साल 2023 अपना सफर लगभग खत्म करने वाला है. हमारे दिमाग में जैसे ही साल के आखिरी दिन का खयाल आता है, एक अलग तरह की घबराहट महसूस होती है. यह हम सब के लिए आम है, अचानक ऐसा लगता है कि पूरा साल इतनी तेजी से कैसे निकल गया.
क्या हम जनवरी में सुप्रीम कोर्ट (Supreme Court) द्वारा नोटबंदी को वैध करार देने पर चर्चा नहीं कर रहे थे? क्या यह कुछ दिन पहले की बात नहीं लगती, जब भारत में तलाक की कार्यवाही को इसके लिए एक नया आधार पेश करके तेज कर दिया गया था?

