दावा
सोशल मीडिया पर वायरल हो रही कुछ तस्वीरों में दावा किया जा रहा है कि कर्नाटक के बेंगलुरु के शिवाजी नगप में स्थित मोदी मस्जिद का नाम प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नाम पर रखा गया है.
फेसबुक और ट्विटर पर कई यूजर्स ने इसी दावे के साथ इसे शेयर किया.
एक यूजर ने लिखा, 'बेंगलुरु में मुसलमानों ने मस्जिद का नाम नरेंद्र मोदी के नाम पर रखा. पता नहीं कितने ये देखने के बाद आत्महत्या कर लेंगे.'
क्विंट को इसकी WhatsApp हेल्पलाइन पर ये सवाल मिला.
सच या झूठ?
इस फोटो के साथ किया जा रहा दावा झूठा है. इस मस्जिद का नाम नरेंद्र मोदी के नाम पर नहीं रखा गया है. 125 साल पुरानी इस मस्जिद का नाम मोदी अब्दुल गफूर के नाम पर रखा गया था. चार साल पहले इसे तोड़कर दोबारा बनाया गया.
हमें जांच में क्या मिला?
कर्नाटक राज्य वक्फ बोर्ड के सचिव ने क्विंट को कंफर्म किया कि इसका नाम पीएम मोदी के नाम पर नहीं रखा गया है.
‘बेंगलुरु की मोदी मस्जिद 125 साल पुरानी है. ये मोदी अब्दुल गफूर की संपत्ति थी और उन्हीं के नाम पर रखी गई है. हमने पुरानी मस्जिद तोड़कर चार साल पहले नई मस्जिद बनाई है. इसका उद्घाटन पिछले महीने ही किया गया था. सरकारी गजट में इसका ऐलान कर दिया गया है, इसका मतलब है कि ये कर्नाटक सरकार के अधीन है और राज्य वक्फ बोर्ड इसे मैनेज कर रहा है. अभी हम मस्जिद के संरक्षक हैं. ये दावा कि इसका नाम नरेंद्र मोदी के नाम पर रखा गया है, ये एकदम झूठा है.’सचिव, कर्नाटक राज्य वक्फ बोर्ड
मस्जिद का इंटीरियर दिखाती एक फोटो में दिख रहा है कि अंदर पीएम मोदी का बैनर लगा है.
हमने 'मोदी' और 'मस्जिद' कीवर्ड्स से गूगल सर्च किया, जिसमें हमें Scroll का एक आर्टिकल मिला, जिसमें वही फोटो लगाई गई है, जो बैनर में थी.
Scroll के आर्टिकल में लिखा है कि ये फोटो सितंबर 2018 में नरेंद्र मोदी के इंदौर दौरे की है. मोदी सैफी मस्जिद में अशरा मुबारका कार्यक्रम में शामिल होने के लिए इंदौर गए थे.
जहां बैनर की फोटो सैफी मस्जिद की बताई जा रही है, वहीं अभी तक ये साफ नहीं हो पाया है कि दूसरी फोटो कहां की है. हालांकि, ये साफ है कि ये फोटो बेंगलुरू की मोदी मस्जिद की नहीं है.