“मोहल्ले में दो लोगों की लड़ाई हुई थी, जिसके बाद बिमला देवी मुसलमानों को गाली देने लगीं. मेरे अब्बू ने उनसे कहा कि तुम्हारी लड़ाई जिससे है उसे बोलो, पूरे मुसलमान समाज को गाली क्यों दे रही हो. इसी बात पर बिमला देवी के बेटे रोशन ने कॉलर पकड़ा और गाली देने लगा. फिर उन लोगों ने लोहे के खंती से अब्बू के गर्दन पर हमला किया. जिसके बाद मेरे अब्बू की मौत हो गई.”
यह कहना है बिहार के दरभंगा जिले के झगरुआ गांव के रहने वाले 65 वर्षीय अब्दुल सलाम के बेटे कैसर का. एक मार्च 2026 को गांव में हुए एक विवाद के बाद अब्दुल सलाम की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई. इस घटना के बाद गांव में तनाव की स्थिति बन गई थी, जिसे देखते हुए पुलिस और प्रशासन के अधिकारी मौके पर पहुंचे और हालात को नियंत्रण में लिया.
पुलिस ने क्या कहा?
इस मामले को कई लोग धर्म के आधार पर बढ़ रहे नफरत से जोड़कर देख रहे हैं. झगरुआ के रहने वाले कासिम (बदला हुआ नाम) का दावा है कि पिछले कुछ वक्त से गांव और आसपास में धर्म के आधार पर विवाद देखने को मिल रहा है.
इस मामले पर क्विंट ने जमालपुर थाना प्रभारी मुकेश कुमार से बात की. उन्होंने बताया कि सभी आरोपियों को गिरफ्तार कर लिया गया है. सभी आरोपी एक ही परिवार से हैं. ईंट उठाने को लेकर गाली गलौज हुआ था, इसी दौरान मनीष कुमार ने लोहे का रॉड चला दिया. फिलहाल गांव में स्थिति शांत है.
जब क्विंट ने थाना प्रभारी से धर्म को लेकर अपशब्द कहे जाने को लेकर हुए विवाद पर सवाल पूछा तो उन्होंने कहा, "ऐसा कोई मामला नहीं है, एसपी और डीआईजी साहब का प्रेस नोट निकला है, ऐसा कोई मामला नहीं है. गांव के लोगों ने कॉपरेट किया है. ये मामला ईंट उठाने को लेकर हुआ है."
मुकेश कुमार आगे कहते हैं,
"अब्दुल सलाम साहब का मनीष के परिवार से अच्छा संबंध था. तो वो सोचे कि दो लोगों में बहस हो रही है और महिला हल्ला कर रही है, तो हम बोल देंगे तो मान जाएगी. इसी दौरान महिला का बेटा बोला कि तुम बोलने वाले कौन होते हो और फिर लोहे के रॉड से मार दिया, जिसमें उनकी मौत हो गई. जबकि दोनों परिवार का अच्छा संबंध था."
मुकेश कुमार कहते हैं कि धर्म को लेकर बोलने का कोई मौका कहां मिला, रॉड चला, मौत हो गई. सोशल मीडिया पर लोग कुछ भी बोल दें तो वो अलग बात है. यहां गांव में ऐसा कुछ नहीं है.
हालांकि, मृतक की बेटी का कहना है कि बिमला देवी ने कहा था कि सुअर खा खाकर रोजा रखते हैं मुसलमान सब. मेरे अब्बा ने बोला कि जिससे लड़ाई है उससे बात करो. तभी उसका एक बेटा कॉलर पकड़कर कहता है कि तुम बीच में क्यों बोल रहा है, मेरे अब्बा ने कहा कि अगर सब मुसलमान को गाली दोगे तो हम बीच में आएंगे. फिर मेरे अब्बा को मार दिया.
मृतक की बेटी ने कहा, "मेरे अब्बा के मरने के बाद भी लात से पीटता रहा. हम लोगों की मांग है कि मनीष कुमार को फांसी की सजा हो. उसकी पत्नी और मां को उम्रकैद की सजा हो."
बता दें कि इस मामले पर पुलिस ने अब्दुल सलाम की पत्नी की शिकायत पर भारतीय न्याय संहिता की धारा 103(1) (हत्या), 55 (अपराध में सहयोग) और 33(5) (साझा आपराधिक मंशा) के तहत मामला दर्ज किया है. एफआईआर में विमला देवी, रोशन राम, मनीश राम और रिंकी देवी के नाम शामिल किए गए हैं.
अंडे, बिस्किट, चिप्स इत्यादी की छोटी सी दुकान चलाने वाले अब्दुल सलाम के परिवार का आरोप है कि धर्म को लेकर गाली दी गई थी, जिसपर अब्दुल सलाम ने आरोपियों को टोका था.
घटना के बाद गांव में किसी तरह का साम्प्रदायिक तनाव न फैले, इसके लिए प्रशासन ने अतिरिक्त पुलिस बल तैनात किया है. जिले के वरिष्ठ अधिकारी भी गांव पहुंचे और स्थिति का जायजा लिया. प्रशासन का कहना है कि शांति बनाए रखने के लिए लगातार निगरानी की जा रही है.
अब्दुल सलाम के एक रिश्तेदार ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि गांव के दक्षिण टोला में करीब 90 प्रतिशत मुसलमान रहते हैं, जबकि 6-7 घर दलित हिंदुओं के हैं. उनका कहना है कि इस घटना के बाद माहौल खराब हो सकता था, लेकिन गांव के लोगों ने मिलकर ऐसा नहीं होने दिया. उन्होंने कहा कि जिस परिवार ने अपराध किया है, उसकी सजा पूरे समुदाय को नहीं मिलनी चाहिए. हालांकि, उन्होंने ये भी कहा कि कई लोगों को ऐसा लगता है कि सरकार उनकी है और वो कुछ भी बोल सकते हैं.
