संभल जिले के चंदौसी स्थित मुख्य न्यायिक मजिस्ट्रेट की अदालत ने 2024 में हुई हिंसा के मामले में पूर्व सर्किल ऑफिसर अनुज चौधरी, पूर्व कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर समेत 12 पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश 9 जनवरी 2026 को दिया. यह आदेश यामीन नामक व्यक्ति की याचिका पर पारित हुआ, जिनके बेटे को हिंसा के दौरान गोली लगी थी. हिंसा 24 नवंबर 2024 को शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में हुई थी, जब मस्जिद के सर्वे के दौरान भीड़ और पुलिस के बीच झड़पें हुईं.
Hindustan Times के अनुसार, यामीन ने अदालत में याचिका दायर कर आरोप लगाया कि उनके 24 वर्षीय बेटे आलम को पुलिस ने गोली मारी थी, जब वह शाही जामा मस्जिद क्षेत्र में रस्क बेचने गया था. याचिका में तत्कालीन सीओ संभल अनुज चौधरी, कोतवाली प्रभारी अनुज तोमर और अन्य पुलिसकर्मियों को आरोपी बनाया गया.
The Hindu की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने दायर याचिका पर सुनवाई के बाद 9 जनवरी 2026 को सभी आरोपित पुलिसकर्मियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने का आदेश दिया. अदालत के आदेश की जानकारी 14 जनवरी 2026 को सार्वजनिक हुई.
इस रिपोर्ट में उल्लेख है, हिंसा की घटना जामा मस्जिद के सर्वे के दौरान हुई थी, जब बड़ी संख्या में लोग मस्जिद के बाहर एकत्र हो गए और पुलिस टीम पर कथित रूप से पथराव शुरू हो गया. पुलिस ने स्थिति को नियंत्रित करने के लिए बल प्रयोग किया, जिसमें गोलीबारी के आरोप भी लगे, हालांकि पुलिस ने इससे इनकार किया.
जैसा कि इस रिपोर्ट में उल्लेख है, इस हिंसा में पांच लोगों की मौत हुई और कई अन्य घायल हुए. पुलिस ने 79 लोगों को गिरफ्तार किया, जिनमें तीन महिलाएं भी शामिल थीं. कुल 12 एफआईआर संभल कोतवाली और नखासा थाने में दर्ज की गईं.
“मेरे मुवक्किल के बेटे को इलाज गुप्त रूप से कराना पड़ा ताकि पुलिस का दबाव न पड़े. हमने अदालत से सभी आरोपित अधिकारियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग की थी.”
मामले की जांच के लिए गठित विशेष जांच दल (SIT) ने 18 जून को 1,128 पृष्ठों की चार्जशीट अदालत में दाखिल की, जिसमें 23 लोगों को आरोपी बनाया गया. इस रिपोर्ट में उल्लिखित है कि चार्जशीट में समाजवादी पार्टी के सांसद जिया-उर-रहमान बरक का नाम भी शामिल है, वहीं विधायक इकबाल महमूद के बेटे सुहैल इकबाल का नाम नहीं है.
हिंसा की पृष्ठभूमि में जामा मस्जिद के सर्वे को लेकर विवाद था, जिसमें हिंदू पक्ष ने दावा किया था कि यह स्थल मूल रूप से हरिहर मंदिर था, जिसे 1529 में बाबर द्वारा मस्जिद में बदल दिया गया. इस रिपोर्ट ने हाइलाइट किया.
वर्तमान में अनुज चौधरी फिरोजाबाद में एएसपी (ग्रामीण) के पद पर तैनात हैं, जबकि तोमर चंदौसी कोतवाली के प्रभारी हैं. समाचार रिपोर्ट के मुताबिक हिंसा के बाद पुलिस ने कुल 40 नामजद और 2,750 अज्ञात लोगों के खिलाफ मामले दर्ज किए.
सुप्रीम कोर्ट ने फिलहाल संभल ट्रायल कोर्ट को मस्जिद सर्वे मामले में कार्यवाही रोकने का निर्देश दिया है. इस लेख में उल्लेख है.
Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.
