बिहार (Bihar) में इस साल विधानसभा चुनाव (Assembly Elections) होने हैं. लेकिन उससे पहले आरक्षण (Reservation) का मुद्दा एक बार फिर सुर्खियों में है. हाल ही में पूर्व उपमुख्यमंत्री और नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव और उनकी पार्टी ने सड़क से लेकर सदन तक इस मुद्दे को उठाया. तेजस्वी ने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली एनडीए सरकार पर आरक्षण और नौकरी चोरी करने का आरोप लगाया.
हालांकि, आरक्षण के मुद्दे से प्रदेश की कास्ट पॉलिटिक्स यानी जातिगत राजनीति को हवा मिल गई है. ऐसे में समझने की कोशिश करते हैं कि आगामी विधानसभा चुनावों में जाति फैक्टर कितना अहम होगा. जातिगत समीकरण क्या कहते हैं? इंडिया गठबंधन और एनडीए में किसका पलड़ा भारी है? और आरक्षण की सीमा बढ़ाने को लेकर क्या है कानूनी पेंच?

