मेघालय के ईस्ट जयंतिया हिल्स जिले के थांगस्काई क्षेत्र में 5 फरवरी 2026 को एक अवैध कोयला खदान में हुए विस्फोट में कम से कम 18 मजदूरों की मौत हो गई और कई अन्य के फंसे होने की आशंका है. बचाव कार्य जारी है, जबकि राज्य और केंद्र सरकारों ने मृतकों के परिजनों के लिए मुआवजे की घोषणा की है. पुलिस ने दो खदान मालिकों को गिरफ्तार किया है और अवैध खनन के खिलाफ सख्त कार्रवाई के आदेश दिए गए हैं.
The Hindu के अनुसार, मुख्यमंत्री कोनराड संगमा ने घटना की जांच के आदेश दिए हैं और दो कैबिनेट मंत्रियों को मौके पर भेजा गया है. मुख्यमंत्री ने कहा कि दोषियों के खिलाफ कड़ी कार्रवाई की जाएगी और अवैध खनन को बर्दाश्त नहीं किया जाएगा. राज्य सरकार ने मृतकों के परिजनों को तीन लाख रुपये की अनुग्रह राशि देने की घोषणा की है.
Deccan Herald की रिपोर्ट के मुताबिक, असम सरकार ने भी तीन मृतकों के परिजनों को पांच लाख रुपये की सहायता देने की घोषणा की है, जो असम के कटीगोराह क्षेत्र से थे. मुख्यमंत्री हिमंत बिस्वा सरमा ने संबंधित मंत्री और विधायक को पीड़ित परिवारों से मिलने के निर्देश दिए हैं.
BBC ने बताया, विस्फोट अवैध 'रैट-होल' खनन के दौरान हुआ, जिसमें डायनामाइट का इस्तेमाल किया गया था. पुलिस अधीक्षक विकाश कुमार के अनुसार, एक मजदूर गंभीर रूप से घायल हुआ है और शिलांग के अस्पताल में भर्ती है. प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने मृतकों के लिए दो लाख रुपये और घायलों के लिए पचास हजार रुपये की सहायता की घोषणा की है.
Scroll के एक लेख में उल्लेख है, मेघालय उच्च न्यायालय ने स्वतः संज्ञान लेते हुए जिला उपायुक्त और पुलिस अधीक्षक को 9 फरवरी को तलब किया है. अदालत ने खदान मालिकों और संचालकों की गिरफ्तारी और अवैध खनन सामग्री की जब्ती के आदेश दिए हैं. अदालत ने यह भी पूछा कि प्रतिबंध के बावजूद अवैध खनन कैसे जारी है.
इस रिपोर्ट में उल्लेख है, दो खदान मालिकों को गिरफ्तार किया गया है और बचाव कार्य जारी है. मुख्यमंत्री ने कहा कि अवैध खनन के खिलाफ अब तक एक हजार से अधिक मामले दर्ज किए गए हैं और कई लोगों को गिरफ्तार किया गया है.
इस रिपोर्ट में जिक्र है, राज्य सरकार ने वैज्ञानिक और वैध खनन के लिए लाइसेंस लेने की प्रक्रिया शुरू की है, ताकि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति न हो. राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू और केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह ने भी घटना पर शोक व्यक्त किया है.
जैसा कि इस रिपोर्ट में उल्लेख है, पुलिस ने एफआईआर दर्ज कर ली है और जनता से अवैध खनन में शामिल लोगों की जानकारी साझा करने की अपील की है. बचाव कार्य में एनडीआरएफ, एसडीआरएफ और विशेष बचाव दल लगे हुए हैं.
अवैध 'रैट-होल' खनन पर 2014 से प्रतिबंध है, लेकिन इस लेख में उल्लेख है कि इसके बावजूद राज्य में कई बार घातक घटनाएं हो चुकी हैं. 2012 में भी इसी तरह की दुर्घटना में 15 मजदूरों की मौत हुई थी. सुप्रीम कोर्ट और नेशनल ग्रीन ट्रिब्यूनल के आदेशों के बावजूद अवैध खनन जारी है.
Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.
