दुश्मन को दो मोर्चों पर लड़ने के लिए मजबूर करो... दो तरफ से हमला हमेशा एक जंग से ज्यादा असरदार होता है,” ये बात Dan Brown ने अपनी एक किताब Deception Point में लिखी है.
यही रणनीति पाकिस्तान में मौजूद यूजर्स (सरकारी और गैर-सरकारी तंत्र दोनों) भारत के खिलाफ अपनाने की कोशिश कर रहे हैं, खासकर 2025 में दोनों देशों के बीच तनाव देखने के बाद. हालांकि सैन्य तनाव थम चुका है, लेकिन सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर जारी लड़ाई अभी खत्म नहीं हुई है.
पाकिस्तान से जुड़े यूजर्स भारत के खिलाफ भ्रामूक सूचनाएं (misinformation और disinformation) का एक संगठित अभियान चला रहे हैं. इसमें जानबूझकर भारत में संकट की स्थिति दिखाना या प्रमुख नेताओं को निशाना बनाते हुए AI से बने वीडियो नियमित रूप से पोस्ट करना शामिल है.
दो महीनों के दौरान, टीम WebQoof ने कम से कम ऐसे 16 दावों का पर्दाफाश किया, जो पाकिस्तान के अकाउंट्स से सामने आए थे और जिनका निशाना भारत और उसकी आबादी थी.
भारत के खिलाफ कौन-कौन से नैरेटिव फैलाए जा रहे हैं?
इन 16 दावों की जांच के दौरान, हमने चार प्रमुख नैरेटिव या कैटेगरी की पहचान की, जिन्हें पाकिस्तान में मौजूद लोगों द्वारा सोशल मीडिया पर शेयर किया गया.
सबसे आम पैटर्न जो सामने आया, वह था यूजर्स द्वारा प्रमुख नेताओं या सैन्य अधिकारियों के AI-जनरेटेड वीडियो वाले पोस्ट साझा करना. (नोट: इनमें से कुछ दावों को उनकी प्रकृति के आधार पर दो बार गिना गया है और अलग-अलग कैटेगरी में रखा गया है.)
उदाहरण: एक वीडियो वायरल हुआ, जिसमें कथित तौर पर आर्मी डिजाइन ब्यूरो (ADB) के अतिरिक्त महानिदेशक, मेजर जनरल सीएस मान, “अखंड भारत को वापस लेने के भारत के रास्ते” पर बात करते हुए दिख रहे थे.
‘itsbasharhashmi’ नाम के एक इंस्टाग्राम यूज़र ने यह वीडियो अपने अकाउंट से शेयर किया था.
यूजर की प्रोफाइल फोटो को ध्यान से देखने पर पता चलता है कि उसमें ISPR (इंटर-सर्विसेज पब्लिक रिलेशंस) का जिक्र है, जो पाकिस्तानी सेना का मीडिया विंग है.
The Quint समेत कई फैक्ट-चेकिंग संस्थानों ने इस वीडियो का खंडन किया और पाया कि यह AI-जनरेटेड था. हमारी रिपोर्ट यहां पढ़ सकते हैं.
क्या वेस्ट एशिया संकट के दौरान भारतीयों को गिरफ्तार किया गया था?: हमें कम से कम तीन ऐसे दावे मिले, जिनमें कहा गया कि ईरान या बहरीन में संवेदनशील ऑपरेशन की जानकारी लीक करने के शक में भारतीय नागरिकों को गिरफ्तार किया गया.
इन सभी दावों में दो समान बातें थीं—पहला, ये सभी दावे पाकिस्तान से सामने आए और भारत व उसकी आबादी को गलत तरीके से पेश करने की कोशिश करते थे; और दूसरा, इनमें से कोई भी दावा सच नहीं थ. आप हमारी रिपोर्ट्स यहां, यहां और यहां पढ़ सकते हैं.
काल्पनिक ‘संकट’: किसी देश में यह कैसे साबित किया जाए कि वहां की आबादी असंतुष्ट है? इसके लिए अशांति फैलने के वीडियो सबूत के तौर पर दिखाए जाते हैं या फिर कभी-कभी संकट का एक भ्रम खड़ा किया जाता है.
इसी हथकंडे को पाकिस्तान के यूजर्स सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर अपनाने की कोशिश कर रहे हैं.
चार दावों में, जो सभी पाकिस्तान से सामने आए थे, जम्मू-कश्मीर में आर्मी कैंप पर हमले, मणिपुर में अशांति और देश की राजधानी में आग फैलने की बातें कही गईं.
जैसा कि समझा जा सकता है, ये सभी दावे गलत थे. इस झूठे नैरेटिव को गढ़ने के लिए भ्रामक दावों के साथ वीडियो शेयर किए जा रहे थे.
क्या भारत ईरान के खिलाफ है?: पाकिस्तान में मौजूद सोशल मीडिया यूजर्स तो यही मानते हैं. छह दावे, जिनमें प्रधानमंत्री Narendra Modi और रक्षा मंत्री Rajnath Singh के AI-जनरेटेड क्लिप्स शामिल थे, इस बात के सबूत के तौर पर शेयर किए गए कि भारत ने तनाव के बीच खुलकर इजरायल का समर्थन किया है.
नीचे दिए गए स्क्रीनशॉट्स पर नजर डालिए, जो हमारी पड़ताल के असली सबूत हैं.
भारत और उसकी राजनीति पर जरूरत से ज्यादा दिलचस्पी (Obsession )
‘The Whistle Blower’ नाम का एक X हैंडल, जिसे अक्सर भ्रामक जानकारी फैलाने के लिए जाना जाता है, भारतीय नेताओं के डीपफेक और AI-जनरेटेड कंटेंट शेयर करता है.
नीचे दिए गए वीडियो को देखकर साफ समझ आता है कि यह यूजर दो चीजों पर खास ध्यान देता है:
डीपफेक बनाना
भारतीय नेताओं के डीपफेक बनाना
यह अकाउंट लगातार ऐसा कंटेंट शेयर करता है, जिससे एक खास नैरेटिव को आगे बढ़ाया जा सके और लोग इस तरह के संगठित अभियानों का शिकार हो जाएं.
हालांकि इस अकाउंट की लोकेशन जाहिर तौर पर तो स्पष्ट नहीं होती (और भारत में इस अकाउंट ने अपनी लोकेशन को छिपाया है), लेकिन इस हैंडल पर पोस्ट किया गया कंटेंट अक्सर पाकिस्तान के अन्य सोशल मीडिया अकाउंट्स द्वारा आगे बढ़ाया जाता है.
‘Pakistan Zindabad’ नाम का एक फेसबुक हैंडल उन अकाउंट्स में शामिल है, जो लगातार भारतीय नेताओं के AI-जनरेटेड क्लिप्स फैलाता रहता है.
यह पेज अगस्त 2025 से लगातार पोस्ट कर रहा है, और इसकी जांच से पता चलता है कि यह नियमित रूप से भारत को निशाना बनाने वाला कंटेंट शेयर करता है.
इसमें यूट्यूब वीडियो, तस्वीरें और अन्य क्लिप्स शामिल हैं, जिनमें भारत के अन्य देशों के साथ बिगड़ते रिश्तों की बात की जाती है.
जब हमने ‘Voice of Pakistan’ नाम के एक इंस्टाग्राम हैंडल की जांच की, तो पाया कि उसने एक नैरेटिव बनाने के लिए भारतीय सेना और राजनीतिक नेताओं के कई AI-जनरेटेड वीडियो साझा किए थे.
विडंबना यह है कि इस पेज के बायो में लिखा है कि यह गलत जानकारी का मुकाबला करता है.
अगर आप इस इंस्टाग्राम हैंडल को देखें, तो पाएंगे कि यह यूजर नियमित रूप से ऐसे पोस्ट करता है, जिनमें पाकिस्तान को सकारात्मक रूप में दिखाया जाता है और भारत के खिलाफ नकारात्मक कंटेंट शेयर करता है.
इस हैंडल की पहली पोस्ट अगस्त 2025 की है, जिसमें कश्मीर का जिक्र किया गया है.
‘Pak Vision’ नाम का एक और फेसबुक पेज, जिसे जून 2021 में “पाकिस्तान की सकारात्मक छवि” को बढ़ावा देने के लिए बनाया गया था, मार्च में भारतीय नेताओं के कम से कम चार AI-जनरेटेड वीडियो शेयर करने के लिए जिम्मेदार है.
यह पेज नियमित रूप से भारत को निशाना बनाने वाला कंटेंट पोस्ट करता है.
इस पेज ने कई मौकों पर इजरायल-ईरान तनाव से जुड़ी भ्रामक पोस्ट भी शेयर की हैं. पुराने और असंबंधित वीडियो को इजरायल में हालिया नुकसान का बताकर यहां शेयर किया जाता है.
भारत के खिलाफ पाकिस्तान से जुड़े सोशल मीडिया हैंडल्स द्वारा चलाया जा रहा यह संगठित दुष्प्रचार अभियान FIMI (Foreign Information Manipulation and Interference) के दायरे में आता है.
EU Disinfo Lab, FIMI को इस तरह परिभाषित करता है: “यह आमतौर पर गैर-कानूनी न होने वाला ऐसा पैटर्न है, जो मूल्यों, प्रक्रियाओं और राजनीतिक सिस्टम पर नकारात्मक असर डाल सकता है. इस तरह की गतिविधियां जानबूझकर और संगठित तरीके से की जाती हैै”.
क्या इसका असर भारत पर पड़ सकता है?: इसका जवाब भविष्य में साफ होगा, लेकिन हमने बार-बार देखा है कि दुष्प्रचार अभियान लोगों में डर और घबराहट पैदा कर सकते हैं और इससे वास्तविक जीवन में समस्याएं भी खड़ी हो सकती हैं.
फिलहाल, प्रेस इंफॉर्मेशन ब्यूरो (PIB) की फैक्ट-चेकिंग यूनिट और अन्य स्वतंत्र फैक्ट-चेकिंग संगठनों ने लगातार पाकिस्तान से आने वाले और भारत को निशाना बनाने वाले ऐसे भ्रामक दावों का खंडन किया है. हालांकि, यह सवाल भी उठता है कि क्या लंबे समय में यह कोशिशें पर्याप्त होंगी ?
ध्यान देने वाली बात यह है कि ऐसे ‘ऐसे तत्व’ सोशल मीडिया का इस्तेमाल कर घबराहट फैलाने का काम करते हैंय इसलिए अगली बार जब आपको ऐसा कोई दावा दिखे और आपको पता ना हो कि ये सच है या नहीं, तो उसे फॉरवर्ड करने से पहले रुकें और हमें हमारे WhatsApp टिपलाइन पर भेजें.
(अगर आपके पास भी ऐसी कोई जानकारी आती है, जिसके सच होने पर आपको शक है, तो पड़ताल के लिए हमारे वॉट्सऐप नंबर 9540511818 या फिर मेल आइडी webqoof@thequint.com पर भेजें. सच हम आपको बताएंगे. हमारी बाकी फैक्ट चेक स्टोरीज आप यहां पढ़ सकते हैं.)
