सोशल मीडिया पर पतंजलि के निदेशक और योग आचार्य रामदेव का बताया जा रहा एक बयान वायरल है. इसमें दिखाया गया है कि रामदेव ने केंद्र में 2008 तक रही कांग्रेस के नेतृत्व वाली UPA सरकार की तारीफ की है. ये कहा है कि कांग्रेस सरकार तानाशाह नहीं थी और महंगाई को कंट्रोल में रखती थी. दावा ये भी किया गया है कि रामदेव ने ये बात स्वीकारी की कांग्रेस की छवि खराब करने में उनका भी योगदान है और वो इसके लिए माफी मांगते हैं.
क्या ये सच है ? : बाबा रामदेव का ऐसा कोई बयान सार्वजनिक तौर पर उपलब्ध नहीं है. न ही किसी विश्वसनीय मीडिया रिपोर्ट से ऐसे किसी बयान की पुष्टि होती है. रामदेव की सभी हालिया बयानों में उन्होंने विपक्ष की आलोचना ही की है.
हमने ये सच कैसे पता लगाया ? : वायरल पोस्ट में NBT (नवभारत टाइम्स का लोगो लगा हुआ है), NBT के किसी भी प्लेटफॉर्म पर हमें रामदेव का ऐसा कोई बयान नहीं मिला.
हमने रामदेव के अन्य बयान भी देखे, खासकर वो बयान जिसमें उन्होंने विपक्ष या कांग्रेस को लेकर कोई टिप्पणी की हो. हमें 16 अगस्त 2026 को मीडिया में आया उनका एक बयान मिला. पत्रकारों के सवालों के जवाब देते हुए रामदेव विपक्ष पर तंज कसते हैं और कहते हैं कि ''कुछ लोगों को ऐसा लगता है कि कब मौका मिले और कब वो झट से प्रधानमंत्री बन जाएं.'' इस बयान में रामदेव ने आगे कहा.
सत्ता पक्ष को विपक्ष से प्यार करना चाहिए माता पिता के समान. और विपक्ष को सत्ता पक्ष के लिए ये मानना चाहिए कि ये देश के चुने हुए लोग हैं, हम इनका अनादर न करें. दोनों को ही हाथ आगे बढ़ाना पड़ेगा और एक दूसरे को गले लगाना पड़ेगा.बाबा रामदेव
न्यूज चैनल TV9 भारत वर्ष के यूट्यूब चैनल पर 19 अगस्त 2026 को अपलोड किया गया एक और इंटरव्यू हमें मिला. इस इंटरव्यू में 00:40 मिनट पर रामदेव से सवाल पूछा जाता है कि क्या रामदेव मोहब्बत की दुकान खोलने वाले हैं ? .
'मोहब्बत की दुकान' का नारा कांग्रेस नेता राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा के दौरान काफी प्रचलित हुआ था. राहुल गांधी ने कई बार सार्वजनिक मंचों से इस नारे का इस्तेमाल किया है. तो जाहिर है जवाब में आगे जो रामदेव ने कहा वो इनडायरेक्टली कांग्रेस और राहुल गांधी से जोड़कर देखा जा सकता है.
सवाल के जवाब में रामदेव ने कहा,
मोहब्बत की दुकान का मतलब है समानता, एकता. कुछ लोग मोहब्बत की दुकान की तो बात करते हैं, लेकिन समाज में जातीय-वर्गीय घृणा....पहले तो हमारा जातीय संघर्ष, वर्गीय संघर्ष रुका नहीं था. राजनीतिक घृणा इतनी हो गई है, दलों के नाम पर लोग दल-दल में फंस गए हैं. एक दूसरे से राजनीतिक लोग घृणा करने लगे हैं, संसद में भी वो घृणा दिखाई देती है. और मोहब्बत की दुकान वाले भी उस घृणा में सम्मिलित हो जाते हैं, ये ठीक नहीं है.विपक्ष को लेकर रामदेव का बयान
हमें ऐसा कोई बयान नहीं मिला, जिसमें बाबा रामदेव ने कांग्रेस सरकार की पूर्व में आलोचना करने को लेकर अब माफी मांगी हो. हमें रामदेव के सोशल मीडिया अकाउंट्स पर भी ऐसा कोई बयान नहीं मिला.
नवभारत टाइम्स ने भी वायरल हो रहे पोस्ट का खंडन करते हुए स्पष्ट किया है कि संस्थान की तरफ से रामदेव का ऐसा कोई बयान पोस्ट नहीं किया गया है.
निष्कर्ष : सोशल मीडिया पर रामदेव के नाम पर शेयर किया जा रहा बयान सही नहीं है.
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