असहिष्णुता है, काफी ज्यादा असहिष्णुता है, पर हां, सहिष्णुता भी बढ़ रही है.शाहरुख खान, अभिनेता व निर्माता
किरण ने पहली बार कहा कि हमें भारत छोड़ देना चाहिए, वह हमारे बच्चे के भविष्य को लेकर डरती है.आमिर खान, अभिनेता, निर्देशक व निर्माता
भारत के दो सबसे अमीर और मशहूर लोगों ने महसूस किया कि देश का माहौल दमघोंटू और डरावना हो गया है, और उन्होंने यह बात सबके सामने रखी.
पर देश की महान जनता से उन्हें कुछ ज्यादा-ही-समझदार अंदाज में सोशल मीडिया पर जवाब दिया. देखिए कहां आकर उनकी ‘आलोचना’ की इंतेहां हुई.
“तेरे को इंडिया इंटॉलरेंट लगता है? इंडिया! हम मोस्ट टॉलरेंट कंट्री इन द वर्ल्ड हैं! इंडिया अच्छा नहीं लगता तो गो टू....”
और खाली जगह में आप पाकिस्तान, ईराक, सीरिया या ऐसे किसी भी देश का नाम लिख सकते हैं.
अब इसके लिए सरकार को जिम्मेदार ठहराने से पहले... जरा ध्यान दें कि इस तरह का जहर उगलने वाले लोग भारत सरकार के कर्मचारी नहीं हैं.
ये बस सोशल मीडिया पर रहने वाले आम लोग हैं, जिनकी अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को बनाए रखने के लिए हम इतने उत्सुक रहते हैं.
इन्हीं लोगों की वजह से हम सेक्शन 66ए को निरस्त कराना चाहते थे. जरा देखिए किस तरह वे अपने अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता के अधिकार का प्रयोग करते हैं.
दुर्भाग्य से यह सब बस ट्विटर तक ही सीमित नहीं है. लोगों के चेहरों पर कालिख पोती जा रही है, फिल्मी सितारों को थप्पड़ मारने वालों के लिए नकद इनाम की घोषणा की जा रही है.
और लिबरल्स, अाप लोग भी अपने चेहरे से आत्मसंतुष्टि का नकाब उतार दीजिए. आप कोई बहुत बेहतर नहीं हैं. बंगलुरू साहित्योत्सव यानी बीएलएफ के संस्थापक-निदेशक विक्रम संपत ने संस्था से खुद को अलग कर लिया है.
क्यों? क्योंकि तीन ‘अवॉर्ड वापसी’ करने वाले लेखकों ने इसलिए फिल्मोत्सव में न आने का फैसला लिया क्योंकि संपत उनके विचारों से सहमत नहीं.
क्या बकवास है? असहिष्णुता पर असहिष्णुता?
शाहरुख खान ने ठीक कहा था कि असहनशीलता बढ़ रही है पर सरकार की वजह से नहीं, हमारी ही वजह से.
एडिटर: नितिन शर्मा
कैमरा: सिद्दार्थ सफाया
प्रॉड्यूसर: एशा पॉल