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सेंट स्टीफेंस कॉलेज में चर्च के सदस्य को शामिल करने को लेकर विरोध

सेंट स्टीफेंस कॉलेज में चर्च के सदस्य को शामिल करने पर विवाद

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सेंट स्टीफेंस कॉलेज में प्रवेश प्रक्रिया में चर्च ऑफ नॉर्थ इंडिया (CNI) को शामिल करने के फैसले को लेकर वहां के प्रोफेसर विरोध कर रहे हैं. कॉलेज के प्रिंसिपल जॉन वर्गीस ने 13 मई को स्टाफ काउंसिल मीटिंग में घोषणा की, कि प्रवेश के लिए छात्रों के चयन के लिए इंटरव्यू पैनल में सुप्रीम काउंसिल का सदस्य शामिल होगा, जिसमें सीएनआई के 6 सदस्य भी शामिल हैं.

कॉलेज के गवर्निंग बॉडी में शामिल प्रोफेसरों ने इस फैसले की निंदा करते हुए कहा कि "प्रिंसिपल का फैसला गैरकानूनी और गैर-शैक्षणिक है. ये कॉलेज के संविधान का उल्लंघन है.”

कॉलेज की क्रिश्चयन छवि को देखा जाए तो एडमिशन पाॅलिसी को ठीक करने के लिए ये सुप्रीम काउंसिल का विशेषाधिकार है. इसलिए हम पूरी तरह से उनके साथ चलते हैं. लेकिन जब रेगुलर एडमिनिस्ट्रेशन की बात आती है, संविधान (कॉलेज का) कहता है कि सुप्रीम काउंसिल की इसमें कोई भूमिका नहीं है. ये साफ-साफ वहां लिखा गया है. 
एशले एनपी, प्रोफेसर, सेंट स्टीफेंस कॉलेज
“ये पूरी तरह से कॉलेज संविधान के खिलाफ होगा. पूरी तरह से सुप्रीम कोर्ट के खिलाफ होगा. जिसके आधार पर हमें एडमिशन के लिए अलग इंटरव्यू करने और अल्पसंख्यक का दर्जा दिया गया है. ये एडमिशन की प्रक्रिया के एकेडमिक ताने-बाने के भी खिलाफ होगा.”
नंदिता नारायण, प्रोफेसर, सेंट स्टीफेंस कॉलेज
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प्रोफेसर नंदिता नारायण का कहना है कि “असल में ये हमें चुप रखने के लिए डराने-धमकाने का काम किया गया है. वो कहते हैं कि हमने गवर्निंग बॉडी के फैसले को गलत तरीके से पेश किया है. उस गवर्निंग बॉडी ने ये फैसला लिया था कि सुप्रीम काउंसिल के इंटरव्यू प्रक्रिया में बैठेंगे. हम सभी 100% सही हैं कि ऐसा नहीं हुआ है. अगर गवर्निंग बॉडी ने इसका फैसला किया था तो कॉलेज के संविधान के खिलाफ फैसले लेने का अधिकार गवर्निंग बॉडी के पास नहीं है.”

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