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FACT CHECK: जिन्होंने नहीं पढ़ी बायोलॉजी वो भी बन सकते हैं डॉक्टर? भ्रामक है दावा

Fact Check: नेशनल मेडिकल काउंसिल की नई गाइडलाइन के मुताबिक, बॉयोलॉजी अभी भी अनिवार्य है. इसे एडिशनल सब्जेक्ट के तौर पर पढ़ा जा सकता है.

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कई यूजर्स ने सोशल मीडिया पर दावा किया है कि जिन छात्रों के 12वीं कक्षा के पाठ्यक्रम में जीवविज्ञान (बायोलॉजी) विषय नहीं है, वो भी डॉक्टर बन सकते हैं.

  • पोस्ट में नई शिक्षा नीति से जुड़ी गाइडलाइन का हवाला देते हुए कहा गया है कि इसमें छात्रों को इस विषय के अध्ययन के बिना भी नेशनल एलिजिबिलिटी कम एंट्रेस टेस्ट (NEET) में बैठने की अनुमति दी गई है.

  • इसके लिए नेशनल मेडिकल कमीशन (NMC) की गाइडलाइन का हवाला दिया गया है.

(ऐसे और भी पोस्ट के आर्काइव आप यहां, यहां और यहां देख सकते हैं.)

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सच क्या है?: ये दावा भ्रामक है.

  • NMC ने 22 नवंबर को नई गाइडलाइन जारी की है. इसके मुताबिक, 11वीं और 12वीं में फिजिक्स, केमिस्ट्री और मैथ वाले छात्रों को NEET में बैठने की अनुमति दी गई है.

  • हालांकि, जिन छात्रों के पास फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी/बायोटेक्नोलॉजी नहीं थी, वो NEET में बैठने के लिए सरकार की तरफ से मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं कक्षा पास होने के बाद इन्हें ''एडिशनल सब्जेक्ट' के तौर पर ले सकते हैं.

हमने सच का पता कैसे लगाया?: हमें NMC की वेबसाइट पर 22 नवंबर को शेयर किया गया एक नोटिस मिला.

  • इस नोटिस में 9 बिंदुओं में सूचना दी गई थी. इसमें NMC ने नई गाइडलाइन से जुड़ी जानकारी दी थी.

क्या है इस नोटिस में?: NMC ने नई शिक्षा नीति को ध्यान में रखा है और फैसला किया है कि इंग्लिश के साथ बायोलॉजी/बायोटेक्नोलॉजी, फिजिक्स और केमिस्ट्री जैसे विषयों से किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से 12वीं पास की जाती है, तो इन्हें ''एडिशनल सब्जेक्ट'' के तौर पर लिया जा सकता है.

  • ऐसे छात्रों को NEET-UG परीक्षा देने की अनुमति दी जाएगी.

  • नई शिक्षा नीति में 12वीं कक्षा में अलग-अलग विषयों की पढ़ाई को लेकर दिए गए लचीलेपन को देखते हुए ये निर्णय लिया गया है.

नई शिक्षा नीति क्या कहती है?: नई नीति में छात्रों को विशेष रूप से 11वीं और 12वीं कक्षा में विषयों के चयन को लेकर छूट दी गई है.

  • पहले की नीति में था कि जिस स्टूडेंट ने एक स्ट्रीम में पढ़ाई जारी रखी है, वो किसी दूसरी स्ट्रीम के सब्जेक्ट नहीं पढ़ सकते है. जैसे आर्ट वाला छात्र सिर्फ साइंस से जुड़े सब्जेक्ट नहीं पढ़ सकता है. और ऐसा ही साइंस, ह्यूमैनिटीज या अलग-अलग व्यावसायिक या शैक्षणिक स्ट्रीम पर भी लागू होता था. मतलब ये कि किसी एक स्ट्रीम का छात्र दूसरी स्ट्रीम के सब्जेक्ट नहीं पढ़ पाता था.

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  • लेकिन अब ऐसा नहीं है. अब छात्र इन अलग-अलग स्ट्रीम के सब्जेक्ट को एक साथ पढ़ सकते हैं. यानी अलग-अलग स्ट्रीम के सब्जेक्ट का कॉम्बिनेशन बनाकर पढ़ाई की जा सकती है.

दिल्ली के गैस्ट्रोएंटेरोलॉजिस्ट डॉ. अश्विनी सत्या ने क्विंट को बताया कि उनकी समझ के मुताबिक, कोई छात्र जिसने हायर सेकेंडरी या समकक्ष परीक्षा पास की है, लेकिन उसके पास NEET परीक्षा में हिस्सा लेने के लिए जरूरी सब्जेक्ट बायोलॉजी नहीं है. तो भी वो अगर किसी मान्यता प्राप्त बोर्ड से एडिशनल सब्जेक्ट के तौर पर बायोलॉजी की परीक्षा पास कर लेता है, तो ऐसे में वो NEET परीक्षा में भाग ले सकता है.
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क्या थीं पुरानी गाइडलाइन?: नोटिस में ये भी बताया गया है कि पहले की गाइडलाइन के मुताबिक, NEET में हिस्सा लेने वाले छात्रों को 11वीं और 12वीं में इंग्लिश के साथ-साथ अनिवार्य रूप से फिजिक्स, केमिस्ट्री और बायोलॉजी या बायोटेक्नोलॉजी जैसे सब्जेक्ट लेने जरूरी होते थे.

  • साथ ही, इनकी पढ़ाई नियमित स्कूलों से करनी होती थी, न कि किसी ओपन स्कूल से या फिर प्राइवेट कैंडिडेट के तौर पर.

हमें यही जानकारी Mint और India Today की रिपोर्ट्स में भी मिली.

निष्कर्ष: डॉक्टर बनने के लिए अभी भी बायोलॉजी की परीक्षा अनिवार्य है. हालांकि, उम्मीदवार 11वीं और 12वीं में इस विषय को नहीं पढ़ते हैं तो सरकार द्वारा मान्यता प्राप्त किसी भी बोर्ड से संबंद्ध स्कूल से पास होने के बाद इसे एडिशनल सब्जेक्ट के तौर पर ले सकते हैं.

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(अगर आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी आती है, जिसके सच होने पर आपको शक है, तो पड़ताल के लिए हमारे वॉट्सऐप नंबर  9540511818 या फिर मेल आइडी webqoof@thequint.com पर भेजें. सच हम आपको बताएंगे. हमारी बाकी फैक्ट चेक स्टोरीज आप यहां पढ़ सकते हैं)

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