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नेपाल के 47वें प्रधानमंत्री के रूप में बालेन शाह ने ली शपथ, नई कैबिनेट का गठन

बालेन शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने हैं. उनके साथ 14 मंत्रियों ने भी शपथ ली है.

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नेपाल के 35 वर्षीय बालेन शाह ने 27 मार्च 2026 को देश के 47वें प्रधानमंत्री के रूप में शपथ ली. राष्ट्रपति रामचंद्र पौडेल ने काठमांडू में आयोजित समारोह में उन्हें प्रधानमंत्री पद की शपथ दिलाई. बालेन शाह नेपाल के सबसे युवा प्रधानमंत्री बने हैं. उनके साथ 14 मंत्रियों ने भी शपथ ली, जिनमें वित्त, विदेश, रक्षा, वाणिज्य और उद्योग जैसे प्रमुख मंत्रालय शामिल हैं. बालेन शाह को रास्ट्रिय स्वातंत्र पार्टी (RSP) का समर्थन प्राप्त है.

The Indian Express के अनुसार, बालेन शाह को रक्षा, वाणिज्य और उद्योग मंत्रालयों की जिम्मेदारी सौंपी गई है. उनकी कैबिनेट में अर्थशास्त्री स्वर्णिम वाग्ले को वित्त मंत्री और शिक्षाविद् सिशिर खनाल को विदेश मंत्री नियुक्त किया गया है. शपथ ग्रहण समारोह में देश के प्रमुख राजनीतिक और प्रशासनिक अधिकारी उपस्थित रहे.

BBC की रिपोर्ट के मुताबिक, बालेन शाह की लोकप्रियता का मुख्य कारण उनका भ्रष्टाचार विरोधी रुख और युवाओं के बीच उनकी मजबूत छवि है. वे पहले काठमांडू के मेयर रह चुके हैं और अपने कार्यकाल में शहर की सफाई, विरासत संरक्षण और भ्रष्टाचार पर सख्त कार्रवाई के लिए जाने जाते हैं. उनकी पार्टी RSP ने हाल ही में हुए आम चुनावों में ऐतिहासिक जीत दर्ज की, जिससे पारंपरिक दलों का वर्चस्व टूटा.

Hindustan Times ने बताया, शपथ ग्रहण से एक दिन पहले बालेन शाह ने 'जय महाकाली' नामक नया वीडियो गीत जारी किया, जिसमें उनके चुनाव अभियान के दृश्य शामिल हैं. यह गीत देशभक्ति और राष्ट्रीय एकता को बढ़ावा देता है. RSP ने 5 मार्च को हुए आम चुनाव में 275 में से 182 सीटें जीतकर बहुमत हासिल किया, जिससे पार्टी को सरकार बनाने का अधिकार मिला.

इस रिपोर्ट में जिक्र है, बालेन शाह की छवि एक ऐसे नेता की है, जो पारंपरिक राजनीति से अलग हटकर युवाओं और आम जनता की आकांक्षाओं का प्रतिनिधित्व करते हैं. उन्होंने अपने चुनाव अभियान में भ्रष्टाचार के खिलाफ सख्त कदम, न्यायिक सुधार और 12 लाख नई नौकरियों का वादा किया था. उनकी पार्टी ने पूर्व प्रधानमंत्री केपी शर्मा ओली को भी उनके गढ़ झापा 5 से हराया.

इस रिपोर्ट ने हाइलाइट किया, बालेन शाह के प्रधानमंत्री बनने के बाद नेपाल में राजनीतिक बदलाव की उम्मीदें बढ़ गई हैं. उनकी सरकार के सामने बेरोजगारी, आर्थिक मंदी और हालिया जनआंदोलन की जांच रिपोर्ट को सार्वजनिक करने जैसी कई चुनौतियां हैं.

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Note: This article is produced using AI-assisted tools and is based on publicly available information. It has been reviewed by The Quint's editorial team before publishing.

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