ADVERTISEMENTREMOVE AD

Dear India, कभी सोचा है, वो हमको क्यों लड़ाते हैं?

अभी लड़ रहे हो आपस मेंअपनों का खून बहा रहेन अंग्रेज रहे, न रहे मुगलतो किसके लिए धूल खा रहे

Published
story-hero-img
i
Aa
Aa
Small
Aa
Medium
Aa
Large

कभी सोचा है, जात के नाम पर वो हमको क्यों लड़ाते हैं?
कभी सोचा है तुमने, इससे हम क्या खोते, क्या पाते हैं?

कभी महारों ने मराठाओं को हराया था
कभी राजपूतों ने मुगलों को घुटने पे लाया था
कभी सिकंदर को पोरस ने घर का रास्ता दिखाया था
कभी सूरजमल दिल्ली का दरवाजा उखाड़ लाया था

ADVERTISEMENTREMOVE AD

कभी किसी की हार का कारण बना था कोई
कभी धोखे की काली स्याही ने किसी वंश को कलंक लगाया था
कभी हारकर भी जीत गया था कोई
कभी किसी ने अपनी जान की बाजी लगाकर किसी को बचाया था

कभी जीत गया था कोई
कभी किसी ने किसी को हराया था
लेकिन इन सब में
मैंने-तुमने क्या खोया, क्या पाया था?

कभी सोचा है, जात के नाम पर वो हमको क्यों लड़ाते हैं?
कभी सोचा है तुमने, इससे हम क्या खोते, क्या पाते हैं?

अभी लड़ रहे हो आपस में
अपनों का खून बहा रहे
न अंग्रेज रहे, न रहे मुगल
तो किसके लिए धूल खा रहे

न तब मिला था कुछ तुम्हें
न अब मिलने वाला है
आपस में यूं लड़ने से
किसका भला होने वाला है

धर्म से महान नहीं बनता कोई
अपने कर्म से विशाल बनता है
लड़ने से कम होगी ताकत
लेकिन जुड़ने से बल मिलता है

कभी सोचा है, जात के नाम पर वो हमको क्यों लड़ाते हैं?
कभी सोचा है तुमने, इससे हम क्या खोते, क्या पाते हैं?

अपनी राजनीति को चमकाने
यह नेता तुमको बहका रहे
अपने भविष्य के लिए
तुमको यह बरगला रहे

ADVERTISEMENTREMOVE AD

इस झगड़े में जली किसी की गाड़ी है
टूटे शीशे कितने घरों के, टूटी कितनी यारी है
किसके लिए उछाला था वह पत्थर
उस लाश पर आंसू बहा रही एक मौसी तुम्हारी है

इन नेताओं की बातों में मत आओ
फिर से धोखा खाओगे
जो एक हो जाओ सारे
तो अपनी ताकत बढ़ाओगे

कभी सोचा है जात के नाम पर वो हमको क्यों लड़ाते हैं?
कभी सोचा है तुमने, इससे हम क्या खोते, क्या पाते हैं?

न वह घर इनके हैं जो जल गए
न वह दुकान इनकी थी, जो लुट गई
न उजड़ा इनका सुहाग है
न हुए ये अनाथ हैं

अरबों की है संपत्ति इनकी
करोड़ों रुपया इनके पास है
आज भी गरीबी में पल रहे तुम
फिर भी इनसे आस है?

कभी सोचा है, जात के नाम पर वो हमको क्यों लड़ाते हैं?
कभी सोचा है तुमने, इससे हम क्या खोते, क्या पाते हैं?

अब भी वक्‍त है संभल जाओ
इनके बहकावे में मत आओ
हमारी एकता इनकी शामत है
एक-दूसरे का साथ ही हमारी ताकत है

डॉ. सुदीप डांगावास

ADVERTISEMENTREMOVE AD
Speaking truth to power requires allies like you.
Become a Member
Monthly
6-Monthly
Annual
Check Member Benefits
×
×