मुंबई महानगरपालिका (बीएमसी) चुनाव 2026 में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) और एकनाथ शिंदे के नेतृत्व वाली शिवसेना ने ऐतिहासिक जीत दर्ज की है, जिससे ठाकरे परिवार की 25 वर्षों की सत्ता समाप्त हो गई है. भाजपा ने 89 सीटें और शिंदे सेना ने 29 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जबकि शिवसेना (यूबीटी) 65 सीटों के साथ दूसरे स्थान पर रही. कांग्रेस, एनसीपी, एआईएमआईएम और अन्य दलों का प्रदर्शन कमजोर रहा.
The Indian Express के अनुसार, बीजेपी और शिंदे सेना की महायुति ने बीएमसी के साथ-साथ महाराष्ट्र के अन्य नगर निगमों में भी शानदार प्रदर्शन किया है. भाजपा अब 20 नगर निगमों में सबसे बड़ी पार्टी बन गई है, जिससे मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस और उपमुख्यमंत्री एकनाथ शिंदे की रणनीति को मजबूती मिली है.
Hindustan Times की रिपोर्ट के मुताबिक, अगर शिवसेना का विभाजन नहीं हुआ होता तो बीजेपी को बीएमसी में बहुमत मिलना मुश्किल था. उद्धव ठाकरे की शिवसेना (यूबीटी) और शिंदे गुट की संयुक्त सीटें भाजपा से अधिक होतीं. विश्लेषकों का मानना है कि कांग्रेस के साथ गठबंधन न करने और मनसे के साथ जाने से विपक्षी वोट बंट गए.
The Hindu ने बताया, कांग्रेस को बीएमसी चुनाव में ऐतिहासिक रूप से सबसे कम 24 सीटें मिलीं, जिससे पार्टी के भीतर नेतृत्व परिवर्तन की मांग उठी है. मुंबई कांग्रेस अध्यक्ष वर्षा गायकवाड़ से इस्तीफे की मांग की गई है, जबकि पार्टी ने वंचित बहुजन अघाड़ी और अन्य छोटे दलों के साथ गठबंधन किया था, जो असफल रहा.
Hindustan Times ने एक लेख में कहा, चुनाव परिणाम के बाद उद्धव ठाकरे ने पार्टी कार्यकर्ताओं से कहा कि "अगर भगवान ने चाहा तो मुंबई में शिवसेना (यूबीटी) का महापौर बनेगा". उन्होंने भाजपा पर "विश्वासघात" का आरोप लगाया और कहा कि मराठी मानुष भाजपा को माफ नहीं करेगा.
Amar Ujala की रिपोर्ट ने हाइलाइट किया, पुणे और पिंपरी-चिंचवड़ में भी भाजपा ने एनसीपी और एनसीपी (एसपी) गठबंधन को हराया. उपमुख्यमंत्री अजित पवार ने हार स्वीकार करते हुए कहा कि पार्टी हार के कारणों पर चर्चा करेगी और कार्यकर्ताओं को निराश न होने की सलाह दी.
Financial Express के एक लेख में उल्लेख है, भाजपा ने महाराष्ट्र के 29 नगर निगमों में कुल 1,425 सीटें जीतीं. बीएमसी में भाजपा-शिंदे सेना गठबंधन ने 117 सीटें लेकर बहुमत हासिल किया. एआईएमआईएम ने राज्यभर में 114 सीटें जीतकर अपनी उपस्थिति मजबूत की.
Financial Express ने एक लेख में कहा, ठाकरे परिवार ने हार के बावजूद "मराठी अस्मिता" के लिए लंबी लड़ाई जारी रखने का संकल्प लिया है. उद्धव ठाकरे और राज ठाकरे दोनों ने कार्यकर्ताओं से कहा कि "यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है, मराठी लोगों के सम्मान के लिए संघर्ष जारी रहेगा".
“यह लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है… यह तब तक जारी रहेगी जब तक मराठी व्यक्ति को उसका सम्मान नहीं मिल जाता.”
Amar Ujala के एक लेख में उल्लेख है, बीएमसी चुनाव में तेजस्वी अभिषेक घोसालकर, राजश्री शिरवाडकर, मर्जिया पठान और सहर यूनुस शेख जैसे नए और युवा चेहरे उभरे हैं. चर्चा है कि भाजपा महापौर पद शिवसेना (शिंदे गुट) को दे सकती है, जिससे महायुति में संतुलन बना रहे.
इस रिपोर्ट में जिक्र है, भाजपा की जीत को महाराष्ट्र की बदलती राजनीतिक दिशा और विपक्ष की कमजोर रणनीति का परिणाम माना जा रहा है.
Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.
