिन आंसू गैस की गंध और धुएं की वजह से मेरी नींद खुल गई. आंखों में इतनी जलन हो रही थी कि हमें वेंटिलेटर और खिड़कियां खोलनी पड़ीं."
कथित हिंसा के मामले में पुलिस ने अब तक एक नाबालिग समेत 11 लोगों को गिरफ्तार किया है. इन सभी पर भारतीय न्याय संहिता (BNS) की कई धाराओं के तहत केस दर्ज किया गया है. इनमें सरकारी काम में बाधा डालना, सरकारी कर्मचारी पर हमला करना, चोट पहुंचाना, दंगा भड़काना, सरकारी आदेशों का उल्लंघन करना और सामूहिक जिम्मेदारी से जुड़ी धाराएं शामिल हैं. इसके अलावा आरोपियों पर सार्वजनिक संपत्ति को नुकसान की रोकथाम अधिनियम, 1984 की धाराएं भी लगाई गई हैं.
गिरफ्तारी की कार्रवाई दो दिनों तक चली, 7 जनवरी को पांच लोगों को पकड़ा गया, जबकि 8 जनवरी को छह और गिरफ्तारियां की गईं.
“हमने छह और लोगों को गिरफ्तार किया है. अब तक एक नाबालिग समेत कुल 11 लोगों को गिरफ्तार किया गया है,” सेंट्रल दिल्ली पुलिस उपायुक्त (डीसीपी) निधिन वाल्सन ने पीटीआई को बताया.
जहां स्थानीय लोगों ने गिरफ्तार किए गए पांच लोगों से खुद को अलग करते हुए उन्हें “बाहरी” बताया, वहीं पुलिस ने कहा कि आरोपी तुर्कमान गेट इलाके के ही निवासी हैं.
वाल्सन ने पुष्टि की कि गिरफ्तार किए गए सभी लोग इसी इलाके से ताल्लुक रखते हैं.
शहजाद ने द क्विंट को बताया कि पत्थरबाजी में शामिल ज्यादातर लोग "बाहरी" थे और उनमें से शायद कुछ ही स्थानीय लोग रहे होंगे. उन्होंने यह आरोप भी लगाया कि इस पूरी घटना का मकसद उनके इलाके को बदनाम करना था.
तुर्कमान गेट में गलियां सील, आवाजाही पर पाबंदी
आमतौर पर शोर-शराबे और गहमागहमी वाले तुर्कमान गेट की तंग गलियों में 7 जनवरी की दोपहर एक अजीब सी खामोशी पसरी हुई थी.
पूरे इलाके में बुलडोजरों की गड़गड़ाहट और लोगों को वैकल्पिक रास्तों से जाने का निर्देश देते पुलिस और सुरक्षाकर्मियों की आवाजें सुनाई दे रही थी. आने-जाने के सभी मुख्य रास्तों पर भारी बैरिकेडिंग कर दी गई थी और पूरे तुर्कमान गेट में जगह-जगह पुलिस और रैपिड एक्शन फोर्स (RAF) की कई टुकड़ियां तैनात थी.
आवाजाही पर लगी पाबंदियों की वजह से स्थानीय लोगों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ा. कई लोगों का कहना था कि इन पाबंदियों की वजह से दिन भर उनका कारोबार ठप रहा. 7 जनवरी को शाम करीब 4 बजे तक सिर्फ एक मेडिकल स्टोर और कुछ सब्जी की दुकानें ही खुली थीं, बाकी पूरा बाजार बंद रहा.
पुलिस अधिकारियों ने द क्विंट को बताया कि बाजार पूरे दिन बंद रहेगा.
इसके अलावा, 8 जनवरी को भी इलाके में कई बुलडोजर मलबा हटाते और तोड़फोड़ की कार्रवाई को पूरा करते हुए दिखे.
मोहम्मद अनस ने द क्विंट को बताया, "काम अभी भी जारी है. आज भी कई जेसीबी (JCB) मौके पर मौजूद थीं और बचे हुए काम को पूरा कर रही थीं."
8 जनवरी की शाम को भी इलाके में आवाजाही पर पाबंदियां जारी रही. तुर्कमान गेट के आसपास आने-जाने के ज्यादातर रास्तों को सील (cordoned off) कर दिया गया था और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात था.
मस्जिद टूटने का डर: आखिर क्यों हुआ पथराव?
ध्वस्तीकरण की सुबह, द क्विंट को ऐसी कई सोशल मीडिया पोस्ट्स मिली, जिनमें यह दावा किया जा रहा था कि "फैज-ए-इलाही मस्जिद" को भी 'गिरा' दिया गया है.
द क्विंट को 7 जनवरी की तड़के ऐसे वीडियो भी मिले, जिसमें कुछ लोग दावा कर रहे थे कि मस्जिद को गिराया जा रहा है.
इस मामले में स्थानीय लोगों की अलग-अलग राय सामने आई, जहां कुछ लोगों का कहना था कि उन्होंने ऐसी अफवाह सुनी थी, वहीं कुछ अन्य लोगों ने ऐसी किसी भी बात से इनकार किया.
शहजाद ने बताया, "कल रात से ही यह अफवाह फैलने लगी थी कि मस्जिद गिराई जा रही है. जिन लोगों को असलियत नहीं पता थी, वे वहां पहुंच गए और फिर पत्थरबाजी शुरू हो गई."
निधिन वल्सन ने द क्विंट से बात करते हुए कहा:
"हमें इस बात की पक्की जानकारी नहीं है कि मस्जिद पर हमले को लेकर कोई अफवाह फैलाई जा रही थी या नहीं, लेकिन सोशल मीडिया पर कुछ ऐसे ऑडियो और वीडियो जरूर चल रहे हैं जिनमें लोगों से सड़कों पर उतरने की अपील की गई थी. पुलिस इन वीडियो की जांच कर रही है."निधिन वाल्सन, DCP, सेंट्रल दिल्ली
वहीं, तोड़फोड़ की कार्रवाई के बाद सामने आई रिपोर्ट्स में MCD के डिप्टी कमिश्नर विवेक कुमार के हवाले से कहा गया कि इस पूरे ऑपरेशन के दौरान मस्जिद को कोई नुकसान नहीं पहुंचा है.
इन गलियों से गुजरते हुए स्थानीय लोगों ने इस बात पर जोर दिया कि हिंसा का रास्ता चुनने वालों का कोई धर्म नहीं होता. उनका मानना था कि इस मसले का समाधान शांतिपूर्ण तरीके से निकाला जाना चाहिए था, न कि इस तरह के हंगामे और बवाल के जरिए.
शहजाद ने कहा, "हम अमन पसंद लोग हैं. कल जो कुछ भी हुआ वह बेहद परेशान करने वाला था और ऐसा नहीं होना चाहिए था. हालांकि, वे इमारतें (स्ट्रक्चर्स) इलाके के गरीबों के लिए थीं, जिन्हें अब गिरा दिया गया है."
(हिंदी अनुवाद: नौशाद मलूक)




