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ओडिशा: 5 महीने में तीन मॉब लिंचिंग, BJP राज में कैसे और क्यों बढ़ रही 'हिंसा'?

ओडिशा में 2019-2024 के बीच मवेशियों की तस्करी के 2400 मामले दर्ज किए गए. 60% से ज्यादा मामलों में हिंसा की रिपोर्ट.

मोहन कुमार
न्यूज
Published:
<div class="paragraphs"><p>साल 2026 की शुरुआत में शेख मकंदर की लिंचिंग ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए गए हैं. प्रदेश में पिछले 5 महीनों में ये लिंचिंग की सबसे ताजा और तीसरी घटना है.</p></div>
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साल 2026 की शुरुआत में शेख मकंदर की लिंचिंग ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए गए हैं. प्रदेश में पिछले 5 महीनों में ये लिंचिंग की सबसे ताजा और तीसरी घटना है.

(फोटो: कामरान अख्तर/ द क्विंट)

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(सांप्रदायिक नफरत को सामने लाना द क्विंट की रिपोर्टिंग का एक अहम हिस्सा है. इसके लिए हिम्मत और एडिटोरियल आजादी चाहिए. मेंबर बनें और ऐसी रिपोर्टिंग में हमारी मदद करें.)

(इस रिपोर्ट में हिंसा का जिक्र है. पाठक अपने विवेक का इस्तेमाल करें.)

ओडिशा पिछले कुछ महीनों से लगातार सुर्खियों में है. बीजेपी शासित इस राज्य से लगातार मॉब लिंचिंग और हेट क्राइम की खबरें सामने आ रही हैं. इसके चलते प्रदेश की कानून-व्यवस्था और अल्पसंख्यकों के अधिकारों की सुरक्षा को लेकर सवाल खड़े हुए हैं. कहीं गौ-तस्करी के आरोप में एक मुस्लिम शख्स की पीट-पीटकर हत्या कर दी गई, तो कहीं कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी बताकर मौत के घाट उतार दिया गया.

द क्विंट ने ओडिशा में पिछले कुछ महीनों में हुई लिंचिंग की घटनाओं की पड़ताल की है और यह समझने की कोशिश की है कि हिंसा कैसे और क्यों बढ़ रही है? और इन घटनाओं के पीछे कौन लोग शामिल हैं?

घटना 1: संबलपुर में मुस्लिम शख्स की लिंचिंग

26 वर्षीय मनोरी बीबी के लिए 14 जनवरी की सुबह किसी बुरे सपने से कम नहीं है. उस दिन को याद कर उनकी आंखें भर आती हैं. परिवार के लोग आज भी सदमे में हैं. ओडिशा के बालासोर जिले में 35 वर्षीय शेख मकंदर मोहम्मद की कथित तौर पर गौतस्करी के शक में लोगों ने पीट-पीटकर हत्या कर दी थी. शेख मकंदर राज मिस्त्री का काम करते थे. उनकी मजदूरी से घर चलता था.

द क्विंट से बातचीत में मनोरी बीबी बताती हैं, "सुबह साढ़े 6 बजे बस्ती से फोन आया था. तभी मुझे पता चला कि उनके (मकंदर) साथ मारपीट हुई और वे हॉस्पिटल में भर्ती हैं. इसके बाद हम हॉस्पिटल गए. जहां उनकी हालत बहुत गंभीर थी."

साल 2026 की शुरुआत में शेख मकंदर की लिंचिंग ने प्रदेश की कानून व्यवस्था पर सवाल खड़े किए गए हैं. प्रदेश में पिछले 5 महीनों में ये लिंचिंग की सबसे ताजा और तीसरी घटना है.

मकंदर के परिवार ने बजरंग दल के कार्यकर्ताओं पर मारपीट का आरोप लगाया है.

"मुझे बताया गया कि भईया अस्पताल में भर्ती हैं. जब मैं अस्पताल पहुंचा, तो उनकी हालत बेहद गंभीर थी. मैंने उनसे बात करने की कोशिश की, तो उन्होंने चार-पांच लोगों के नाम बताए. इसके बाद उनकी मौत हो गई."
शेख जितेंद्र मोहम्मद, मृतक के छोटे भाई

इस मामले में बालासोर के सदर थाने में बीएनएस की धारा 103(2) (मॉब लिंचिंग) के तहत मामला दर्ज किया था. पुलिस ने 6 लोगों को गिरफ्तार किया है.

आरोपियों के किसी संगठन से जुड़े होने के सवाल पर एसपी प्रत्युष दिवाकर ने कहा था, "अभी ऐसा कुछ कहा नहीं जा सकता है. आगे की जांच के बाद ही ये स्पष्ट हो पाएगा कि मारपीट का क्या कारण था और क्या आरोपी किसी संगठन से जुड़े हैं."

वायरल वीडियो का स्क्रीनशॉट और FIR की कॉपी

(द क्विंट द्वारा प्राप्त)

ओडिशा विश्व हिंदू परिषद (वीएचपी) के महासचिव पंडित महेश साहू कहते हैं, “कुछ लोगों की आदत बन गई है कि कहीं भी मारपीट होती है तो वे कहते हैं कि यह बजरंग दल वालों ने किया है. यह उनका अभ्यास बन गया है. लेकिन देखिए, जब समाज में आम आदमी जागरूक होगा तो उसे कौन रोकेगा? जो घटना हो रही है, उसके पीछे के कारणों को भी देखना चाहिए.”

पीटते रहे और जय श्रीराम के नारे लगवाते रहे

इस घटना का एक वीडियो भी वायरल है. जिसमें कुछ लोग मकंदर के साथ मारपीट करते दिख रहे हैं. वीडियो में आरोपियों को, मकंदर से जबरन 'जय श्रीराम' और 'गाय मेरी मां है' बोलने के लिए कहते हुए सुना जा सकता है. आरोपियों के कहने पर मकंदर 'जय श्रीराम' और 'गाय मेरी मां है' के नारे लगाते हैं. इसके बावजूद उनकी पिटाई होती रहती है.

"कानून है किस लिए है? ऐसे कानून को अपने हाथ में लेना ठीक नहीं है. पीट-पीटकर जान ले लेना क्या कोई न्याय है?"
शेख जितेंद्र मोहम्मद, मृतक के छोटे भाई

मकंदर अपने पीछे पत्नी और तीन मासूम बच्चों को छोड़ गए हैं, जिनमें सबसे छोटी बेटी अभी सिर्फ दो महीने की है. मंकदर के पिता पैरालाइज्ड हैं. परिवार गरीबी और कर्ज के तले दबा है.

द हिंदू की रिपोर्ट के मुताबिक, ओडिशा पुलिस की क्राइम ब्रांच के अनुसार, साल 2025 के मध्य से अब तक ओडिशा में हर महीने गाय से जुड़े अवरोध और हिंसा की औसतन 20 घटनाएं दर्ज की गई हैं.

घटना 2: अवैध बांग्लादेशी का आरोप, प्रवासी मजदूर की हत्या

इससे पहले संबलपुर में क्रिसमस की पूर्व संध्या पर पश्चिम बंगाल के तीन मजदूरों के साथ कथित तौर पर अवैध बांग्लादेशी इमिग्रेंट बताकर कुछ लोगों ने मारपीट की थी. इस घटना में एक मजदूर की मौत हो गई थी. मृतक की पहचान 20 वर्षीय जुएल शेख के रूप में हुई थी. वहीं दो अन्य घायलों की पहचान सनवर हुसैन और अकौर के रूप में हुई थी. यह घटना ऐंथापल्ली थाना क्षेत्र के दानिपाली इलाके की है.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, मृतक पश्चिम बंगाल के मुर्शिदाबाद जिले के बहादुरपुर गांव का रहने वाला था. घटना से सिर्फ पांच दिन पहले ही वह रोजगार के सिलसिले में ओडिशा आया था.

इस मामले में पीड़ितों के साथ ही काम करने वाले सद्दाम हुसैन ने पुलिस को शिकायत दी थी. द क्विंट से बातचीत में सद्दाम बताते हैं कि उन्हें सनवर हुसैन ने घटना के बारे में बताया था.

क्या बांग्लादेशी बताकर मारपीट हुई थी? इस पर सद्दाम कहते हैं, "ऐसी बात तो हुई थी."

बकौल सनवर हुसैन, 24 दिसंबर की घटना को याद करते हुए वे आगे बताते हैं, "आरोपियों ने इन तीनों (जुयेल शेख, सनवर हुसैन और अकौर) से बीड़ी मांगी थी. बीड़ी मांगने के बाद उन्होंने आधार कार्ड दिखाने के लिए कहा. आधार कार्ड लाने के लिए एक आदमी रूम में गया. इसी बीच उन लोगों ने मारपीट शुरू कर दी."

मौके पर मौजूद अन्य मजदूर, तीनों घायलों को लेकर अस्पताल गए, जहां डॉक्टरों ने जुएल शेख को मृत घोषित कर दिया.

जुएल शेख मौत मामले में पुलिस को दी गई लिखित शिकायत की कॉपी

(द क्विंट द्वारा प्राप्त)

जुएल शेख की मौत मामले में पुलिस ने हत्या (103(1)), हत्या का प्रयास (109(1)) सहित बीएनएस की अन्य धाराओं में केस दर्ज कर 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया था.

समाचार एजेंसी पीटीआई की रिपोर्ट के मुताबिक, पुलिस ने दावा किया था कि घटना बीड़ी को लेकर हुए विवाद के कारण हुई थी. द न्यू इंडियन एक्सप्रेस ने पुलिस महानिरीक्षक (आईजी) हिमांशु लाल के हवाले से बताया था कि शेख की हत्या ‘अचानक उकसावे’ से जुड़ी थी और यह ‘किसी को निशाना बनाने’ की घटना नहीं थी.

पुलिस की जांच में और क्या कुछ सामने आया है और केस में क्या अपडेट है? ये जानने के लिए द क्विंट ने संबलपुर पुलिस से संपर्क किया है. जवाब आने पर रिपोर्ट को अपडेट किया जाएगा.

"बांग्ला बोलने की वजह से टारगेट करते हैं" 

इस घटना के बाद प्रवासी मजदूरों में डर का माहौल है. 7 मजदूर भागकर मुर्शिदाबाद लौट आए हैं. सद्दाम भी उनमें से एक हैं. वे कहते हैं, "ओडिशा के लोग यहां आते हैं, लेकिन हम कुछ नहीं कहते. लेकिन जब हम वहां जाते हैं तो हमारे साथ अत्याचार होता है. इसी वजह से हमारे घरवाले नहीं चाहते कि हम वहां जाएं."

वे आगे कहते हैं,

"पहले इस तरह की घटना नहीं होती थी. अभी बीजेपी सरकार के आने से इस तरह की चीजें हो रही हैं. हम लोग बांग्ला बोलते हैं, इस वजह से हमें बांग्लादेशी समझा जाता है. बांग्ला बोलने की वजह से ही हमें टारगेट किया जाता है."

सद्दाम बताते हैं कि घर तो लौट आए हैं, लेकिन रोजगार की दिक्कत है. ओडिशा में काम का सही रेट मिल जाता था, लेकिन यहां पर ऐसा नहीं है.

कॉन्ट्रैक्टर हक साहेब कहते हैं कि इस घटना के बाद से कोई भी मजदूर ओडिशा जाने के लिए तैयार नहीं है. "मारपीट के डर से कोई भी मजदूर संबलपुर नहीं जाना चाहता है," वे आगे कहते हैं.

रिपोर्ट्स के मुताबिक, संबलपुर की घटना के दो दिन बाद भद्रक में भी पश्चिम बंगाल के रहने वाले 35 वर्षीय वेंडर से मारपीट का मामला सामने आया था. मारपीट करने वालों ने अवैध बांग्लादेशी प्रवासी होने का आरोप लगाया था.

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घटना 3: गौहत्या का आरोप, दलित की पीट-पीटकर हत्या

देवगढ़ जिले के कंसर गांव की 30 वर्षीय मानसी रोज की तरह अपने घर के कामकाज में लगी थी. उस दिन उनके 35 वर्षीय पति किशोर चमार सबरे ही घर से निकल गए थे. सुबह 11 बजे मानसी ने जब अपने पति को कॉल किया तो किसी ने फोन रिसीव किया, लेकिन उनकी बात नहीं हुई. इसके बाद उन्होंने कई बार कॉल लगाया. बाद में फोन ऑफ हो गया.

ये बात 3 सितंबर, 2025 की है. मानसी के पति किशोर चमार और उनके दोस्त गौतम नाइक के साथ कुछ लोगों ने गोहत्या का आरोप लगाते हुए मारपीट की थी. जिसमें किशोर की मौत हो गई थी. घटना रियामल थाना क्षेत्र के कुंदेइजुरी गांव की है.

द क्विंट से बातचीत में मानसी बताती हैं, "मैं लगातार फोन करती रही. लेकिन फोन बार-बार ऑफ बता रहा था. थोड़ी देर बाद मुझे एक कॉल आया कि मेरे पति के साथ मारपीट हुई है. जब मैं अपने देवर के साथ मौके पर पहुंची, तब तक उनकी मौत हो चुकी थी."

मानसी बताती हैं, "हमने अपनी एक गाय कुंदेइजुरी के रहने वाले गौतम नाइक को रखने के लिए दी थी. किसी कारण से गाय की मौत हो गई. मेरे पति मरी हुई गाय का चमड़ा निकालने के लिए गए थे. इस दौरान कुछ लोगों ने दोनों को पकड़ लिया और मारपीट की. जिसमें मेरे पति की मौत हो गई. बाद में पुलिस ने गौतम को अस्पताल में भर्ती करवाया."

किशोर चमार (बायें), लिखित शिकायत की कॉपी (दाएं)

(द क्विंट द्वारा प्राप्त)

इस मामले में पुलिस ने 6 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. द क्विंट से बातचीत में देवगढ़ एसपी अनिल मिश्रा ने कहा, "आरोपी किसी संगठन से नहीं हैं. वे उसी गांव के थे. उनको सूचना मिली थी कि गाय काटी जा रही है. जिसके बाद उन्होंने मारपीट की थी."

इसके साथ ही उन्होंने बताया कि मामले में FIR के दर्ज होने के 90 दिन के अंदर ही चार्जशीट दाखिल कर दी गई थी. ट्रायल जल्द शुरू होगी.

पंडित महेश साहू कहते हैं, "हमारा बजरंग दल और वीएचपी के कार्यकर्ताओं पर कंट्रोल है. लेकिन समाज में बहुत से लोग ऐसे हैं जो हमारे कार्यकर्ता नहीं हैं, फिर भी गौ-रक्षा का काम करते हैं और धर्मांतरण रोकते हैं. उन पर हमारा कोई कंट्रोल नहीं है."

किशोर की मौत के बाद से तीन बच्चों और घर की जिम्मेदारी मानसी के कंधों पर आ गई है. वे कहती हैं, "हमें अब तक सरकार से कोई मदद नहीं मिली है. मेरे बच्चों की पढ़ाई छूट गई है. मेरे ऊपर 70-80 हजार का कर्ज है. समझ नहीं आता कैसे बच्चों को पालूं और कर्ज चुकाऊं."

हिंदुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, क्रिमिनल इन्वेस्टिगेशन डिपार्टमेंट के एक अधिकारी ने बताया कि 2019 में मवेशियों की तस्करी के 139 मामले, 2020 में 267, 2021 में 371, 2022 में 386, 2023 में 620 और 2024 में 630 मामले दर्ज किए गए. 60% से ज्यादा मामलों में हिंसा की रिपोर्ट मिली.

"हम सिर्फ गौसेवा करते हैं"

टीम राधा माधव दास ओडिशा में गायों की सेवा का दावा करती है. द क्विंट से बातचीत में टीम के मुखिया राधा माधव दास कहते हैं, "हमारा ग्रुप, गौसेवकों की एक टीम है. हम तस्करी करने वालों के पीछे नहीं जाते. हम एक्सीडेंट में घायल और पुलिस द्वारा तस्करों के चंगुल से छुड़ाए गए गौवंशों की अपनी गौशाला में सेवा करते हैं. और जहां हिंदू विरोधी काम दिखता है तो उसे रिपोर्ट करते हैं."

एक महीने पहले राधा माधव दास का एक वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हुआ था, जिसमें वो फेरीवालों को सांता क्लॉज की ड्रेस बेचने से मना कर रहे थे. ये वीडियो जगन्नाथ पुरी मंदिर के पास का बताया जा रहा था.

वायरल वीडियो के बारे में वे कहते हैं, "मैंने उन लोगों से बस यही कहा थी कि अगर बेचना है तो भगवान जगन्नाथ की चीजें बेचो. क्या आपने किसी को चर्च या मस्जिद के पास जकर भगवान जगन्नाथ की चीजें बेचते देखा है. फिर मंदिर के सामने दूसरे धर्म की चीजें ये लोग क्यों बेचेंगे?"

इसके साथ ही वे कहते हैं,

"इन लोगों के पास कोई पहचान पत्र नहीं है. कहीं से आकर बैठते हैं और दिन-रात क्राइम करते हैं. बच्चा चोरी से लेकर गाड़ी चोरी तक में ये लोग शामिल रहते हैं. इस वजह से हम लोग विरोध करते हैं."

टीम आरएमडी के 17 हजार सदस्य हैं. माधव दास दावा करते हैं कि उनकी टीम 5000 से ज्यादा गायों की सेवा में जुटी है.

"हिंदुस्तान में हिंदू होना पाप है क्या?"

लिंचिंग की घटनाओं पर आरएमडी के सदस्य प्रशांत कहते हैं, “दूसरे धर्म के लोग तो यह कहेंगे ही कि उनके लोगों को पीटकर मार डाला गया. लेकिन छह महीने पहले जो हमारे हिंदू भाई की हत्या हुई थी, उसे लेकर तो कोई कुछ नहीं बोल रहा है.”

"अगर मुसलमानों की हत्या गलत है, तो हिंदू भाई की हत्या भी गलत है. ताली एक हाथ से नहीं बजती," वे आगे कहते हैं.

कथित तौर पर मवेशी तस्करों के हमले में घायल एक गौ-रक्षक की जून 2025 में मौत हो गई. हमले के बाद वह 13 दिनों तक अस्पताल में भर्ती रहा. इस घटना के बाद भद्रक में तनाव की स्थिति को देखते हुए 24 घंटे के लिए इंटरनेट बंद करना पड़ा था.

पुलिस ने इस मामले में 12 आरोपियों को गिरफ्तार किया था. मुख्यमंत्री मोहन चरण माझी ने मृतक के परिवार को ₹10 लाख का मुआवजा और परिवार के किसी एक सदस्य को नौकरी देने की घोषणा भी की थी.

मृतक की पहचान 45 वर्षीय संतोष परिदा के रूप में हुई थी, जो कसती गांव के रहने वाले थे.

पंडित महेश साहू कहते हैं, "भद्रक मामले की चर्चा क्यों नहीं हुई? क्योंकि वो हिंदू है. मतलब, हिंदुस्तान में हिंदू होना पाप है क्या? गौमाता की रक्षा करना, धर्मांतरण को रोकना- पाप है क्या?

"बहुसंख्यकों का शासन, कानून का नहीं"

मानवाधिकार एक्टिविस्टों ने इस तरह के मामलों और हेट क्राइम पर गंभीर चिंता जताई है. मानवाधिकार एक्टिविस्ट विश्वप्रिया कानूनगो कहते हैं, "हमारा सेक्युलर ढांचा कमजोर होता जा रहा है. माइनॉरिटी के प्रति नफरत की थ्योरी और इनटॉलेरेंस दिन-ब-दिन बढ़ती जा रही है."

"हम इसे कानून का शासन नहीं, बल्कि बहुसंख्यकवाद का शासन कह सकते हैं. इसलिए यह कानून के शासन का उल्लंघन है. यह संविधान के ढांचे का उल्लंघन है, यह संविधान की मूल संरचना का उल्लंघन है."

"हेट क्राइम में अन्य राज्यों से प्रतिस्पर्धा में ओडिशा"

लिंचिंग और हेट क्राइम के मामलों को लेकर विपक्ष राज्य की बीजेपी सरकार पर हमलावर है. द क्विंट से बातचीत में ओडिशा कांग्रेस के मीडिया उपाध्यक्ष अमिय पांडव कहते हैं, "ये काम पूरी तरह से सोच-समझकर करवाया जा रहा है."

“ओडिशा में पहले लिंचिंग की घटनाएं नहीं होती थीं. लेकिन अब हमें कई ऐसी घटनाएं देखने को मिल रही हैं. ओडिशा की पहचान एक शांतिप्रिय राज्य के रूप में थी, लेकिन अब यह हेट क्राइम के मामलों में हिंदी बेल्ट के अन्य राज्यों से प्रतिस्पर्धा करता नजर आ रहा है,” वे आगे कहते है.

ओडिशा में पिछले साल से अब तक हेट क्राइम के कई मामले सामने आए हैं. हाल ही में पादरी के साथ मारपीट का वीडियो वायरल हुआ. रिपोर्ट्स के मुताबिक, यह घटना 4 जनवरी को ढेंकानाल जिले के पारजंग गांव की है. इससे पहले एक मुस्लिम युवक से मारपीट का भी वीडियो भी वायरल हुआ था.

बीजेपी ने लिंचिंग की खबरों को झूठा खबर बताया है. पार्टी प्रवक्ता अनिल बिस्वाल ने कहा, "कोई लिंचिंग की घटना नहीं है. अलग-अलग मीडिया में जो बातें आती हैं, ऐसा कुछ नहीं है. ये सिर्फ एक आपराधिक घटना है."

कांग्रेस के आरोपों पर जवाब देते हुए बिस्वाल ने कहा, “कांग्रेस की राजनीति का स्वभाव ही ऐसा है कि वह बहुसंख्यक आबादी को दोषी ठहराने की कोशिश करती है. यह उनकी मुस्लिम तुष्टिकरण की राजनीति है, जिसका वे अपने फायदे के लिए इस्तेमाल करते हैं.”

बालासोर की घटना के बाद मवेशी तस्करी के खिलाफ केओंझर पुलिस ने 4 जिलों में 40 से ज्यादा जगहों पर छापेमारी कर 1.40 करोड़ रुपये नकद और बड़ी मात्रा में सोने के जेवर जब्त किए. यह कार्रवाई दैतारी थाने में दर्ज शिकायत के बाद केओंझर, मयूरभंज, भद्रक और जाजपुर जिले में की गई.

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