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"अगर हमें RSS का बेहतरीन मार्गदर्शन और सहयोग नहीं मिलता, तो हम यह फिल्म नहीं बना पाते. वे हमारे लिए 'गार्जियन एंजेल' (रक्षक) की तरह रहे हैं."
यह कहना था 'द केरल स्टोरी' और 'द केरल स्टोरी 2' के प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह का. उन्होंने यह बात 2023 में बैंकॉक में हुए 'वर्ल्ड हिंदू कांग्रेस' के दौरान कही थी. शाह का यह बयान उनके उन पुराने दावों से बिल्कुल अलग था, जिसमें उन्होंने कहा था कि उनकी फिल्म का किसी भी राजनीतिक दल या संगठन से कोई लेना-देना नहीं है.
लेकिन यह कोई इकलौता मामला नहीं है. द क्विंट की पड़ताल में ऐसी कम से कम 10 फिल्में सामने आई हैं, जिनके प्रोड्यूसर या डायरेक्टर का सीधा कनेक्शन बीजेपी, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) या हिंदुत्ववादी संगठनों से है.
द केरल स्टोरी 1 और 2
हमने पहले ही बताया कि कैसे प्रोड्यूसर विपुल अमृतलाल शाह ने इस फिल्म का क्रेडिट RSS को दिया है. लेकिन ये कनेक्शन सिर्फ यहीं तक सीमित नहीं है.
'द केरल स्टोरी 2' के डायरेक्टर हैं कामाख्या नारायण सिंह. साल 2025 में उन्होंने 'डेमोग्राफी इज डेस्टिनी' नाम की एक डॉक्यूमेंट्री बनाई थी. इसमें दावा किया गया था कि भारत में मुस्लिमों की आबादी हिंदुओं से ज्यादा हो जाएगी. हालांकि, ये दावे पूरी तरह बेबुनियाद हैं और रिसर्च में गलत साबित हो चुके हैं. लेकिन यहां हमारे लिए गौर करने वाली बात यह है कि इस डॉक्यूमेंट्री के प्रोड्यूसर रवींद्र सांघवी हैं, जो RSS से जुड़े हुए हैं. वह RSS मुंबई के विभाग संघचालक रह चुके हैं.
बता दें कि विपुल शाह 'बस्तर: द नक्सल स्टोरी' के भी प्रोड्यूसर हैं.
ऐसी खबरें भी आई थीं कि विपुल शाह ने 2023 में केरल के एक हिंदुत्ववादी संगठन 'आर्ष विद्या समाजम' को दो बार में 1 करोड़ रुपये दान दिए थे. यह संगठन दावा करता है कि वह उन हिंदू महिलाओं को "बचाता" है जिनका जबरन धर्म परिवर्तन कराया गया है.
हालांकि, 'द न्यूज मिनट' की एक रिपोर्ट के मुताबिक, इस संगठन से जुड़े योग केंद्रों पर महिलाओं को प्रताड़ित करने और उन्हें बंधक बनाकर रखने के आरोप लग चुके हैं.
कुछ ऐसे ही आरोप हादिया (मूल नाम अखिला अशोकन) ने भी लगाए थे. हादिया एक हिंदू महिला थीं, जिन्होंने अपनी मर्जी से एक मुस्लिम शख्स से शादी की थी. उनके पिता के कोर्ट जाने के बाद पहले यह शादी रद्द कर दी गई थी, लेकिन बाद में सुप्रीम कोर्ट ने इसे बहाल कर दिया था.
रजाकार (Razakar)
यह 2024 में आई एक तेलुगु फिल्म है, जो निजाम शासन के दौरान 'रजाकार' अर्धसैनिक बल द्वारा किए गए कथित अत्याचारों को दिखाने का दावा करती है. इस फिल्म के प्रोड्यूसर गुडूर नारायण रेड्डी हैं, जो तेलंगाना बीजेपी के सक्रिय सदस्य हैं. साल 2023 के विधानसभा चुनावों में उन्होंने भोंगिर सीट से बीजेपी के टिकट पर चुनाव भी लड़ा था.
स्वतंत्र वीर सावरकर (Swatantra Veer Savarkar)
जब यह फिल्म रिलीज हुई, तो सारा ध्यान इसके डायरेक्टर और लीड एक्टर रणदीप हुड्डा पर था. लेकिन इसके प्रोड्यूसर आनंद पंडित हैं, जो महाराष्ट्र बीजेपी के कोषाध्यक्ष (ट्रेजरर) रह चुके हैं. आनंद पंडित का कनेक्शन हमारी अगली फिल्म से भी है.
पीएम नरेंद्र मोदी (PM Narendra Modi)
विवेक ओबेरॉय स्टारर यह फिल्म प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की बायोपिक है. आनंद पंडित की कंपनी 'आनंद पंडित मोशन पिक्चर्स' इस फिल्म के प्रोड्यूसर्स में से एक हैं.
एक्सीडेंट या कॉन्सपिरेसी: गोधरा (Accident or Conspiracy: Godhra)
गुजरात से बीजेपी विधायक और एक्टर हितु कनोडिया इस फिल्म का हिस्सा हैं. उनके पिता और चाचा भी बीजेपी के बड़े नेता रहे हैं. फिल्म के प्रोड्यूसर बी.जे. पुरोहित हैं, जो बीजेपी के समर्थक माने जाते हैं. वहीं, इसके डायरेक्टर एम.के. शिवाक्ष उत्तर प्रदेश की बीजेपी सरकार के कई प्रोजेक्ट्स पर काम कर चुके हैं.
बंगाल 1947 (Bengal 1947)
इसके डायरेक्टर आकाशादित्य लामा हैं और उनका मामला काफी दिलचस्प है. वह 'भारतीय चित्र साधना' नाम के संगठन के संयुक्त सचिव (Joint Secretary) हैं. यह संगठन सीधे तौर पर RSS से जुड़ा है और इसका मकसद फिल्म इंडस्ट्री को संघ की विचारधारा से जोड़ना है.
उनकी वेबसाइट के मुताबिक, "भारतीय चित्र साधना की शुरुआत 2016 में ऐसी फिल्मों को बढ़ावा देने के लिए की गई थी, जो प्राचीन और आधुनिक भारतीय मूल्यों और दर्शन का प्रचार करती हों."
इस संगठन के चेयरमैन बी.के. कुठियाला हैं, जिन्हें एक प्रमुख हिंदुत्ववादी विचारक माना जाता है. 2019 में, हरियाणा की बीजेपी सरकार ने उन्हें 'हरियाणा राज्य उच्च शिक्षा परिषद' का चेयरमैन बनाया था.
द एक्सीडेंटल प्राइम मिनिस्टर (The Accidental Prime Minister)
अनुपम खेर स्टारर इस फिल्म में पूर्व प्रधानमंत्री मनमोहन सिंह और उनके कार्यकाल का मजाक उड़ाया गया था, साथ ही कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी की कड़ी आलोचना की गई थी. इसके डायरेक्टर विजय रत्नाकर गुट्टे हैं. उनके पिता रत्नाकर गुट्टे 'राष्ट्रीय समाज पक्ष' के नेता हैं, जो महाराष्ट्र में बीजेपी का सहयोगी दल है.
उदयपुर फाइल्स (Udaipur Files)
उदयपुर में दो मुस्लिम चरमपंथियों द्वारा दर्जी कन्हैया लाल की हत्या पर आधारित इस फिल्म के प्रोड्यूसर अमित जानी हैं. अमित जानी 'हिंदू एक्शन फोर्स' के संस्थापक और 'उत्तर प्रदेश नवनिर्माण सेना' के अध्यक्ष हैं. वह दादरी और राजसमंद मॉब लिंचिंग (भीड़ द्वारा हत्या) के आरोपियों को चुनाव का टिकट देने की बात कहकर चर्चा में रहे थे.
जहांगीर नेशनल यूनिवर्सिटी (Jahangir National University)
इस फिल्म को 'महाकाल मूवीज प्राइवेट लिमिटेड' ने प्रोड्यूस किया है. इस कंपनी के डायरेक्टर्स में से एक विष्णु तांतिया हैं. तांतिया, हरियाणा के राजनेता गोपाल गोयल (गोपाल कांडा) के बिजनेस पार्टनर हैं, जो राज्य में बीजेपी के साथ गठबंधन में हैं.
तांतिया और कांडा 'MDLR एयरलाइंस', 'MDLR स्टील' और 'MDLR इंफ्रास्ट्रक्चर' जैसी कई कंपनियों में साथ में डायरेक्टर हैं. इसके अलावा, तांतिया कई अन्य कंपनियों में गोपाल कांडा के परिवार के सदस्यों के साथ भी पार्टनर हैं.
ये 10 फिल्में तो बस एक बानगी भर हैं, लिस्ट इससे कहीं ज्यादा लंबी हो सकती है. ऐसी और भी कई फिल्में हो सकती हैं जो बीजेपी या RSS की विचारधारा से प्रेरित हों, या जिन्हें उनसे जुड़े लोगों ने फंड किया हो.
इतना ही नहीं, कई फिल्में तो ऐसी हैं जिनका खुद बीजेपी के बड़े नेता खुलकर प्रमोशन करते नजर आते हैं. मिसाल के तौर पर, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने खुद 'द कश्मीर फाइल्स', 'आर्टिकल 370', 'द साबरमती रिपोर्ट', 'द केरल स्टोरी' और 'छावा' जैसी फिल्मों की सार्वजनिक रूप से तारीफ की है.
'द कश्मीर फाइल्स' और 'द केरल स्टोरी' जैसी कुछ फिल्मों को तो बीजेपी शासित राज्यों में टैक्स-फ्री तक कर दिया गया था. यही नहीं, बीजेपी, ABVP और संघ से जुड़े संगठनों ने अक्सर ऐसी वैचारिक फिल्मों की स्पेशल स्क्रीनिंग (विशेष प्रदर्शन) का भी इंतजाम किया है.
कुल मिलाकर देखें तो, एक खास विचारधारा से जुड़ी फिल्मों को बनाने या उन्हें प्रमोट करने में बीजेपी और संघ की भूमिका काफी अहम नजर आती है.
सेंसर बोर्ड का क्या हाल है?
एक बड़ा सवाल सेंसर बोर्ड पर भी खड़ा होता है ऐसा कैसे है कि हिंदुत्व की विचारधारा को बढ़ावा देने वाली या मुस्लिमों के खिलाफ नफरत फैलाने वाली फिल्मों को आसानी से क्लीयरेंस मिल जाता है, लेकिन पंजाब में पुलिस द्वारा की गई कथित हत्याओं का पर्दाफाश करने वाली फिल्म (जसवंत सिंह खालरा पर आधारित) को सेंसरशिप का सामना करना पड़ता है?
तो आखिर इस सेंसर बोर्ड में हैं कौन लोग?
सेंसर बोर्ड (CBFC) के चेयरमैन प्रसून जोशी हैं, जिन्होंने मोदी सरकार के लिए कैंपेन बनाए हैं और प्रधानमंत्री के लिए गाने भी लिखे हैं.
बोर्ड के अन्य सदस्यों में शामिल हैं
विवेक अग्निहोत्री: 'द कश्मीर फाइल्स' और 'द कश्मीर फाइल्स' जैसी फिल्मों के डायरेक्टर.
रमेश पतंगे: RSS से जुड़े हुए हैं.
गौतमी तड़िमल्ला: बीजेपी की सहयोगी पार्टी AIADMK से जुड़ी एक्ट्रेस.
वाणी त्रिपाठी टिक्कू: बीजेपी की पूर्व राष्ट्रीय सचिव.
जीविता राजशेखर: तेलंगाना में बीजेपी सदस्य.
टी.एस. नागभरण: कर्नाटक में खुलकर बीजेपी का समर्थन करने वाले.
अब पूरी तस्वीर आपके सामने साफ है. बीजेपी, RSS और हिंदुत्ववादी संगठनों से जुड़े लोग ऐसी फिल्में बनाते हैं जो या तो सरकार की छवि चमकाती हैं या किसी खास समुदाय या राज्य के खिलाफ नफरत फैलाती हैं. समाज में बंटवारा और भाईचारे को नुकसान पहुंचाने के बावजूद, इन फिल्मों को आसानी से क्लीयरेंस मिल जाता है. और रिलीज के बाद, सरकार या पार्टी से जुड़े लोग इनका जमकर प्रमोशन करते हैं.
ऐसा लगता है कि जनता को एक खास विचारधारा की ओर धकेलने के लिए पूरा का पूरा सिस्टम काम कर रहा है.
(हिमांशु दहिया के इनपुट्स के साथ)
(ट्रांसलेशन: नौशाद मलूक)
