ईरान में जारी व्यापक विरोध प्रदर्शनों और बढ़ती हिंसा के मद्देनज़र भारत सरकार ने वहां रह रहे अपने नागरिकों को तुरंत देश छोड़ने की सलाह दी है। विदेश मंत्रालय ने स्पष्ट किया है कि सभी भारतीय नागरिक, विशेष रूप से छात्र, तीर्थयात्री, व्यवसायी और पर्यटक, उपलब्ध परिवहन साधनों के माध्यम से ईरान से निकल जाएं। साथ ही, उन्हें स्थानीय मीडिया पर नजर रखने और भारतीय दूतावास से लगातार संपर्क में रहने को कहा गया है।
Hindustan Times के अनुसार, तेहरान स्थित भारतीय दूतावास ने 5 जनवरी 2026 की अपनी पूर्व सलाह को दोहराते हुए कहा है कि सभी भारतीय नागरिकों को अपने यात्रा और पहचान दस्तावेज़ हमेशा साथ रखने चाहिए और किसी भी सहायता के लिए दूतावास से संपर्क करना चाहिए। दूतावास ने आपातकालीन हेल्पलाइन नंबर और ईमेल भी जारी किए हैं, ताकि जरूरत पड़ने पर तुरंत सहायता मिल सके।
Deccan Herald की रिपोर्ट के मुताबिक, विदेश मंत्रालय ने यह भी स्पष्ट किया है कि सभी भारतीय नागरिकों को विरोध-प्रदर्शन वाले क्षेत्रों से दूर रहना चाहिए और अपने दस्तावेज़ तैयार रखने चाहिए। मंत्रालय ने यह भी कहा कि ईरान में रह रहे भारतीयों को दूतावास के साथ पंजीकरण कराना अनिवार्य है, ताकि आपात स्थिति में उनसे संपर्क किया जा सके।
The Hindu ने बताया, ईरान में हालात लगातार बिगड़ते जा रहे हैं, जहां अब तक 2,500 से अधिक लोगों की मौत हो चुकी है और 18,000 से ज्यादा लोग हिरासत में लिए गए हैं। संयुक्त राष्ट्र के अनुसार, ईरान में तैनात 500 से अधिक यूएन कर्मी सुरक्षित हैं, लेकिन अधिकांश घर से काम कर रहे हैं।
इस रिपोर्ट में उल्लेख है, भारत-ईरान व्यापार वर्तमान में बहुत सीमित है और मुख्य रूप से खाद्य और दवाओं तक सीमित है। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप द्वारा ईरान के साथ व्यापार करने वाले देशों पर 25% अतिरिक्त टैरिफ लगाने की घोषणा के बावजूद, भारतीय अधिकारियों का मानना है कि इसका भारत पर न्यूनतम प्रभाव पड़ेगा, क्योंकि भारत का ईरान के साथ कुल व्यापार 2024-25 में केवल 1.68 अरब डॉलर रहा है।
इस रिपोर्ट में जिक्र है, भारत के निर्यातक संगठन ने भी कहा है कि भारतीय कंपनियां अमेरिकी प्रतिबंधों का पूरी तरह पालन कर रही हैं और मुख्य रूप से मानवीय व्यापार, जैसे खाद्य और दवाओं, तक ही सीमित हैं।
“भारतीय नागरिकों को सलाह दी जाती है कि वे ईरान में विरोध-प्रदर्शन वाले क्षेत्रों से दूर रहें, अपने दस्तावेज़ तैयार रखें और दूतावास से संपर्क में रहें।”
जैसा कि इस रिपोर्ट में उल्लिखित, अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के कारण क्षेत्र में सैन्य कार्रवाई की संभावना बनी हुई है, जिससे भारत को अपने नागरिकों की सुरक्षा के लिए अतिरिक्त सतर्कता बरतनी पड़ रही है। भारत की ऊर्जा सुरक्षा और पश्चिम एशिया में रह रहे 80-90 लाख भारतीयों की सुरक्षा भी चिंता का विषय है।
इस समाचार रिपोर्ट ने कहा, भारत ने 2019 के बाद से ईरान से तेल आयात लगभग बंद कर दिया है, जिससे द्विपक्षीय व्यापार में भारी गिरावट आई है। अब भारत का ईरान के साथ व्यापार मुख्य रूप से कृषि और दवा उत्पादों तक सीमित है।
इस लेख में उल्लेख है, ईरान में भारतीय पासपोर्ट धारकों के लिए वीज़ा-मुक्त यात्रा की सुविधा सीमित है, जिससे मौजूदा हालात में भारतीय नागरिकों के लिए सुरक्षित और शीघ्र वापसी की आवश्यकता और भी महत्वपूर्ण हो जाती है।
Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.
