भारतीय संविधान लागू होने के मात्र तीन साल बाद ही इसके मुख्य निर्माता बीआर अंबेडकर ने संसद में सबके सामने इसका परित्याग कर दिया था. राज्यसभा में 1953 में उनकी चौंकाने वाली स्वीकारोक्ति सामने आई:
महोदय, मेरे मित्र कहते हैं कि संविधान मैंने बनाया है. पर मैं यह कहने के लिए बिल्कुल तैयार हूं कि मैं इसे जलाकर राख करने वाला पहला व्यक्ति होऊंगा. मैं इसे नहीं चाहता हूं. यह किसी के काम का नहीं है.बीआर अंबेडकर
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