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क्या श्रीनगर में 40 साल में पहली बार हुई प्रभात फेरी?

सोशल मीडिया पर काफी शेयर किया जा रहा है प्रभात फेरी का वीडियो

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दावा

सोशल मीडिया पर एक वायरल वीडियो में दावा किया जा रहा है कि जम्मू-कश्मीर में 40 सालों में पहली बार प्रभात फेरी का आयोजन किया गया. वीडियो के साथ लिखा है: 'श्रीनगर कश्मीर में प्रभात फेरी 40 वर्षों में पहली बार.. सोचो और आँखे खोलो...कैसे मुमकिन हुआ...मोदी है..... तो मुमकिन है.'

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कई सोशल मीडिया यूजर्स ने फेसबुक और ट्विटर पर इसी दावे के साथ ये वीडियो शेयर किया है. ट्विटर यूजर पुनीत शर्मा, जिन्हें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और गृहमंत्री अमित शाह फॉलो करते हैं, उन्होंने भी इस वीडियो को शेयर किया है.

सच या झूठ?

वीडियो के साथ किया जा रहा दावा झूठा है. ये वीडियो प्रभात फेरी का नहीं, बल्कि राम नवमी के अवसर पर हुई झांकी का है.

हमें जांच में क्या मिला?

इस्कॉन में नेशनल कम्युनिकेशन के डायरेक्टर युधिष्ठिर गोविंद दास ने द क्विंट को बताया कि ये वीडियो प्रभास फेरी का नहीं.

‘सोशल मीडिया में आ रही रिपोर्ट्स से हमारे संज्ञान में एक वीडियो लाया गया है जो श्रीनगर में शूट किया गया है. ये वीडियो रामनवमी के दिन हुए शोभायात्रा का है जो हाल ही में दोबारा शेयर किया गया है.’
युधिष्ठिर गोविंद दास, डायरेक्टर, नेशनल कम्युनिकेशन, इस्कॉन

उन्होंने 40 सालों में ऐसा आयोजन पहली बार होने के दावे को भी इनकार कर दिया. उन्होंने कहा, 'श्रीनगर में इस्कॉन रामनवमी पर इस तरह की शोभायात्रा का आयोजन पिछले 12 सालों से करा रहा है. इतने सालों में ये आयोजन काफी भव्य हो गया है.'

ग्रेटर कश्मीर की खबर के मुताबिक, इस साल अप्रैल में रामनवमी का आयोजन किया गया था. द ट्रिब्यून के मुताबिक, घाटी में मोदी सरकार के आने से पहले 2013 में भी रामनवमी का आयोजन किया गया था.

क्या है प्रभात फेरी?

दास का कहना है कि प्रभात फेरी का मतलब एक आध्यात्मिक सभा होती है जो सुबह-सुबह कीर्तन या कथा के साथ किसी इलाके में घूमता है.

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