"मुझे यह कहने में कोई संकोच नहीं है कि यह हिंदुस्तान है, यह देश हिंदुस्तान में रहने वाले बहुसंख्यकों की इच्छा के अनुसार काम करेगा. यह कानून है. आप यह नहीं कह सकते कि हाई कोर्ट के जज होकर आप ऐसा बोल रहे हैं. कानून तो भैया बहुसंख्यक से ही चलता है, परिवार में भी देखिए, समाज में देखिए. जहां पर अधिक लोग होंगे जो कहते हैं, उसी को माना जाता है."
ये बयान किसी राजनीतिक दल के कार्यकर्ता का नहीं बल्कि इलाहाबाद हाई कोर्ट के जस्टिस शेखर कुमार यादव का है. जस्टिस शेखर कुमार यादव रविवार यानी 8 दिसंबर 2024 को दक्षिणपंथी संगठन विश्व हिंदू परिषद (VHP) के कानूनी प्रकोष्ठ द्वारा आयोजित एक कार्यक्रम में शामिल हुए थे. हाईकोर्ट स्थित लाइब्रेरी हॉल में हुए इस कार्यक्रम में इलाहाबाद हाईकोर्ट के एक और जज जस्टिस दिनेश पाठक भी मौजूद रहे.
जस्टिस शेखर यादव को इस कार्यक्रम में समान नागरिक संहिता विषय पर बोलने के लिए बुलाया गया था. इस दौरान जस्टिस शेखर ने मुसलमानों के धार्मिक मामले समेत बांग्लादेश, तालिबान, हिंदू एकता के मुद्दे पर अपनी बात रखी.
इस कार्यक्रम में कई वकील और VHP के कार्यकर्ता भी मौजूद थे, जहां युनिफॉर्म सिविल कोड के अलावा, वक्फ बोर्ड अधिनियम और धर्मांतरण के कारणों और संभावित समाधानों पर भी चर्चा की गई.
कौन हैं जस्टिस शेखर कुमार यादव?
इलाहाबाद हाई कोर्ट की वेबसाइट के मुताबिक, जस्टिस शेखर यादव का जन्म 16 अप्रैल 1964 को हुआ था. वे इलाहाबाद यूनिवर्सिटी से साल 1988 में लॉ ग्रेजुएट हुए. इसके बाद 8 सितंबर 1990 को यूपी बार काउंसिल में एडवोकेट इनरोल हुए.
12 दिसंबर 2019 को जस्टिस शेखर कुमार यादव को इलाहाबाद हाईकोर्ट में बतौर एडिशनल जज नियुक्त किया गया. इसके दो साल में उन्हें स्थाई जज के रूप में 26 मार्च 2021 को उन्हें शपथ दिलाई गई. इलाहाबाद हाईकोर्ट में उनका कार्यकाल 15 अप्रैल 2026 तक है.
भारत सरकार के वरिष्ठ अधिवक्ता और रेलवे के भी वरिष्ठ अधिवक्ता रहे हैं.
यूपी सरकार के लिए अतिरिक्त सरकारी वकील और स्थायी वकील के रूप में काम किया.
वीर बहादुर सिंह पूर्वांचल विश्वविद्यालय जौनपुर के भी स्थाई अधिवक्ता के पद पर रहे हैं.
इलाहाबाद हाईकोर्ट में सिविल और संवैधानिक मामलों के वकील रहे.
कौशांबी जिले के एडमिनिस्ट्रेटिव जज भी हैं.
जस्टिस शेखर के विवादित बयान
जस्टिस शेखर ने VHP के कार्यक्रम के दौरान कभी कठमुल्ले शब्द (मुसलमानों के लिए इस्तेमाल किया जाने वाला एक अपमानजनक शब्द) का इस्तेमाल किया तो कभी हिंदुओ को सहिष्णु तो दूसरे धर्म के लोगों को असहिष्णु बताया. जस्टिस शेखर ने कहा-
"थोड़ा सा भी गुरेज नहीं है, मीडिया वाले कल कुछ भी छाप दें, शरियत में बहुत सी बाते हैं, जहां गलत करोगे वहां गलत की सजा मिलेगी. हाथ तोड़ा तो हाथ तोड़ा जाएगा, पैर तोड़ा तो पैर, आंख फोड़ा तो आंख फोड़ी जाएगी. जान लिया तो जान लिया जाएगा. ऐसा कानून कहिए न. इस कानून को क्यों नहीं मानते हैं? इसके लिए पीछे क्यों हटते हैं? तो ये नहीं चलने वाला है. चलेगा वही जो बहुतक हिताय और सुखाय वाला होगा. हमारी अपनी खुद की कल्पना है, हम विश्व को अपना परिवार मानते हैं. हिंदुस्तान में रहने वाला भाई हमारा है. हमारे यहां सिखाया जाता है कि छोटे से पशु को मत मारो, चींटी को भी मत मारो. ये सिखाया जाता है. इसलिए शायद हम सहिष्णु भी हैं और उदार भी हैं. हमें किसी का कष्ट देखकर कष्ट होता है."
जब हमारे यहां बच्चा पैदा होता है, बचपनकाल से ही उसको इश्वर की ओर बढ़ाया जाता है, वेद मंत्र पढ़े जाते हैं, अहिंसा के बारे में चीजें बताई जाती हैं. लेकिन आपके यहां तो बचपन से ही बच्चे के सामने रखकर पशुओं का वध किया जाता है तो आप कैसे अपेक्षा करते हैं कि सहिष्णु होगा वो, उदार होगा?
उन्होंने आगे कहा, "हां इतना अपेक्षा जरूर रखता हूं ये देश भारत है, यहां पर रहने वाला व्यक्ति भारतीय है, भारत के लोग हिंदू नहीं समझ पाते हैं, हिंदू केवल उसी को समझते हैं जो केवल और केवल पूजा और पद्धति करने वाला, गंगा स्नान करने वाला, चंदन लगाने वाला व्यक्ति हिंदू है, ऐसा नहीं है. हिंदू इस देश में रहने वाला, इस देश को अपनी मां कहने वाला, इस देश पर कोई परेशानी आ जाए तो अपना सर निछावर करने वाला जो व्यक्ति है उसकी पूजा पद्धति कुछ भी हो सकती है, वो कुरान को मान सकता है, बाइबल को मान सकता है, लेकिन वो हिंदू है."
"कठमुल्ला है, ये शब्द गलत है, लेकिन कहने में गुरेज नहीं है"
जस्टिस शेखर यादव ने कहा, "...लेकिन जबरदस्ती आप करेंगे कि नहीं साहब हम तो ये मानकर चलेंगे. लेकिन एक बात आपको बता दूं, जिनकी हम बात कर रहे हैं, सब बुरे नहीं है. वो सब बुरे भी नहीं हैं, ये जो कुरीतियों और बुराइयां जो हम बता रहे हैं, वो भी मानते हैं कि बुराइयां हैं. वो चार पत्नियों के पक्ष में नहीं रहते हैं, पत्नी को तीन तलाक के पक्ष में नहीं रहते हैं, बच्चियों को मार दिया जाए इसके पक्ष में नहीं रहते हैं. लेकिन जो कठमुल्ला है, ये शब्द गलत है, लेकिन कहने में गुरेज नहीं है, क्योंकि वो देश के लिए घातक हैं, जनता को भड़काने वाले लोग हैं, देश आगे न बढ़े इस प्रकार के लोग हैं. उनसे सावधान रहने की जरूरत है. क्योंकि ये कॉमन बिल है ये केवल और केवल उन पर्सनल लॉ में आई बुराइयों तक ही सीमित नहीं है, ये जो बुराइयां दूर होंगी तो निश्चित रूप से हमारा देश भी प्रगतिशील होगा."
"एक रहेंगे सेफ रहेंगे"
जस्टिस शेखर यादव ने आगे कहा, जैसा मैंने बताया आप हिंदू पहले हैं, और हिंदू कोई संकीर्ण भाषा नहीं है जैसा कि मैंने बताया. इस देश में रहने वाला व्यक्ति कोई भी हो पूजा पद्धति कुछ भी हो सकती है, अगर वो गर्व कहता है कि ये धरती मेरी मां है, मैं इसका पुत्र हूं वो निश्चित रूप से हिंदू है. स्वामी विवेकानंद जैसे महापुरुष ने कहा कि गर्व से कहो हम हिंदू हैं, क्या उनके अंदर विवेक नहीं था कि ये नहीं बोलना चाहिए. उनके अंदर था कि साहब अगर इस देश को कहीं ऊपर कोई ले जा सकता है, विश्वगुरू बना सकता है तो हिंदू ही बना सकता है, दूसरा कोई नहीं बना सकता है."
ये जो इच्छा आपके अंदर है इसको कभी मरने मत दीजिए आप. एक बात कहकर अपनी बात खत्म करूंगा. ये जो जिजीविषा आपके अंदर है, इच्छा आपके अंदर है, अगर कहीं आपने इसे सुप्त कर लिया तो ये बांग्लादेश और तालिबान बनने में देर नहीं लगेगा. जरूरत है लोगों के बीच ये प्रसार करने की कि अपने आपको मजबूत कीजिए, अपने धर्म को पहचानिए, अपने त्रेता और द्वापर युग के महापुरुषों को पहचानिए, वैसा बल लाइए अपने अंदर. ये तो मैं नहीं कहूंगा कि एक रहेंगे सेफ रहेंगे नहीं तो दूसरी बात हो जाएगी. लेकिन निश्चित रूप से इसमें काम है.जस्टिस शेखर यादव
"समान नागरिक संहिता जल्द लागू होगा"
समान नागरिक संहिता पर उन्होंने कहा कि जहां महिलाओं को शास्त्रों और वेदों जैसे हिंदू धर्मग्रंथों में देवी के रूप में पूजनीय माना जाता है, वहीं एक विशेष समुदाय (मुस्लिम) के सदस्य अभी भी कई पत्नियां रखने, हलाला में शामिल होने या तीन तलाक के अधिकार का दावा करते हैं.
"आप उस महिला का अपमान नहीं कर सकते, जिसे हमारे शास्त्रों और वेदों में देवी के रूप में मान्यता दी गई है. आप चार पत्नियां रखने, हलाला करने या तीन तलाक देने के अधिकार का दावा नहीं कर सकते. आप कहते हैं, हमें कहने का अधिकार है 'तीन तलाक' और महिलाओं को भरण-पोषण न देना, यह अधिकार काम नहीं करेगा. यूसीसी कोई ऐसी चीज नहीं है जिसकी वकालत सिर्फ वीएचपी, आरएसएस और हिंदू वकील करते हैं, देश की शीर्ष अदालत भी वकालत करती है..."
उन्होंने आगे कहा, "मैं कहता हूं कि यह देश निश्चित रूप से एक समान कानून बनाएगा और यह बहुत जल्द होगा."
"एकमात्र पशु है जो ऑक्सीजन लेती और छोड़ती है"
सितंबर 2021 में जस्टिस शेखर ने कहा था कि सरकार को संविधान के भाग III के तहत मौलिक अधिकारों के दायरे में गायों को शामिल करने के लिए एक कानून लाना चाहिए. साथ ही गायों को नुकसान पहुंचाने की बात करने वालों को दंडित करने के लिए सख्त कानून बनाना चाहिए.
जस्टिस शेखर कुमार यादव ने गौहत्या के आरोप में जेल में बंद जावेद की जमानत याचिका खारिज करते हुए कहा था,
"वैज्ञानिक मानते हैं कि गाय ही एकमात्र पशु है जो ऑक्सीजन लेती और छोड़ती है. हिंदू धर्म के अनुसार, गाय में 33 कोटि देवी देवताओं का वास है. ऋगवेद में गाय को अघन्या, यजुर्वेद में गौर अनुपमेय और अथर्वेद में संपत्तियों का घर कहा गया है. भगवान कृष्ण को सारा ज्ञान गौचरणों से ही प्राप्त हुआ.”
जमानत याचिका खारिज करते हुए उन्होंने ये भी लिखा था कि गाय को एक राष्ट्रीय पशु घोषित किया जाए और गौ सुरक्षा को हिंदुओं के मौलिक अधिकार में रखा जाए क्योंकि हम जानते हैं कि जब देश की संस्कृति और उसकी आस्था पर चोट होती है तो देश कमजोर होता है.
"महिलाएं ज्यादातर मामलों में POCSO/SC-ST एक्ट के तहत झूठा केस करा रहीं"
अगस्त 2023 में इलाहाबाद हाईकोर्ट के जज शेखर यादव ने एक मामले पर टिप्पणी करते हुए कहा,
केस के आगे बढ़ने से पहले यह कहना उचित होगा कि देखा गया है कि समाज में निर्दोष व्यक्तियों के खिलाफ पॉक्सो व एससी-एसटी एक्ट के तहत कुछ झूठी एफआईआर दर्ज की जाती है, सिर्फ पैसे के लिए समाज में उनकी छवि खराब की जाती है. यह बहुत दुर्भाग्यपूर्ण है कि आजकल अधिकतम मामलों में महिलाएं इसे पैसे हड़पने के लिए एक हथियार के रूप में इस्तेमाल कर रही हैं, जोकि रोका जाना चाहिए.
जुलाई 2021 में, एक महिला को गैरकानूनी तरीके से इस्लाम धर्म अपनाने और शादी करने के आरोपी एक व्यक्ति को जमानत देने से इनकार करते हुए, जस्टिस यादव ने कहा था कि देश में धार्मिक कट्टरता, लालच या भय के लिए कोई जगह नहीं है, और अगर बहुसंख्यक समुदाय का कोई व्यक्ति अपमान की वजह से किसी दूसरे धर्म में परिवर्तित हो जाता है तो देश कमजोर हो जाता है, जिससे विनाशकारी शक्तियों को फायदा होता है.
"भारत की संस्कृति भगवान राम के बिना अधूरी", संसद से राम, कृष्ण के सम्मान के लिए कानून बने
अक्टूबर 2021 में, जस्टिस शेखर ने केंद्र सरकार से हिंदुओं के भगवान राम, कृष्ण, रामायण, महाभारत, भगवद गीता और अन्य के सम्मान के लिए एक कानून लाने का अपील की थी. जस्टिस शेखर यादव ने ये टिप्पणी फेसबुक पर राम और कृष्ण के खिलाफ कथित तौर पर अश्लील टिप्पणी करने वाले आकाश जाटव उर्फ सूर्य प्रकाश नाम के एक व्यक्ति को जमानत देते हुए की थी.
उन्होंने इस मामले में जमानत देते समय, राम जन्मभूमि विवाद में सुप्रीम कोर्ट के फैसले का जिक्र किया और कहा कि यह "राम" में विश्वास करने वालों के पक्ष में था. जस्टिस यादव ने कहा, "राम इस देश के हर नागरिक के दिल में रहते हैं, वह भारत की आत्मा हैं. इस देश की संस्कृति राम के बिना अधूरी है."
जस्टिस शेखर यादव ने इस बात पर भी जोर दिया कि कृष्ण और राम के सम्मान में एक कानून लाने के साथ-साथ देश के सभी स्कूलों में इसे अनिवार्य विषय बनाकर बच्चों को शिक्षित करने की आवश्यकता है.
विकसित भारत पर भाषण
अभी हाल ही में जस्टिस शेखर कुमार को जाम्बिया की यसबड यूनिवर्सिटी लुसाका ने कानून में मानद डॉक्टरेट पीएचडी से सम्मानित किया था. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक जस्टिस यादव ने 18 सितंबर 2024 को ब्रिटिश संसद हाउस ऑफ लार्ड्स में भी उन्होंने भाषण दिया था. जस्टिस शेखर कुमार यादव को ब्रिटेन सरकार ने ट्रेलब्लेजर ऑफ इंडिया पायनियरिंग द पाथ टू विकसित भारत 2047 विषय पर भाषण के लिए 18 सितंबर को आमंत्रित किया था. इस मौके पर जस्टिस यादव ने ब्रिटिश संसद में कहा था कि विदेशी ताकतों ने देश को कई बार लूटा लेकिन संस्कृति और आदर्शों के कारण भारत अब भी मजबूती से न सिर्फ खड़ा है बल्कि आगे भी बढ़ा है.
