दिल्ली हाईकोर्ट ने 14 जनवरी 2026 को मौखिक टिप्पणी में कहा कि भले ही PM Cares Fund सरकार द्वारा संचालित हो, उसे सूचना का अधिकार (RTI) अधिनियम के तहत गोपनीयता का अधिकार प्राप्त है. अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि सार्वजनिक कार्य करने वाली संस्था होने के बावजूद, PM Cares Fund एक न्यायिक व्यक्तित्व है और उसे केवल सार्वजनिक प्राधिकरण होने के कारण गोपनीयता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता.
Scroll के अनुसार, मुख्य न्यायाधीश देवेंद्र कुमार उपाध्याय और न्यायमूर्ति तेजस करिया की पीठ ने RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j) का हवाला देते हुए कहा कि यह धारा तीसरे पक्ष की व्यक्तिगत जानकारी के प्रकटीकरण पर रोक लगाती है. अदालत ने यह भी कहा कि सार्वजनिक या निजी ट्रस्ट दोनों को समान गोपनीयता अधिकार प्राप्त हैं.
Live Law ने बताया, याचिकाकर्ता के वकील ने दलील दी कि PM Cares Fund को RTI अधिनियम की धारा 8(1)(j) के तहत छूट नहीं मिलनी चाहिए, क्योंकि यह एक सार्वजनिक चैरिटेबल ट्रस्ट है. अदालत ने मौखिक रूप से कहा कि "अगर कोई संस्था राज्य है, तो क्या वह केवल राज्य होने के कारण गोपनीयता का अधिकार खो देती है? ऐसा कैसे कहा जा सकता है?"
Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक, अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि RTI अधिनियम की धारा 11 के तहत तीसरे पक्ष को सूचना के प्रकटीकरण से पहले नोटिस देने और उनकी आपत्ति जानने का अधिकार है. अदालत ने कहा, "सार्वजनिक चरित्र वाली संस्था को भी तीसरे पक्ष के रूप में RTI के तहत गोपनीयता के अधिकार से वंचित नहीं किया जा सकता." अदालत ने यह भी जोड़ा कि "केवल इसलिए कि कोई संस्था सार्वजनिक कार्य करती है या सरकार द्वारा बनाई गई है, उसे तीसरे पक्ष के अधिकारों से वंचित नहीं किया जा सकता."
“केवल इसलिए कि कोई संस्था सार्वजनिक कार्य करती है, या सरकार द्वारा बनाई गई है, प्रबंधित, प्रशासित, पर्यवेक्षित और नियंत्रित है; फिर भी, वह एक संस्था है, एक कानूनी न्यायिक व्यक्तित्व है. ऐसे अधिकार (गोपनीयता का अधिकार) से उसे केवल सार्वजनिक प्राधिकरण होने के कारण वंचित नहीं किया जा सकता.”
इस रिपोर्ट में उल्लेख है, अदालत ने यह भी कहा कि RTI अधिनियम केवल वही जानकारी प्रदान करने की अनुमति देता है, जो संबंधित विभाग के पास उपलब्ध है. इस मामले में, आयकर विभाग वह प्राथमिक निकाय नहीं है, जिसके पास PM Cares Fund से संबंधित जानकारी है.
इस रिपोर्ट में उल्लिखित, याचिकाकर्ता ने PM Cares Fund को आयकर छूट देने से संबंधित सभी दस्तावेजों की मांग की थी, जिसमें आवेदन, फाइल नोटिंग्स, और अन्य संबंधित जानकारी शामिल थी. अदालत ने स्पष्ट किया कि आयकर अधिनियम की धारा 138, RTI अधिनियम की धारा 22 पर प्राथमिकता रखती है, जिससे आयकर विभाग को जानकारी साझा करने से छूट मिलती है.
इस रिपोर्ट ने हाइलाइट किया, अदालत ने यह भी कहा कि PM Cares Fund के सार्वजनिक या निजी होने से उसके गोपनीयता अधिकारों में कोई अंतर नहीं आता. अदालत ने यह भी कहा कि RTI अधिनियम के तहत केवल वही जानकारी दी जा सकती है, जो विभाग के पास है, और तीसरे पक्ष की जानकारी के प्रकटीकरण से पहले उचित प्रक्रिया अपनाई जानी चाहिए.
“यह तर्क कि केवल सार्वजनिक संस्था होने के कारण PM Cares Fund को गोपनीयता का अधिकार नहीं मिलना चाहिए, स्वीकार्य नहीं है.”
इस समाचार रिपोर्ट ने कहा, अदालत ने मामले की अगली सुनवाई 10 फरवरी को निर्धारित की है. याचिकाकर्ता की ओर से दलील दी गई कि PM Cares Fund को RTI अधिनियम के तहत छूट नहीं मिलनी चाहिए, जबकि सरकार ने पहले कहा था कि यह फंड निजी स्रोतों से धन प्राप्त करता है और RTI के दायरे में नहीं आता.
Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.
