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Uttam Nagar Ground Report| क्या तरुण की मौत को सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा?

Uttam Nagar Ground Report: 4 मार्च को होली पर पानी से भरा गुब्बारा फेंकने को लेकर दो पक्षों में विवाद हो गया था.

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क्या दिल्ली के उत्तम नगर में होली पर हुए विवाद को सांप्रदायिक रंग देने की  कोशिश हो रही है?

क्या तरुण बुटोलिया की मौत को एक समुदाय विशेष के खिलाफ नैरेटिव सेट करने के लिए इस्तेमाल किया जा रहा?

क्या दो परिवारों के बीच के झगड़े को दो समुदायों के बीच के टकराव के रूप में पेश कर नफरत को हवा दी जा रही है?

ये कुछ सवाल हैं जो दिल्ली के उत्तम नगर में होली पर हुए विवाद के बाद उठे हैं. दरअसल, 4 मार्च को दो पक्षों में कथित रूप से पानी से भरा गुब्बार फेंकने को लेकर झगड़ा हुआ था. मामला इतना बढ़ गया कि दोनों पक्षों में मारपीट हुई, जिसमें 26 वर्षीय तरुण बुटोलिया की मौत हो गई. पुलिस ने इस मामले में 14 लोगों को गिरफ्तार किया है. जबकि दो नाबालिगों को भी हिरासत में लिया है. घटना के बाद से इलाके में तनाव के हालात हैं. शांति-व्यवस्था बनाए रखने के लिए भारी पुलिसबल तैनात किया गया है.

इस बीच दक्षिणपंथी संगठनों से जुड़े लोग मृतक तरुण के परिवार से मिलने के लिए लगातार पहुंच रहे हैं. इस दौरान कई लोगों को भड़काऊ भाषण भी देते सुना गया. हालांकि, स्थानीय लोगों का कहना है कि ये विवाद मोहल्ले में रहने वाले दो परिवारों के बीच का था. जिसे अब सांप्रदायिक रंग दिया जा रहा है. द क्विंट की इस ग्राउंड रिपोर्ट में जानिए पूरे विवाद की हकीकत क्या है?

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"मेरे बेटे के सिर पर 15-20 लोगों ने डंडे-बैट से मारा"

द क्विंट से बातचीत में मृतक तरुण के पिता मेमराज ने उस दिन की घटना को याद करते हुए बताया कि घर के सेंकेंड फ्लोर पर खड़ी 6-7 साल की बच्ची के हाथ से पानी से भरा गुब्बारा गिर गया था. इस दौरान गली से जा रही महिला पर पानी के छींटे पड़ गए थे. जिसके बाद महिला ने हल्ला मचाना शुरू कर दिया.

वे आगे कहते हैं, "मेरे चाचा और मेरा छोटे भाई रमेश- दोनों ने महिला से माफी मांगी. लेकिन वो मानी नहीं और अपने परिवार के लोगों को चिल्ला-चिल्लाकर इकट्ठा कर लिया. उनके हाथ में डंडे, लोहे के रॉड बगैरह थे. उन्होंने आते ही हमें मारना शुरू कर दिया."

इस मामले में तरुण के पिता सहित परिवार के लोगों को गंभीर चोटें आई हैं. पुलिस के मुताबिक, दोनों पक्षों के 8 लोग घायल हुए हैं.

परिवार का कहना है कि जब विवाद हुआ, तब तरुण घर पर नहीं थे. वे अपने दोस्तों के साथ होली खेलने के लिए गए हुए थे.

"मेरा बेटा अपने यार-दोस्तों के साथ होली खेलने के लिए गया हुआ था. उसे पता भी नहीं था कि घर पर क्या हुआ है. जैसे ही मेरा बेटा आया, 15-20 लोगों ने उसके सिर पर लोहे के रॉड, बैट से मारा. हमें तो पता भी नहीं था कि उसको मारा है. मुझे मेरे चाचा का लड़का बुलाने के लिए आया. जब मैंने देखा तो वो पड़ा हुआ था. वो मंजर आज भी मेरी आंखों के सामने दिखता है."
मेमराज, तरुण के पिता

मीडिया से बातचीत में डीसीपी द्वारका कुशल पाल सिंह ने बताया, "4 तारीख की रात को 11 बजे हमें एक पीसीआर कॉल प्राप्त हुई कि पड़ोसी ने मेरे ताया का सिर फाड़ दिया है. तुरंत हमारा पुलिस स्टाफ मौके पर पहुंचा. मौके पर पहुंचने के बाद पाया गया कि विभिन्न समुदायों के दो पक्षों के बीच बैलून फेंकने को लेकर झगड़ा हुआ था."

"हम पर लगे आरोप झूठे हैं"

10 मार्च को आरोपियों के परिवार की एक सदस्य ने प्रेस कॉन्फ्रेंस कर उनके परिवार पर लगे सभी आरोपों को झूठा करार दिया. मीडिया से बातचीत में उन्होंने कहा, "यह दो परिवारों का मामला है जिसे बजरंग दल ने हिंदू मुस्लिम का मामला बना दिया है. ये जो हत्या का आरोप हम पे लगाया जा रहा है सरासर झूठ है. सारे लड़के नशे में आए थे. उन्हीं का डंडा तरुण के सिर पर लगा है."

पुलिस ने इस मामले में हत्या से जुड़ी धाराओं के अलावा एससी/एसटी एक्ट भी लगाया है.

द क्विंट ने जेजे कॉलोनी के स्थानीय लोगों से भी बात की, जिनका कहना था कि ये दो परिवारों का मामला है. वसीम खान कहते हैं, "ये रंग वाली लड़ाई नहीं है. इनकी पहले की लड़ाई है. इनकी आपस में पहले की चलती रही है. तीन दफे की तो कंफर्म है. बात ये है, दरअसल, दोनों राजस्थानी हैं. बस समाज अलग-अलग है."

हालांकि, तरुण के पिता ने पहले के किसी विवाद से इनकार किया है. उन्होंने कहा, "हमारी इनसे कोई घटना नहीं थी. ना हम इनसे बात करते थे. हम तो नॉर्मल तरीके से रहते थे. हम आते थे और अपने घर में चले जाते थे. वैसे इनसे हमारी कोई बात नहीं थी. हमारा कोई उनसे झगड़ा नहीं है."

लेकिन पुलिस का कहना है कि दोनों परिवार एक दूसरे को सालों से जानते हैं और इनके बीच पहले भी आपस में झगड़े होते रहे हैं.

"ये दोनों परिवार एक-दूसरे को लगभग 50 साल से जानते हैं. ये मूल रूप से राजस्थान के रहने वाले हैं. इससे पहले ये राजेंद्र नगर की झुग्गियों में रहते थे. 2004 के बाद से ये यहां शिफ्ट हो गए हैं. पूछताछ में ये भी पता चला है कि जैसा पड़ोसियों के बीच होता है, पार्किंग को लेकर पहले भी इनके बीच झगड़ा होता रहा है. लेकिन वो सांप्रदायिक नहीं था."
कुशल पाल सिंह, डीसीपी द्वारका

"गजवा-ए-हिंद नहीं, भगवा-ए-हिंद बनाएंगे"

घटना के बाद से हिंदूवादी संगठनों का तरुण के घर पर आना-जाना लगा हुआ है। 12 मार्च को बिट्टू बजरंगी, अंतरराष्ट्रीय हिंदू सेना के सदस्यों सहित कई दक्षिणपंथी संगठनों के लोग तरुण के घर पहुंचे और भड़काऊ भाषण दिया.

तरुण के परिवार से बात करते हुए एक साध्वी ने कहा, "हमें इनके (आरोपियों) घरों में घुसना पड़ेगा. जबतक नहीं घुसेंगे तब तक ये ऐसे ही करेंगे. मैं तो हर हिंदू भाई से कहूंगी, जैसे बड़े-बड़े सेलिब्रिटी के आने पर भीड़ लगाते हो, ऐसे ही भीड़ लगाओ."

अंतरराष्ट्रीय हिंदू सेना के स्वामी संतोष आनंद ने बकायदा तरुण के घर के बाहर पार्क में लोगों को संबोधित किया और कहा, "अगर आज भी तुम नहीं जगोगे, तुम्हें कोई जगाने वाला नहीं आएगा. हमारा संदेश है- तुम हिंदू भाई जाग जाओ, अपने आप को पहचान जाओ और संगठित हो जाओ."

"ये जेहादी सोच के लोगों का एक ही मकसद है- किस प्रकार से आने वाले समय में हम गजवा-ए-हिंद बनाएं. परंतु सबको संकल्प लेना होगा- गजवा-ए-हिंद नहीं भगवा-ए-हिंद हम बनाएंगे."

जमील अहमद कहते हैं, "वहां पर जो बाहर की भीड़ आ रखी है वो यह नहीं पहचानते कि ये लोग कहां के हैं. वो तो अपना काम करना चालू कर देंगे. उनको तो सिर्फ दाढ़ी-टोपी दिखती है. इसके अलावा कुछ नहीं दिखता. हमारे को गाली-गलौज, जिहादी और आतंकवादी बोलना. हम लोग वहां जाना चाहते थे, लेकिन इसी डर की वजह से हम लोग वहां नहीं जा रहे हैं."

आरोपी के घर पर चला बुलडोजर

घटना के चार दिन बाद, यानी 8 मार्च को दिल्ली म्यूनिसिपल कॉर्पोरेशन यानी MCD ने बिना नोटिस दिए एक आरोपी के घर के एक हिस्से को अतिक्रमण बताते हुए बुलडोजर से ढहा दिया था, जिसको लेकर भी सवाल उठे हैं.

आरोपी परिवार की सदस्य ने कहा, "सिर्फ एक तरफ की बातें सुनी जा रही हैं, दूसरी तरफ की ओर देखा भी नहीं जा रहा है. घरों पे बुलडोजर चलाया जा रहा है. डॉक्यूमेंट्स, कैश, जेवर- हमारा सारा सामान जला दिया. हमारे घर में शादी थी, तैयारियां चल रही थी. हमें बेघर कर दिया. हम कहां जाएंगे?"

साल 2024 की सुप्रीम कोर्ट की गाइडलाइंस के मुताबिक, किसी भी ढांचे को गिराने की कार्रवाई से पहले संपत्ति के मालिक या कब्जाधारी को कम से कम 15 दिन का नोटिस देना अनिवार्य है. इस नोटिस में स्पष्ट रूप से यह बताया जाना चाहिए कि किस ढांचे को गिराया जाना है और उसे गिराने के क्या कारण हैं.

हालांकि, नोटिस के सवाल पर MCD के एक अधिकारी ने इंडियन एक्सप्रेस से कहा कि, “अगर कोई ढांचा अवैध है, तो उसे गिराने से पहले नोटिस दिया जाता है. लेकिन अगर मामला अतिक्रमण का हो, तो नोटिस देना जरूरी नहीं होता.”

इस विवाद के बीच 12 मार्च को दिल्ली हाईकोर्ट ने आरोपियों के घरों पर बुलडोजर एक्शन पर एक हफ्ते के लिए रोक लगा दी है.

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