दावा
स्व-घोषित लेबर नेता और सामाजिक कार्यकर्ता विनय दूबे की एक पुरुष और महिला के साथ खड़े फोटो सोशल मीडिया पर इस दावे के साथ शेयर की जा रही है कि उनकी मां ने महमूद नाम के एक मुस्लिम शख्स से शादी की थी.
दुबे को मुंबई पुलिस ने प्रवासी मजदूरों को लॉकडाउन का उल्लंघन करने और उन्हें 14 अप्रैल को बांद्रा टर्मिनस के बाहर जमा होने को उकसाने के आरोप में गिरफ्तार किया है. वो 21 अप्रैल तक पुलिस कस्टडी में हैं.
स्टोरी लिखे जाने तक पोस्ट को फेसबुक पर 12,000 लोग लाइक और 19,000 शेयर कर चुके थे.
फेसबुक पर कई यूजर्स ने इस पूरे मैसेज या इसके एक टुकड़े के साथ इस पोस्ट को शेयर किया. सभी ने यही दावा किया कि दुबे के पिता का नाम महमूद है.
यही पोस्ट ट्विटर पर भी वायरल हो गया है.
शिव यादव नाम के एक ट्विटर यूजर ने इस वायरल मैसेज और फोटो को ट्विटर पर पोस्ट किया. इस स्टोरी को लिखते समय उनके पोस्ट को 1,800 लाइक्स मिल चुके थे.
हालांकि, फिर बाद में ट्विटर थ्रेड में साफ करते हुए उन्होंने इस दावे को गलत बताय और सही जानकारी दी.
सच या झूठ?
फोटो के साथ शेयर किया जा रहा ये वायरल मैसेज फेक है. दुबे के पिता का नाम जटाशंकर दुबे है, न कि महमूद. इसके अलावा. ये फोटो CAA प्रदर्शन से है.
हमें जांच में क्या मिला?
दुबे के बारे में पता लगाते हुए, हमें MyNeta वेबसाइट मिली, जिसमें 2019 लोकसभा चुनाव के सभी उम्मीदवारों की जानकारी थी. एसोसिएशन फॉर डेमोक्रेटिक रिफॉर्म के इस पेज पर दुबे की तरफ से सबमिट की हुई जानकारी मौजूद थी.
इस जानकारी के मुताबिक, उनके पिता का नाम जटाशकंर है.
दुबे ने महाराष्ट्र के कल्याण से लोकसभा चुनाव लड़ा था.
इसके अलावा, हमें नेशनल कॉन्ग्रेस पार्टी के अनिल देशमुख का 10 अप्रैल को किया गया एक ट्वीट मिला, जिसमें उन्होंने लिखा था कि मुंबई के आयरोली के एक ऑटो ड्राइवर, जटाशकंर दुबे ने महाराष्ट्र सीएम के कोरोना वायरल रिलीफ फंड में 25,000 रुपये का दान दिया है.
दुबे ने इस ट्वीट को शेयर करते हुए लिखा था कि ये उनके पिता हैं, जिन्होंने अपनी सेविंग में से ये रकम दान दी है.
हमें इस दिन की कुछ तस्वीरें भी मिलीं, जिसमें दुबे को अपने पिता के साथ देखा जा सकता है.
अमर उजाला के एक आर्टिकल के मुताबिक, जटाशंकर उत्तर प्रदेश के भदोही जिले के औराई में हरिनारायणपुर गांव के हैं.
तो उस फोटो का क्या, जो वायरल हो रही है? हमें जांच में मालूम चला कि ये फोटो पटना के सब्जीबाग में CAA प्रदर्शन की है.
इस फोटो को 8 फरवरी को अपलोड किया गया था. संभावना है कि इस फोटो को विरोध प्रदर्शन में मौजूद लोगों के साथ खींचा गया हो.
इससे ये साफ होता है कि सोशल मीडिया पर विनय दुबे को लेकर गलत दावा किया जा रहा है.
