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भारत में निपाह वायरस के दो मामले, WHO ने कहा- घबराने की जरूरत नहीं

भारत में निपाह वायरस के हालिया मामलों पर डब्ल्यूएचओ ने कम जोखिम की पुष्टि की है.

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जनवरी 2026 में भारत के पश्चिम बंगाल राज्य में निपाह वायरस के दो पुष्ट मामले सामने आए हैं, जिससे एशिया के कई देशों ने सतर्कता बढ़ा दी है. इन मामलों के बाद थाईलैंड, मलेशिया और सिंगापुर जैसे देशों ने हवाई अड्डों पर स्क्रीनिंग और जांच के उपाय लागू किए हैं. भारत सरकार के अनुसार, सभी संपर्कों की जांच की गई है और वे नकारात्मक पाए गए हैं. फिलहाल, वायरस के प्रसार का जोखिम कम आंका गया है.

The Indian Express के अनुसार, विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने स्पष्ट किया है कि भारत से निपाह वायरस के अंतरराष्ट्रीय स्तर पर फैलने का जोखिम कम है और यात्रा या व्यापार पर कोई प्रतिबंध लगाने की आवश्यकता नहीं है. डब्ल्यूएचओ ने यह भी कहा कि भारत में संक्रमण के मामलों की संख्या सीमित है और सभी संपर्कों की निगरानी की जा रही है.

Deccan Herald की रिपोर्ट के मुताबिक, डब्ल्यूएचओ ने दोहराया है कि भारत में निपाह वायरस के प्रसार की संभावना कम है और देश के पास ऐसे प्रकोपों को नियंत्रित करने की पर्याप्त क्षमता है. रिपोर्ट में यह भी बताया गया है कि वायरस मुख्य रूप से चमगादड़ों और सूअरों जैसे जानवरों से फैलता है, और मनुष्यों में संक्रमण के लिए निकट संपर्क आवश्यक होता है.

Hindustan Times ने बताया, डब्ल्यूएचओ के अनुसार निपाह वायरस के मामलों में मानव-से-मानव संचरण की संभावना बहुत कम है और आमतौर पर इसके लिए लंबा और निकट संपर्क आवश्यक होता है. दो मामले पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में सीमित हैं और मरीजों के लक्षण दिखने के दौरान कोई यात्रा नहीं हुई थी.

Siasat के एक लेख में उल्लेख है, निपाह वायरस एक जूनोटिक वायरस है, जो जानवरों से मनुष्यों में फैलता है. यह वायरस मुख्य रूप से संक्रमित चमगादड़ों के लार, मूत्र या मल के संपर्क में आने से फैलता है. इसके अलावा, संक्रमित जानवरों या उनके द्वारा दूषित खाद्य पदार्थों के सेवन से भी संक्रमण हो सकता है. मानव-से-मानव संचरण दुर्लभ है, लेकिन संभव है.

Deccan Herald ने एक लेख में कहा, निपाह वायरस के लक्षण संक्रमण के चार दिन से तीन सप्ताह के भीतर प्रकट हो सकते हैं. इसमें बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में कठिनाई, बेहोशी, मिर्गी के दौरे, और मस्तिष्क में सूजन (एन्सेफलाइटिस) शामिल हैं. गंभीर मामलों में मृत्यु दर 40% से 75% तक हो सकती है. कुछ मरीजों में वर्षों बाद भी मस्तिष्क संबंधी जटिलताएं दोबारा उभर सकती हैं.

“निपाह वायरस संक्रमण के गंभीर मामलों में लगभग आधे मरीजों की मृत्यु हो जाती है. मस्तिष्क पर असर के कारण मृत्यु दर इतनी अधिक है.”

इस रिपोर्ट में जिक्र है, वर्तमान में निपाह वायरस के लिए कोई स्वीकृत टीका या उपचार उपलब्ध नहीं है. ऑस्ट्रेलिया में m102.4 नामक एक उपचार का विकास चल रहा है, लेकिन यह अभी परीक्षण के चरण में है. फिलहाल, रोकथाम के लिए संक्रमित क्षेत्रों में सतर्कता और संक्रमित व्यक्तियों से दूरी बनाए रखना ही सबसे प्रभावी उपाय है.

इस रिपोर्ट ने हाइलाइट किया, भारत में निपाह वायरस के प्रकोप पहले भी हो चुके हैं, विशेषकर केरल और पश्चिम बंगाल में. यह सातवां प्रलेखित प्रकोप है और पश्चिम बंगाल में तीसरी बार सामने आया है. 2001 और 2007 में भी सीमावर्ती जिलों में मामले दर्ज किए गए थे.

जैसा कि इस रिपोर्ट में उल्लेख है, विशेषज्ञों का मानना है कि निपाह वायरस कोविड-19 या इन्फ्लुएंजा जितना संक्रामक नहीं है और इसके बड़े पैमाने पर फैलने की संभावना कम है. मुख्य रूप से यह संक्रमित जानवरों या दूषित खाद्य पदार्थों के माध्यम से फैलता है.

डब्ल्यूएचओ के अनुसार, “निपाह वायरस के प्रसार का जोखिम कम है और यात्रा या व्यापार पर कोई प्रतिबंध आवश्यक नहीं है.”

इस लेख में उल्लेख है, निपाह वायरस के शुरुआती लक्षण अन्य बीमारियों जैसे बुखार, सिरदर्द और मांसपेशियों में दर्द के समान हो सकते हैं, जिससे पहचान में कठिनाई हो सकती है. गंभीर मामलों में तंत्रिका तंत्र प्रभावित होता है और मरीज कोमा में जा सकता है.

इस रिपोर्ट में उल्लिखित, प्रभावित क्षेत्रों के बाहर रहने वाले लोगों के लिए जोखिम बहुत कम है. स्वास्थ्य अधिकारी सतर्कता बरत रहे हैं और नियंत्रण के लिए आवश्यक कदम उठा रहे हैं.

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Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.

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