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पहलवानों का विरोध और पुरुष प्रधान समाज को चुनौती: सरकार की क्या जिम्मेदारी है?

विरोध प्रदर्शन उस भ्रष्ट व्यवस्था के खिलाफ प्रतिरोध का प्रतीक है, जिसने हमारे पहलवानों से उनका अधिकार छीन लिया है.

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पहलवानों का विरोध प्रदर्शन (Wrestlers Protest) समकालीन भारत के इतिहास में एक ऐतिहासिक घटना है. यह हाल के दिनों में अंतरराष्ट्रीय और ओलंपिक स्तर के एथलीटों के सबसे लंबे विरोध प्रदर्शनों में से एक है. इसके जरिये खेलों में महिलाओं के प्रति सरकार के पुरुष प्रधान रवैये को चुनौती दी गई है.

पहलवानों ने 15 जून तक सभी गतिविधियों को स्थगित करने का फैसला किया है. आइये पिछले चार महीनों के विरोध प्रदर्शनों पर एक नजर डालते हैं और हरियाणा और दिल्ली-एनसीआर में लेखक के अपने फील्डवर्क के नतीजे के आधार पर जानने की कोशिश करते हैं कि प्रदर्शन करने वाले पहलवानों का देश पर क्या असर पड़ा है.

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