बिहार के बजट में जनता को क्या मिला? ये वो सवाल है जो हर कोई पूछ रहा है. वित्त मंत्री बिजेंद्र प्रसाद यादव ने 3 फरवरी को 11 मिनट में 3.47 लाख करोड़ का भारी-भरकम बजट पेश किया. अब बजट भाषण और सरकार के ऐलानों को लेकर सवाल उठ रहे हैं.
इसके पीछे सबसे बड़ा कारण है- सामाजिक विकास से जुड़े विभागों के योजना मद में कटौती. राज्य सरकार ने इस बार के बजट में शिक्षा, स्वास्थ्य, समाज कल्याण, जल संसाधन, कृषि और PHED जैसे विभागों के योजना मद यानी इन विभागों की योजनाओं पर खर्च में कटौती की है. हालांकि, ग्रामीण विकास, शहरी विकास और आवास, उद्योग जैसे विभागों के योजना मद में बढ़ोतरी हुई है.
शिक्षा विभाग: योजना मद में करीब 15% की कटौती
वित्त मंत्री के बजट भाषण में कहा गया है कि साल 2026-27 में शिक्षा और उच्च शिक्षा पर 68,216.95 करोड़ रुपये का खर्च अनुमानित है. जो कि सबसे ज्यादा है. यह कुल बजट का 19.6 प्रतिशत है. बता दें कि सरकार ने इस बार नए विभाग के तौर पर 'उच्च शिक्षा विभाग' का गठन किया है.
अगर शिक्षा विभाग के कुल बजट की बात करें तो पिछले वित्त वर्ष की तुलना में इस बार करीब 12 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है. पिछले पांच सालों में 2022–23 और 2026–27 के बीच शिक्षा विभाग के बजट में करीब 74% की बढ़ोतरी हुई है.
(विश्लेषण के लिए इस लेख में शिक्षा और उच्च शिक्षा विभाग के बजट को जोड़कर एक विभाग के रूप में पेश किया गया है.)
लेकिन शिक्षा विभाग की योजना मद में पिछले साल के मुकाबले लगभग 3,348.87 करोड़ रुपए की कटौती की गई है. 2022–23 और 2026–27 के बीच शिक्षा विभाग के स्कीम बजट में करीब 13% की गिरावट हुई है. वहीं पिछले वित्त वर्ष से इस वित्त वर्ष के बीच इसमें करीब 15% की कटौती हुई है.
वित्त वर्ष 2026-27 के लिए शिक्षा विभाग में स्थापना और प्रतिबद्धता खर्च 48,865.47 करोड़ है, जो कि पिछले बजट से करीब 10 हजार करोड़ ज्यादा है. बता दें कि स्थापना और प्रतिबद्धता खर्च वो खर्च है जो कि विभागों के संचालन, वेतन, पेंशन आदि पर खर्च होता है. पिछले 5 सालों में इस खर्च में करीब 189 प्रतिशत की बढ़ोतरी हुई है.
केंद्रीय शिक्षा मंत्रालय द्वारा शैक्षणिक वर्ष 2024-25 के लिए जारी यूनिफाइड डिस्ट्रिक्ट इन्फॉर्मेशन सिस्टम फॉर एजुकेशन प्लस (UDISE+) के आंकड़ों के अनुसार, सरकारी स्कूलों की संख्या कम होने वाले राज्यों में बिहार सबसे ऊपर है, जहां साल 2024-25 में 1,800 स्कूल कम हुए हैं.
70,589 स्कूलों में कंप्यूटर फैसिलीटी नहीं है.
48,152 स्कूलों में प्लेग्राउंड नहीं है.
31,434 स्कूलों में लाइब्रेरी/ बुक बैंक/ रीडिंग कॉर्नर नहीं है.
3,227 स्कूलों में फंक्शनल बॉयज टॉयलेट नहीं है.
2,760 स्कूलों में फंक्शनल इलेक्ट्रिसिटी नहीं है.
1,913 स्कूलों में फंक्शनल गर्ल्स टॉयलेट नहीं है.
स्वास्थ्य, कृषि, समाज कल्याण विभाग का बजट भी घटा
स्वास्थ्य विभाग का कुल बजट 1,235 करोड़ रुपये बढ़कर 21,270 करोड़ रुपये हो गया, हालांकि इसका शेयर 6.32 प्रतिशत से घटकर 6.12 प्रतिशत हो गया. योजना मद में करीब 266 करोड़ की कटौती हुई है.
CAG की 2023 की ऑडिट रिपोर्ट बताती है कि राज्य के 1,932 PHC और APHC में से 44% चौबीसों घंटे संचालित नहीं होते. सिर्फ 29% में प्रसूति सेवाएं उपलब्ध हैं. महज 14% केंद्रों में ऑपरेशन थिएटर हैं.
कृषि विभाग के बजट में भी कटौती हुई है. कृषि विभाग का कुल बजट 3446.45 करोड़ है, जो कि प्रदेश के कुल बजट का 1 फीसदी से भी कम है. योजना मद के लिए सरकार ने 2525.43 करोड़ आवंटित किए हैं, जो कि पिछले बजट से करीब पौने तीन सौ करोड़ कम है.
पिछले पांच साल के कृषि बजट पर नजर डालें तो पता चलता है कि वित्त वर्ष 2023-24 में बजट सबसे अधिक (₹3639.78 करोड़) रहा. इसके बाद लगातार कटौती हुई है. 2022-23 से 2026-27 तक कुल कृषि बजट में ₹137.86 करोड़ की कमी आई है. वहीं 2022-23 से 2025-26 तक योजना मद में मामूली बढ़ोतरी हुई. 2026-27 में अचानक भारी कटौती देखने को मिल रही है.
द क्विंट से बातचीत में पटना कॉलेज के पूर्व प्राचार्य और अर्थशास्त्री प्रोफेसर नवल किशोर चौधरी कहते हैं, "कृषि पर खर्च कम नहीं होना चाहिए था. मैं इसको सही नहीं समझता हूं. किसानों को मदद की जरूरत है. बिहार की इकॉनमी अभी भी ग्रामीण इकॉनमी है. पिछली जनगणना के अनुसार 89% आबादी ग्रामीण इकॉनमी पर निर्भर है. खेती 75% से ज्यादा है. ऐसे में इसे कैसे नजरअंदाज किया जा सकता है."
बजट में किसानों के लिए ‘जननायक कर्पूरी ठाकुर किसान सम्मान निधि’ की घोषणा की गई है. इसके तहत अन्नदाताओं को केंद्र सरकार की किसान सम्मान निधि के अलावा सालाना 3000 रुपये अलग से मिलेंगे. बता दें कि चुनाव से पहले एनडीए की तरफ से ये ऐलान किया गया था.
सरकार ने पिछले साल सामाजिक सुरक्षा पेंशन की राशि बढ़ाकर 1100 रुपये की थी. इसके बावजूद समाज कल्याण विभाग के योजना मद में कटौती की गई है. 2025-26 में समाज कल्याण विभाग का योजना मद 8668.25 करोड़ था, जो कि इस साल घटकर 8379.07 करोड़ कर दिया गया है.
जल संसाधन विभाग: योजना मद में 1,200 करोड़ की कटौती
शिक्षा विभाग के बाद दूसरी सबसे ज्यादा कटौती जल संसाधन विभाग के योजना मद में हुई है. बजट के आंकड़ों के मुताबिक, जल संसाधन विभाग का कुल बजट 7127.35 करोड़ है, जिसमें से योजना मद के लिए 4836.18 करोड़ आवंटित किया गया है. पिछले वित्त वर्ष के मुकाबले इसमें 20% की कटौती हुई है.
प्रदेश के कई जिले मॉनसून सीजन में बाढ़ से प्रभावित रहते हैं. ऐसे में जल संसाधन विभाग के योजना मद में कटौती से बाढ़ नियंत्रण की योजनाओं पर असर पड़ सकता है.
दूसरी तरफ लोक स्वास्थ्य एवं अभियांत्रण विभाग के योजना मद में करीब 265 करोड़ की कटौती हुई है.
द क्विंट से बातचीत में एएन सिन्हा इंस्टीट्यूट, पटना के पूर्व निदेशक और अर्थशास्त्री डीएम दिवाकर कहते हैं, "कहा जाता है कि बिहार में डबल इंजन की सरकार है. लेकिन डबल इंजन सरकार का रिफ्लेक्शन बजट में नहीं दिखता है. सेंटर ने फाइनेंस कमीशन का शेयर घटा दिया है. जब राज्य को कम मिलेगा तो राज्य कम ही खर्च करेगा."
केंद्रीय करों के बंटवारे में बिहार का हिस्सा 0.11 प्रतिशत घट गया है. यह 15वें वित्त आयोग में 10.058% था, जो 16वें वित्त आयोग में घटकर 9.948% रह गया है. आंकड़ों के मुताबिक, इस बार केंद्र सरकार से बिहार को 2.10 लाख करोड़ रुपये मिलने का अनुमान है, जिसमें केंद्रीय करों में हिस्सा और अनुदान दोनों शामिल हैं.
बजट में चुनावी वादों पर फोकस
बजट में सरकार का जोर चुनावी वादों पर दिखता है. महिला सशक्तिकरण, रोजगार सृजन, औद्योगिकीकरण सहित सरकार की प्रमुख प्रतिबद्धताओं की झलक बजट में देखने को मिलती है.
ग्रामीण विकास विभाग- जिसके तहत मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना इंप्लीमेंट होती है- के बजट में भारी बढ़ोतरी हुई है. 7,608 करोड़ की वृद्धि के साथ विभाग का कुल बजट 23,701 करोड़ रुपये हो गया. योजना मद में 6,806 करोड़ का इजाफा हुआ है. पिछले बार के मुकाबले विभाग का बजट शेयर 5.08 फीसदी से बढ़कर 6.82 फीसदी हो गया है.
चुनाव से पहले मुख्यमंत्री महिला रोजगार योजना के तहत प्रदेश की 1.56 करोड़ महिलाओं को रोजगार शुरू करने के लिए सरकार की ओर से 10 हजार रुपये ट्रांसफर किए गए थे.
सरकार ने ऊर्जा विभाग के बजट में 5,253 करोड़ की बढ़ोतरी की है, जिसके बाद विभाग का कुल बजट 18,737 करोड़ हो गया है. बता दें कि प्रदेश के घरेलू बिजली उपभोक्ताओं को पिछले साल अगस्त महीने से प्रति माह 125 यूनिट फ्री बिजली मिल रही है.
ऊर्जा विभाग के बजट में की गई बढ़ोतरी को 125 यूनिट मुफ्त बिजली योजना से जोड़कर देखा जा रहा है, हालांकि इसका उपयोग बिजली क्षेत्र के अन्य सुधारात्मक कार्यों में भी किया जाएगा.
शहरी विकास और उद्योग के बजट में भी बढ़ोतरी
शहरी विकास और आवास विभाग का बजट 3,255 करोड़ की बढ़ोतरी के साथ 15,237 करोड़ तक पहुंच गया है. योजना मद में करीब 3,093 करोड़ की बढ़ोतरी हुई है, जिससे इंफ्रास्ट्रक्चर डेवलपमेंट को बूस्ट मिलेगा.
1,371 करोड़ की बढ़ोतरी के साथ उद्योग विभाग का बजट 3,338 करोड़ हो गया है. 2026-27 में उद्योग विभाग के स्कीम मद में पिछले वित्त वर्ष की तुलना में करीब 73% की बढ़ोतरी हुई है. 2025-26 में स्कीम मद के तहत 1,850 करोड़ का प्रावधान था, जबकि इस बार के बजट में इसे बढ़ाकर 3,200.21 करोड़ किया गया है.
बजट भाषण में कहा गया है कि डिफेंस कॉरिडोर, सेमीकंडक्टर मैन्युफैक्चरिंग पार्क, ग्लोबल कैपेबिलिटी सेंटर्स, मेगा टेक सिटी और फिनटेक सिटी की स्थापना कर बिहार को पूर्वी भारत के नए टेक हब और एक 'वैश्विक- बैक एंड-हब' एवं 'ग्लोबल वर्कप्लेस' के रूप में स्थापित किया जाना है.
सरकार ने सड़क निर्माण विभाग की योजना मद में 611.78 करोड़ रुपये की बढ़ोतरी की है. इसके साथ ही बजट भाषण में कहा गया है कि सिंगल लेन सड़कों को डबल लेन किया जा रहा है. साथ ही 5 नए एक्सप्रेस-वे की भी घोषणा की गई है. हालांकि बिल्डिंग निर्माण विभाग का योजना मद 713.40 करोड़ रुपये कम कर दिया है .
विकास से ज्यादा सैलरी, पेंशन, ब्याज चुकाने पर खर्च
प्रदेश के कुल बजट का लगभग 65 प्रतिशत हिस्सा स्थापना एवं प्रतिबद्ध व्यय (गैर योजना मद) यानी विभागों के संचालन, स्थापना, सैलरी, पेंशन, ब्याज, सब्सिडी जैसी चीजों पर खर्च होगा, जबकि सिर्फ 35 प्रतिशत ही योजनाओं पर खर्च के लिए आवंटित किया गया है.
इस साल योजनाओं पर खर्च के लिए जहां 1.22 लाख करोड़ रुपये आवंटित किए गए हैं, वहीं गैर योजना मद के लिए 2.25 करोड़ रुपए का आवंटन किया गया है. पिछले साल के मुकाबले गैर योजना मद में 25 हजार करोड़ की बढ़ोतरी हुई है, जबकि योजना मद में सिर्फ 5 हजार करोड़ का ही इजाफा हुआ है.
बता दें कि साल 2020-21 तक राज्य में गैर योजना मद और योजना मद का खर्च लगभग बराबर हुआ करता था. जो इस साल बढ़कर लगभग दोगुना हो गया है.
सरकार ने वित्त वर्ष में 2026-27 में राजकोषीय घाटा 39,111.80 करोड़ रुपये रहने का अनुमान लगाया है. यह राज्य की कुल अर्थव्यवस्था यानी सकल राज्य घरेलू उत्पाद (GSDP) का 2.99 प्रतिशत है.
वहीं इस वित्त वर्ष में राज्य पर कुल बकाया सार्वजनिक कर्ज (Outstanding Public Debt) लगभग 3,88,554.47 करोड़ रुपये होने का अनुमान है. यह राशि राज्य की GSDP (₹13,09,155 करोड़) का करीब 29.68 प्रतिशत है.
