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“दशकों से नमाज पढ़ी जा रही”: लखनऊ यूनिवर्सिटी में लाल बारादरी सील करने पर विवाद

लखनऊ यूनिवर्सिटी के 13 छात्रों को लाल बारादरी के पास नमाज पढ़ने और नारेबाजी करने के आरोप में नोटिस दिया गया है.

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लखनऊ यूनिवर्सिटी कैंपस स्थित ऐतिहासिक लाल बारादरी भवन को सील किए जाने का विरोध हो रहा है. मुस्लिम स्टूडेंट्स सहित नेशनल स्टूडेंट्स यूनियन ऑफ इंडिया (NSUI) और समाजवादी छात्र सभा (SCS) से जुड़े छात्रों का आरोप है कि यूनिवर्सिटी प्रशासन ने जानबूझकर लाल बारादरी भवन को सील कर दिया, ताकि मुस्लिम छात्र रमजान के दौरान नमाज न पढ़ सकें.

रविवार, 22 फरवरी को मुस्लिम छात्रों ने लाल बारादरी भवन के बाहर नमाज पढ़ी थी. इस दौरान हिंदू छात्र सुरक्षा देने के उद्देश्य से मानव श्रृंखला बनाकर खड़े रहे. जिसकी तस्वीरें और वीडियो सोशल मीडिया पर शेयर की जा रही हैं.

सोमवार, 23 फरवरी को लखनऊ कमिश्नरेट के कार्यपालक मजिस्ट्रेट ने 13 छात्रों को लाल बारादरी के बाहर नमाज पढ़ने और नारेबाजी करने के आरोप में नोटिस जारी किया है.

दूसरी तरफ इस मामले में अखिल भारतीय विद्यार्थी परिषद (ABVP) भी कूद पड़ी है. मंगलवार, 24 फरवरी को ABVP के सदस्य लाल बारादरी के पास नमाज अदा किए जाने के विरोध में हनुमान चालीसा का पाठ करने के लिए जुटे. जिन्हें पुलिस ने हिरासत में लिया. वहीं बजरंग दल के कार्यकर्ताओं ने रजिस्ट्रार को ज्ञापन सौंपा है.

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"सुबह नमाज हुई, दोपहर में भवन सील कर दिया"

24 वर्षीय तौकीर गाजी लखनऊ यूनिवर्सिटी में मास्टर्स के छात्र है. द क्विंट से बातचीत में वे कहते हैं, "मुझे इस विश्वविद्यालय में पांच साल हो गए हैं. जब से मैं आया हूं, तब से लाल बारादरी में नमाज पढ़ रहा हूं. उससे पहले से यहां नमाज होती आ रही है."

वे आगे कहते हैं, "रविवार को हमने फजर की नमाज वहां पढ़ी थी. इसके बाद दोपहर को जब हम गए तो देखा की गेट को सील कर दिया गया है और वहां दीवार बनाई जा रही थी. जिसका हमने विरोध किया."

19 वर्षीय अयाज हसन यूनिवर्सिटी में ग्रेजुएशन के छात्र हैं, वे कहते हैं, "यहां आज से नहीं 60-70 सालों से नमाज पढ़ी जा रही है. हमारे सीनियर्स भी यहां नमाज पढ़ते आ रहे हैं."

"ये सिर्फ इमारत नहीं, जज्बात है"

NSUI के राष्ट्रीय संयोजक विशाल सिंह कहते हैं, "ये हम छात्रों के लिए सिर्फ एक इमारत नहीं है, बल्कि ये यूनिवर्सिटी के लिए एक इमोशन है." वे कमेटी बनाकर बिल्डिंग की स्थिति की ताजा जांच और भारतीय पुरातत्‍व सर्वेक्षण (ASI) विभाग से इसकी संरक्षण की बात कहते हैं.

टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, लाल बारादरी नवाबी दौर की अकेली लाल पत्थर की इमारत थी. 18वीं सदी में इसे बादशाह बाग के नाम से जाना जाता था. इसकी नींव 1814 में नवाब गाजीउद्दीन हैदर शाह ने रखी थी, और इमारत उनके बेटे नसीरुद्दीन हैदर शाह ने 1820 में पूरी की थी.

लाल बारादरी में कभी टीचर्स एसोसिएशन का ऑफिस, एक बैंक, एक कैफेटेरिया और एक स्टाफ क्लब हुआ करता था, जिन्हें इमारत की नाजुक हालत के कारण लगभग एक दशक पहले खाली करा दिया गया था.

कुछ छात्रों का दावा है कि लाल बारादरी के अंदर मस्जिद है. कुछ छात्रों का कहना है कि सालों से यहां नमाज होती आ रही थी, इसलिए इसे नमाज पढ़ने की जगह मानते हैं.

NSUI के प्रदेश उपाध्यक्ष अहमद रजा कहते हैं, "प्रशासन बार-बार यही कह रहा है कि उसे (लाल बारादरी) मस्जिद घोषित नहीं किया गया है. विवाद की शुरुआत इसी बात से हुई है. हम भी इसे मस्जिद नहीं मान रहे हैं. हम उसे नमाज पढ़ने की जगह मान रहे हैं. वहां दशकों से नमाज पढ़ी जा रही थी. इसके खिलाफ न कोई नोटिस आया और न ही कभी इसे रोकने की कोशिश हुई. हम इसे नमाज पढ़ने की जगह मानते थे, इसलिए वहां नमाज पढ़ते थे."

"बिल्डिंग क्षतिग्रस्त, प्रवेश प्रतिबंधित"

हालांकि, यूनिवर्सिटी प्रशासन का कहना है कि बिल्डिंग की हालत खराब है और फेंसिंग सिर्फ सुरक्षा के तौर पर लगाई गई है. लाल बारादरी पर एक नोटिस भी चस्पा है, जिसपर लिखा है कि "भवन क्षतिग्रस्त एवं असुरक्षित है. भवन में प्रवेश एवं अन्य गतिविधियां प्रतिबंधित हैं."

छात्रों का दावा है कि ये नोटिस कई सालों से लगा है. अहमद रजा कहते हैं, "भवन की स्थिति इतनी जर्जर भी नहीं है, जितनी बताई जा रही है. बिल्डिंग के दो हिस्से हैं. जो पिछला हिस्सा है, वो जर्जर है. लेकिन जहां नमाज होती थी, उसकी स्थिति बहुत साफ है. न छज्जे में और न ही दीवारों में कोई क्रैक है. उसको जानबूझकर बंद करने की कोशिश हुई है ताकि धार्मिक उन्माद फैलाया जा सके."

"ये संवेदनशील मामला है, इसमें प्रशासन को पहले छात्रों से बात करनी चाहिए थी," वे आगे कहते हैं.

21 वर्षीय प्रेम प्रकाश यादव मास्टर्स के छात्र हैं और SCS से जुड़े हैं. वे कहते हैं, "अगर यह जर्जर बिल्डिंग है, तो विश्वविद्यालय प्रशासन को नोटिस जारी करना चाहिए था. उन्हें बताना चाहिए था कि ऐसी स्थिति है और नमाज के लिए दूसरी जगह की व्यवस्था करनी चाहिए. मैं इसमें पूरी गलती विश्वविद्यालय प्रशासन की मानता हूं."

"फाइलों में भी नमाज की अनुमति नहीं"

हसनगंज SHO चितवन कुमार ने बताया कि "बहुत पहले एक कमरा मुस्लिम छात्रों और प्रोफेसरों को नमाज पढ़ने के लिए दिया गया था." साथ ही वे कहते हैं, "भवन खंडहर हो गया है. ये यूनिवर्सिटी की प्रॉपर्टी है. विश्वविद्यालय प्रशासन जब चाहे इसे बंद कर सकता है."

हालांकि, यूनिवर्सिटी प्रशासन ने लाल बारादरी में सालों से नमाज पढ़े जाने और मस्जिद के दावों को खारिज किया है. द क्विंट से बातचीत में रजिस्ट्रार भावना मिश्रा ने कहा, "मस्जिद होने का कोई कागजी प्रमाण नहीं है और न ही नमाज के लिए प्रशासन की ओर से अनुमति दी गई है."

"लाल बारादरी में नमाज को लेकर यूनिवर्सिटी प्रशासन की ओर से कोई अनुमति नहीं दी गई है. फाइलें भी देखी गई हैं, लेकिन कोई ऐसा पेपर नहीं मिला, जिसमें नमाज को लेकर परमिशन दी गई हो," वे आगे कहती हैं.

"बिल्डिंग एकदम खंडहर है. जगह-जगह से टूटी हुई है. 2012 में ASI ने सर्वे किया था. उनकी रिपोर्ट में बताया गया था कि बिल्डिंग जीर्ण-शीर्ण अवस्था में है. लाल बारादरी को विरासत स्थल के रूप में संरक्षित करने के लिए ASI से लगातार पत्राचार हो रहा है."
भावना मिश्रा, रजिस्ट्रार
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इसके साथ ही उन्होंने बताया कि स्टूडेंट रील्स बनाने के लिए वहां जाते थे. बिल्डिंग की खराब स्थिति को देखते हुए एहतियात के तौर पर फेंसिंग करवाई जा रही थी. ताकि कोई अनहोनी न हो.

SCS के प्रदेश सचिव नवनीत यादव ने लाल बारादरी में तालाबंदी को साजिश करार दिया है. उन्होंने कहा, "18 फरवरी को आरएसएस प्रमुख आए थे. उसके अगले दिन बीजेपी के प्रदेश अध्यक्ष आए. उसके दो दिन बाद ही मस्जिद पर ताला लग गया. ये एक सोची समझी साजिश है. विश्वविद्यालय शिक्षा का मंदिर है और यहां नफरत फैलाई जा रही है."

मुस्लिम छात्रों ने कुलपति के नाम एक ज्ञापन दिया है, जिसमें ताला खुलवाने की मांग की है. साथ ही पत्र में कहा गया है कि अगर बिल्डिंग क्षतिग्रस्त है तो नमाज के लिए वैकल्पिक जगह की व्यवस्था की जाए.

NSUI के राष्ट्रीय संयोजक ने कहा, "हमारी पहली मांग है कि तत्काल प्रभाव से लाल बारादरी का गेट खुलवाया जाए. इस बिल्डिंग का 200 साल से ज्यादा का इतिहास है. हम कुलपति महोदय से इसके रेनोवेशन और ब्यूटीफिकेशन की मांग करते हैं. इसको संरक्षित किया जाए न कि इसके इतिहास को खत्म किया जाए. इसी को लेकर हम लड़ाई लड़ रहे हैं."

छात्रों की मांगों पर रजिस्ट्रार ने कहा कि वीसी से चर्चा के बाद फैसला लिया जाएगा.

13 छात्रों को मजिस्ट्रेट का नोटिस

रविवार को नमाज में शामिल 13 छात्रों को मजिस्ट्रेट की ओर से नोटिस जारी किया गया है. छात्रों पर लाल बारादरी में हो रहे निर्माण कार्य को जानबूझकर रोकने की कोशिश करने और सार्वजनिक स्थान पर धार्मिक गतिविधि कर शांति व्यवस्था को खतरे में डालने का आरोप लगा है.

नोटिस में कहा गया है कि सभी 13 छात्रों को कार्यपालक मजिस्ट्रेट के सामने पेश होकर बताना होगा कि उनसे एक साल तक शांति और कानून-व्यवस्था बनाए रखने की गारंटी के तौर पर 50 हजार रुपये का निजी मुचलका और 50-50 हजार रुपये के दो जमानती क्यों ना लिए जाएं.

नमाज में शामिल छात्रों पर कार्रवाई के सवाल पर रजिस्ट्रार ने कहा, "कुछ छात्र ऐसे हैं, जो बाहर के थे, वे यूनिवर्सिटी के छात्र नहीं थे. ऐसे छात्रों को लेकर पुलिस को लिखा गया है. बाकि छात्रों को प्रॉक्टर साहब की तरफ से नोटिस जारी किया गया है."

क्या छात्रों के खिलाफ एफआईआर हुई है, इसपर हसनगंज SHO ने कहा, "अभी तक कोई एफआईआर नहीं हुई है, लेकिन विचार-विमर्श किया जा रहा है. छात्रों के भविष्य को देखते हुए अभी तक FIR नहीं की गई है."

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