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BJP का 'घर-घर सिंदूर' कैंपेन से इंकार, लेकिन पोस्टर और भाषण कुछ और कहते हैं!

रेल टिकटों से PM मोदी के भाषणों तक, ऑपरेशन सिंदूर के बहाने 'ऑपरेशन चुनाव'?

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पहलगाम आतंकी हमले (Pahalgam Terror Attack) के प्रतिशोध में शुरू किया गया ऑपरेशन सिंदूर, सीमा पार आतंकवाद के लिए भारत का सैन्य जवाब था. लेकिन आतंकवाद विरोधी प्रयास के रूप में शुरू हुआ यह अभियान अब पोस्टर, नारे, सामाजिक अभियान और यहां तक ​​कि ट्रेन टिकटों के माध्यम से बीजेपी शासित राज्यों में राजनीतिक पूंजी के रूप में पेश किया जा रहा है.

पेट्रोल पंप, सोशल मीडिया और सार्वजनिक स्थानों पर पीएम मोदी के सैन्य थीम वाले पोस्टरों की भरमार है. ऐसे में सवाल है कि क्या ऑपरेशन सिंदूर का राजनीतिकरण किया जा रहा है? क्या ऑपरेशन सिंदूर के बहाने 'ऑपरेशन चुनाव' की तैयारी चल रही है?  ऑपरेशन सिंदूर सेना के शौर्य की कहानी है, लेकिन सूपर हिट कहानी के मुख्य किरदार दरकिनार हैं यानी आर्मड फोर्सेस की वीर गाथा पर नेताओं की I, me, myself की कथा चालू है.

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सिंदूर और वोट की राजनीति

ऑपरेशन सिंदूर के बीच ही एक खबर आई कि मोदी 3.0 की एनिवर्सरी पर BJP कार्यकर्ता घर-घर जाकर महिलाओं को सिंदूर का पैकेट देंगे. एक महीने तक ये कैंपेन चलेगा.. लोकसभा सांसद से लेकर मंत्री तक रोज पैदल यात्रा करेंगे. खबर आने के दो दिनों तक बीजेपी की तरफ से इस खबर का खंडन नहीं किया गया. लेकिन सोशल मीडिया पर इस अभियान के खिलाफ आवाज उठने लगी. ऑपरेशन सिंदूर का राजनीतिक फायदा या राजनीतिकरण का आरोप लगना शुरू हुआ.

फिर 30 मई को सरकार की फैक्ट चेकिंग यूनिट पीआईबी ने इस खबर का फेक बताया. बीजेपी की तरफ से भी इस खबर को फर्जी बताया गया. तो क्या बीजेपी सच में ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर कोई कैंपेन नहीं कर रही है? क्या ऑपरेशन सिंदूर का राजनीतिकरण नहीं हो रहा?

बिहार बीजेपी ने अपने सोशल मीडिया पर कुछ तस्वीर शेयर किया है. जिसमें साफ लिखा है कि सिंदूर का सम्मान, भारत का स्वाभिमान! #ऑपरेशन_सिंदूर की ऐतिहासिक सफलता के बाद माननीय प्रधानमंत्री श्री Narendra Modi जी के प्रथम बिहार आगमन पर बिहार की बहनों ने एक-दूसरे को सिंदूर लगाकर नेतृत्व के प्रति आभार जताया और मोदी जी के ह्रदय से अभिनंदन के तैयार हैं. दुनिया ने देखा, जिसने बहनों के सिंदूर पर हाथ डाला, नए भारत ने उसका हिसाब चुकता कर दिया. ये है नया भारत — ना भूलता है, ना छोड़ता है.

तो क्या ये सिंदूर के बहाने राजनीतिक कैंपेन नहीं है? चलिए कुछ लोग कहेंगे कि नहीं इसमें सिंदूर बांटा नहीं जा रहा है, लगाया जा रहा है. ठीक है तो फिर ये क्या है?

बिहार बीजेपी ने अपने सोशल मीडिया पर एक वीडियो पोस्ट किया है- एक मिनट 13 सेकेंड के वीडियो में कभी सिंदूर लगाती महिलाओं को दिखाया गया कभी फाइटर प्लेन, आर्मी के जवान और पीएम मोदी का लार्जर दैन लाइफ वाला कट आउट. क्यों?

बिहार में इसी साल विधानसभा चुनाव होने है. सवाल ये है कि ऑपरेशन सिंदूर सेना के साहस की कहानी है फिर इसपर कोई राजनीतिक दल कैसे वोट मांग सकता है?

सरकार और विपक्ष के बीच आरोप-प्रत्यारोप

गृह मंत्री अमित शाह ने कोलकता में एक रैली को संबोधित करते हुए सार्वजनिक रूप से मुसलमानों और ममता बनर्जी पर निशाना साधा और उन पर ऑपरेशन सिंदूर का अनादर करने का आरोप लगाया.

"मुस्लिम वोट बैंक को खुश करने के लिए ममता दीदी आपने ऑपरेशन सिंदूर का भी विरोध किया विरोध... मैं बंगाल की मातृशक्ति को भी अपील करने आया हूं आने वाले चुनाव में ऑपरेशन सिंदूर पर सवाल उठाने वाली ममता दी को सिंदूर की कीमत बंगाल की माताएं बहने जरा समझा दे सिंदूर का अपमान करने का क्या मतलब होता है."
गृह मंत्री अमित शाह

क्या सच में ममता बनर्जी ने ऑपरेशन सिंदूर का विरोध किया है? क्या भारत का मुसलमान ऑपरेशन सिंदूर से दुखी है?

अमित शाह कह रहे हैं कि ममता बनर्जी ऑपरेशन सिंदूर का विरोध कर रही हैं फिर सवाल ये है कि ऑपरेशन सिंदूर और पाकिस्तान समर्थित आतंकवाद के खिलाफ भारत का रुख दुनिया को बताने गए डेलिगेशन में ममता बनर्जी की पार्टी तृणमूल कांग्रेस के सांसद अभिषेक बनर्जी क्यों हैं?

कमाल है न विदेश में ममता बनर्जी के भतीजे को ऑपरेशन सिंदूर की कामयाबी की कहानी सुनाने भेजा जाता है और बंगाल में उसी ममता बनर्जी को ऑपरेशन सिंदूर का विरोधी बताया जाता है. और वोट मांगा जाता है.

गृह मंत्री अमित शाह बंगाल में वोट मांगने के लिए मुसलमानों को भी निशाना बना रहे हैं. तो सवाल ये भी है कि भारत का कौन सा मुसलमान ऑपरेशन सिंदूर के खिलाफ था? ऑपरेशन सिंदूर या आतंकियों से लड़ते हुए शहीद होने वाले हिमाचल के दिलावर खान, BSF के सब इंस्पेक्टर मोहम्मद इम्तियाज या फिर बंगाल के झंटू अली शेख कौन हैं?

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चुनावी लाभ बनाम राष्ट्रीय सुरक्षा

ऑपरेशन सिंदूर के बीच पीएम मोदी हरियाणा से लेकर राजस्थान, गुजरात, बिहार, सिक्किम, पश्चिम बंगाल, उत्तर प्रदेश, मध्य प्रदेश जैसे राज्यों का दौरा किया है, हर भाषणों में ऑपरेशन सिंदूर का जिक्र है, निशाने पर विपक्ष है. बिहार और पश्चिम बंगाल में कुछ वक्त में चुनाव होने हैं.

29 मई को पीएम मोदी बिहार की दो दिवसीय यात्रा पर आए थे. शहर में ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर गेट बनाए गए, आर्मी से जुड़े कट आउट लगे, पीएम मोदी के पोस्टर सजे.

ट्रेन के ऑनलाइन टिकट पर ऑपरेशन-सिंदूर का प्रचार है, साथ में पीएम मोदी की फोटो.. जैसे कोविड के दौरान वैक्सीन के सर्टिफिकेट पर होता था..

भारतीय रेलवे का कहना है कि ‘ऑपरेशन सिंदूर’ की सफलता को सम्मान देने और वीर सैनिकों के शौर्य और बलिदान को श्रद्धांजलि देने के लिए ट्रेनों के टिकट पर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तस्वीर छापी है.

ऑपरेशन सिंदूर से जुड़ी जानकारी देने वाली कर्नल सोफिया कुरैशी के परिवार को 26 मई को वडोदरा में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के रोड शो के लिए कलेक्टर ऑफिस से बुलाया गया था. तब पीएम मोदी ने एयरपोर्ट से एयरफोर्स गेट तक करीब एक किलोमीटर लंबा रोड शो किया था. इस रोड शो को सिंदूर सम्मान यात्रा नाम दिया गया.

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भले ही बीजेपी ऑपरेशन सिंदूर के सहारे वोट मांग रहे हों लेकिन उनके सहयोगी नीतीश कुमार की राय अलग रही है. यही वजह है कि अक्टूबर 2016 में जनता दल (यूनाइटेड) की राष्ट्रीय परिषद को संबोधित करते हुए बिहार के मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने सर्जिकल स्ट्राइक का ‘राजनीतिकरण’ करने के लिए भारतीय जनता पार्टी की आलोचना की थी.

तब नीतीश कुमार ने राजगीर में कहा था 'राष्ट्रीय सुरक्षा के मुद्दे पर केंद्र और भारतीय सेना के साथ हम खड़े हैं. लेकिन अगर घरेलू राजनीति में इसका कोई इस्तेमाल होगा तो उसका हम समर्थन नहीं करते.'

यहां एक बात समझ लीजिए, ऑपरेशन सिंदूर के नाम पर वोट मांगने, क्रेडिट लेने और शौर्य गाथा लिखवाने से पहले पहलगाम हमले में मारे गए 26 परिवार को भी याद करना चाहिए. क्रेडिट लेना है तो फेलियर की भी जिम्मेदारी तय होनी चाहिए. पहलगाम हमला हुआ ही क्यों? पहलगाम हमले के आतंकी कौन थे, क्या उन्हें पकड़ लिया गया? ऑपरेशन सिंदूर के बीच पूंछ, रजौरी, ऊरी और जम्मू में पाकिस्तानी हमले में मारे गए करीब 18 लोगों को भी याद रखना चाहिए. उन परिवारों को क्या कहेंगे जिन्होंने अपनों को खोया है? 

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